कभी खास मौकों पर लगाते थे इत्र, अब रोज की जरूरत बना परफ्यूम! ऐसे बदल रहा है भारत का फ्रेगरेंस मार्केट
आज परफ्यूम सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल और पर्सनैलिटी का एक अहम हिस्सा बन गया है।

ग्लोबल मार्केट में धूम मचा रहे देसी परफ्यूम ब्रांड्स (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एक समय था जब भारतीयों के लिए खुशबू का मतलब सिर्फ कुछ खास मौकों पर लगाया जाने वाला इत्र हुआ करता था, या फिर रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले आम डियोड्रेंट।
हालांकि, अब हवा का रुख पूरी तरह से बदल चुका है। परफ्यूम आज केवल एक प्रोडक्ट नहीं रहा, बल्कि यह लोगों की लाइफस्टाइल और उनकी पर्सनैलिटी का एक जरूरी हिस्सा बन गया है।
ई-कॉमर्स की आसान पहुंच, लोगों की बढ़ती कमाई, सोशल मीडिया का प्रभाव और विदेशी ब्रांड्स की मौजूदगी ने मिलकर भारतीय फ्रेगरेंस मार्केट को एक नई रफ्तार दे दी है।

(Image Source: AI-Generated)
हर 5 सेकंड में बिक रहा एक परफ्यूम
इस इंडस्ट्री की तेज ग्रोथ को कुछ आंकड़ों के जरिए आसानी से समझा जा सकता है:
- साल 2025 आते-आते भारत का परफ्यूम मार्केट लगभग 12,500 से 14,500 करोड़ रुपये का हो गया।
- मार्केट रिसर्च एजेंसी 'यूरोमॉनिटर' के मुताबिक, 2025 में इस कैटेगरी की बिक्री में 15% का उछाल आया है और यह 66.4 अरब रुपये तक पहुंच गई है।
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'नायका' के अनुसार, उनके ऐप पर हर 5 सेकंड में एक नई फ्रेगरेंस खरीदी जा रही है। वहीं, 'टाइटन' ने भी 2024 में अपने ऑनलाइन परफ्यूम बिजनेस में 25-30 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की।
- 'आईएमएआरसी ग्रुप' का अनुमान है कि 2034 तक यह इंडस्ट्री लगभग 19 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा छू लेगी। सबसे खास बात यह है कि इसकी मांग अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों से भी बड़ी डिमांड आ रही है।
दुनिया भर में छा रही है 'देसी महक'
भारत सदियों से दुनिया के बड़े परफ्यूम ब्रांड्स को चमेली, चंदन, गुलाब, केवड़ा और अत्तर जैसे कच्चे माल की सप्लाई करता आ रहा है। लेकिन अब भारतीय ब्रांड्स खुद ग्लोबल मार्केट में अपनी पहचान बना रहे हैं।
'रहस्य' और 'रूहवेदा' जैसे देसी ब्रांड्स सीधे लंदन के 'सेल्फ्रिज' और 'सैफोरा' जैसे दुनिया के सबसे बड़े रिटेल स्टोर्स में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। ये ब्रांड्स राजा-महाराजाओं वाली पुरानी छवि से अलग हटकर भारतीय चाय, चंदन, चमेली और मानसून की पहली बारिश के बाद मिट्टी की सोंधी महक जैसी हमारी आम अनुभूतियों को दुनिया के सामने मॉडर्न अंदाज में पेश कर रहे हैं।
बाजार में इस बंपर तेजी की 5 बड़ी वजहें
- ऑनलाइन शॉपिंग का विस्तार: महंगे परफ्यूम खरीदने के लिए अब मॉल्स के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। मिंत्रा, नायका, अमेजन, टिरा और ब्रांड्स की वेबसाइट्स ने इसे हर घर तक पहुंचा दिया है। इसके अलावा, क्विक-कॉमर्स की मदद से 10-15 मिनट में परफ्यूम की डिलीवरी हो रही है।
- ग्लोबल ब्रांड्स की एंट्री: टॉम फोर्ड, गुच्ची फ्लोरा, जो मालोन, वाईएसएल, डिप्टीक और मैसन मार्जिएला जैसे इंटरनेशनल ब्रांड्स अब भारत में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, जिससे ग्राहकों को नए विकल्प मिल रहे हैं।
- युवाओं का नया शौक: आज के युवा परफ्यूम को अपनी 'पर्सनल ब्रांडिंग' मानते हैं। सोशल मीडिया पर 'सिग्नेचर सेंट' और खुशबुओं की 'लेयरिंग' जैसे ट्रेंड्स हावी हैं। पहली नौकरी वाले युवा भी 2,000 से 5,000 रुपये का बजट बना रहे हैं, और कुछ तो 15,000 रुपये तक के लग्जरी परफ्यूम खरीद रहे हैं।
- सोशल मीडिया की ताकत: इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर मौजूद फ्रेगरेंस कम्युनिटी परफ्यूम के 'नोट्स', लॉन्गिविटी और रिव्यू के बारे में जानकारी देती है, जिससे ग्राहकों का भरोसा काफी बढ़ा है।
- प्रीमियम चीजों की चाहत: लोगों के पास अब खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे हैं। जैसे स्किनकेयर और फैशन में महंगे विकल्पों की मांग बढ़ी है, वैसा ही असर अब परफ्यूम में भी दिख रहा है।
सस्ते डियो बिगाड़ रहे हैं महंगे ब्रांड्स का खेल
आने वाले समय में यह बाजार छोटे सैंपल्स, एआई की मदद से मिलने वाले सुझावों, पर्सनलाइजेशन और टियर-2 व टियर-3 शहरों की डिमांड के दम पर और बड़ा होगा। हालांकि, इस रास्ते में कुछ रुकावटें भी हैं। बाजार में बिकने वाले नकली परफ्यूम और ग्रे मार्केट के प्रोडक्ट्स ग्राहकों का भरोसा तोड़ रहे हैं।
इसके अलावा, सस्ते डिओड्रेंट और बॉडी स्प्रे आज भी महंगे ब्रांड्स को कड़ी टक्कर देते हैं। इस कड़े मुकाबले में वही कंपनियां टिकेंगी, जो कुछ नया पेश करेंगी, जिनका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत होगा और जो ग्राहकों के बीच अपनी एक पक्की पहचान बना पाएंगी।
