कूच बिहार की महारानी ने फ्रांस से मंगवाई थी 9 गज की सफेद साड़ी, तभी से शिफॉन की हुई थी भारत में रॉयल एंट्री
शिफॉन की साड़ियों का फैशन भारत में कूच बिहार की महारानी इंदिरा देवी ने फ्रांस से 9 गज की साड़ी मंगवाकर शुरू किया था।

भारत में शिफॉन की साड़ियों का इतिहास (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हर दिन कपड़ों का बदलता स्टाइल मॉडर्न फैशन की निशानी है, लेकिन कुछ ट्रेंड ऐसे हैं जो सदाबहार हैं। शिफॉन की साड़ियां इन्हीं में से एक है, जिसे पहनने के लिए कभी सोचना नहीं पड़ता। यही वजह है कि सादगी और रॉयल टच दोनों की मिसाल देती शिफॉन की साड़ियां आज सेलेब्स और आम महिलाओं तक की पहली पसंद बनी हुई हैं।
पर क्या आप जानते हैं कि इन साड़ियों का फैशन सेलेब्स ने नहीं, बल्कि भारत की रानी-महारानियों ने शुरू किया था? चलिए आज आपको शिफॉन की साड़ियों का इतिहास बताते हैं कि आखिर कैसे ये रॉयल फैमिली के एलीगेंट लुक का हिस्सा बन गई।
कहां से शुरू हुआ शिफॉन के कपड़े का फैशन?
शिफॉन बोलचाल में इतना आम हो चुका है कि हम जानते ही नहीं, यह एक फ्रांसीसी शब्द है। दरअसल, इसे फ्रांसीसी शब्द शीफ से लिया गया है, जिसका मतलब होता है कपड़े का टुकड़ा या चीथड़ा। इसके नाम से अब यह भले ही सस्ता या रद्दी कपड़ा लग रहा हो, लेकिन यह फ्रांस का एक बहुत ही महंगा कपड़ा है।
18 वीं शताब्दी की औद्योगिक क्रांति के समय शिफॉन फ्रांस में इस कपड़े का उत्पादन होता था, जिसमें सिर्फ रेशम यानी सिल्क के कपड़े का ही इस्तेमाल किया जाता था। ऐसे में केवल फ्रांस का कुलीन वर्ग ही इससे कपड़े पहनता था। जान लेने वाली बात यह है कि आज शिफॉन को बनाने के लिए सिल्क के साथ पॉलिएस्टर फैब्रिक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
शिफॉन की साड़ी कूच बिहार की महारानी लाई थीं भारत
भारत में शिफॉन को लाने का श्रेय कूच बिहार की महारानी इंदिरा देवी को जाता है। इंदिरा देवी बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय और महारानी चिमनाबाई की इकलौती बेटी थीं। उनकी शादी जब कूच बिहार रियासत के महाराजा जितेंद्र नारायण से हुई, तब वो लंदन में थीं। पर महज 30 साल की उम्र में ही उनके पति का निधन हो गया।
कहा जाता है कि पति की मृत्य के बाद उन्होंने अपने जीवन को बांधा नहीं, उसे खुला छोड़ दिया। उस दौर में हिन्दू विधवाओं को सफेद साड़ी पहनना परंपरा थी, ऐसे में महारानी ने भी ऐसा ही किया, पर उनका स्टाइल एकदम अनोखा और मॉडर्न था। कहते हैं कि एक बार फ्रांस में उनकी निगाह शिफॉन के हल्के और सादगी भरे कपड़े पर पड़ी। महारानी को वो कपड़ा इतना पसंद आया कि उन्होंने इससे 9 गज की साड़ी बनाने का ऑर्डर दे दिया। इस तरह भारत में शिफॉन की साड़ियों के फैशन की शुरुआत हुई।
जयपुर की महारानी गायत्री देवी आगे बढ़ाई मां की विरासत
महारानी इंदिरा देवी के बाद उनकी बेटी गायत्री देवी ने शिफॉन की साड़ियों के फैशन को बरकरार रखा। बता दें कि गायत्री देवी की शादी जयपुर के महराजा मान सिंह द्वितीय से हुई थी। महारानी शिफॉन की साड़ियों को पेस्टल शेड्स जैसे- आइवरी, पिंक, ब्लू, हल्के को ही खासतौर से चुनती थीं। फिर इनपर बनी फूलों की डिजाइन भी बेहद आकर्षक थी।
बताते चलें कि इसके अलावा, गायत्री देवी अपने नवरत्न हार और बॉब हेयर कट के लिए भी जानी जाती थीं। यही उनका सिग्नेचर स्टाइल बना जिसे दुनिया की मैशहूर मैगजीन ने भी सराहा।
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