दीपावली की खरीदारी पर महंगाई का साया, रोशनी में भी करनी पड़ रही कटौती
चक्रधरपुर में दीपावली की खरीदारी पर महंगाई का असर साफ दिख रहा है, जिससे त्योहार का उत्साह कुछ कम हुआ ...और पढ़ें

दीपावली पर खरीदी करती महिलाएं
HighLights
तेल महंगा होने से दीये जलाने का खर्च बढ़ा।
मध्यमवर्गीय परिवार बजट संतुलित करने में जुटे हैं।
धान के मुकुट की बिक्री भी प्रभावित हुई।
जागरण संवाददाता, चक्रधरपुर। दीपावली का उल्लास एक दिन पूर्व बाजारों में दिखा, लेकिन महंगाई ने त्योहार की तैयारियों का उत्साह कुछ कम कर दिया है। घर-आंगन को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीये, मोमबत्तियां और सजावटी सामान बाजार में उपलब्ध हैं, बिक भी रहे हैं।
दुकानों पर रंग-बिरंगी झालर और पूजन सामग्री भी सजी हुई है। इसके बावजूद इस बार खरीदारी में पहले जैसी तेजी नजर नहीं आई। इसकी बड़ी वजह रोजमर्रा के सामान की बढ़ती कीमतें हैं।
दीपावली पर मिट्टी के दीयों की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन उन्हें जलाने के लिए इस्तेमाल होने वाला तेल पिछले वर्ष के मुकाबले 30 से 40 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। इसका सीधा असर लोगों की खरीदारी पर पड़ रहा है।
घरों को अधिक संख्या में दीयों से सजाने की इच्छा रखने वाले परिवार भी खर्च का आकलन कर रहे हैं। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए पूजा, सजावट, मिठाई और अन्य जरूरी सामान के बीच बजट संतुलित करना मुश्किल हो रहा है।
15 रुपये दर्जन बिक रहे मिट्टी के दीये
गुदड़ी बाजार के दुकानदार ननकू प्रजापति और गुलशन प्रजापति का कहना है कि मिट्टी के दीयों की कीमत पिछले वर्ष की तरह इस बार भी 15 रुपये दर्जन है। कुम्हारों की ओर से दीयों की आपूर्ति में भी कोई कमी नहीं है।
इसके बावजूद तेल की कीमत बढ़ने से दीये जलाने का कुल खर्च बढ़ गया है। दुकानदारों के अनुसार, ग्राहक दीये खरीदने से पहले अन्य जरूरी सामानों के खर्च का भी हिसाब लगा रहे हैं।
धान के मुकुट की बिक्री भी प्रभावित
बाजार में धान का मुकुट (मोड़) बेचने वाले मुकेश भी ग्राहकों की कम आमद से चिंतित हैं। उनके यहां 20 और 30 रुपये की कीमत वाले मुकुट उपलब्ध हैं, लेकिन बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है। बाजार में शाम पांच बजे के बाद ग्राहकों की आवाजाही भी कम होने लगी और लोग खरीदारी कर घर लौटते दिखे।
त्योहार की रौनक पर खर्च का दबाव
इस बार दीपावली के बाजार में कीमतों का अंतर साफ नजर आ रहा है। मिट्टी के दीये अब भी पुराने दाम पर मिल रहे हैं, लेकिन उन्हें रोशन करने का खर्च बढ़ गया है। वहीं, अन्य जरूरी सामान भी महंगे हुए हैं।
ऐसे में त्योहार मनाने की तैयारी कर रहे परिवार खरीदारी में जरूरत और बजट के बीच तालमेल बैठाने में जुटे हैं। बाजार में सजावट और रोशनी की तैयारी तो है, लेकिन महंगाई के कारण ग्राहकों के कदम कुछ संभलकर बढ़ रहे हैं।
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