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सैलरी मांगने पर कंपनी ने बनाया बंधक; तमिलनाडु से जान बचाकर लौटे झारखंड के 60 मजदूर, ट्रेन में भी झेली यातना 

Published: Sat, 25 Apr 2026 07:44 PM (IST)

तमिलनाडु की आलिया मिल्स में बंधक बनाए गए 60 झारखंडी मजदूर जान बचाकर चक्रधरपुर लौटे। उन्हें मजदूरी नहीं मिली और ट्रेन यात्रा के दौरान भी दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।

तमिलनाडु से वापस लौटे झारखंड के 60 मजदूर। फोटो जागरण

तमिलनाडु से वापस लौटे झारखंड के 60 मजदूर। फोटो जागरण

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जागरण संवाददाता, चक्रधरपुर। तमिलनाडु के नमक्कल अन्नागुर में स्थित आलिया मिल्स प्राइवेट लिमिटेड में बंधक बना कर रखे गए तक़रीबन 60 मजदूर किसी तरह मिल्स से भागकर एर्नाकुलम टाटा एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर कई तरह की परेशानियों को झेलते हुए शनिवार को चक्रधरपुर स्टेशन पहुंचे।

स्टेशन पहुंचकर जो जानकारी मजदूरों ने दी है, वह बेहद चौंकाने वाली है। मजदूरों ने बताया है कि उन्हें किसी भी तरह की झारखंड सरकार की मदद तक नहीं मिली। वे किसी तरह तमिलनाडु के आलिया मिल्स से भाग निकलने में सफल रहे।

उन्हें कंपनी के द्वारा उनकी मजदूरी भी नहीं दी गई थी। वे किसी तरह ट्रेन में बचे खुचे पैसे को TTE को देकर फाइन कटवाकर ट्रेन में सफर कर चक्रधरपुर पहुंचे थे।

इस दौरान TTE से लेकर रेलवे के पेंट्रीकार मैनेजर ने उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया। दुर्व्यवहार का यह सिलसिला चक्रधरपुर स्टेशन में भी देखने को मिला। चक्रधरपुर स्टेशन में भी टीटीई के द्वारा मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार किये जाने की बात सामने आई है।

टीटीई द्वारा उनसे पैसे की मांग की जा रही थी, जबकि सभी मजदूर टीटीई को फाइन कटवाकर ट्रेन में सवार हुए थे और भूखे प्यासे चक्रधरपुर तक पहुंचे थे।

उनकी जेब में इतना भी पैसा नहीं बचा था कि वे कुछ खा कर अपनी भूख भी मिटा सकें, लेकिन चक्रधरपुर पहुंचते ही इन मजदूरों को टीटीई ने स्टेशन में घेर लिया और पैसों की मांग करने लगे। उन्हें काफी देर तक रोक कर भी रखा गया। पत्रकार की हस्तक्षेप पर छोड़ दिया गया।

सीएम ने मजदूरों को मदद करने का दिया था आदेश

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने पश्चिमि सिंहभूम के डीसी से लेकर माइग्रेट सेल को इन मजदूरों को मदद पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया एक्स में आदेश देकर सरकार की संवेदनशीलता दिखा रहे थे।

23 अप्रैल को डीसी ने दावा किया था की सबको मदद पहुंचकर बेहतर तरीके से ट्रेन से लाया जा रहा है। वहीं जमीनी हकीकत में इन मजदूरों को झारखंड सरकार ने भी उनके हाल पर छोड़ दिया था।

झारखंड सरकार के द्वारा इन्हें किसी तरह की मदद नहीं पहुंचाई गयी थी। भूखे प्यासे जिल्लत दुर्व्यवहार और शोषण का शिकार बनते हुए सभी मजदूर चक्रधरपुर पहुंचे थे।

ओडिशा के एजेंट चन्दन और सुशील ने सभी को भेजा था तमिलनाडु

मजदूरों ने बताया है कि ओडिशा के एजेंट चन्दन और सुशिल के द्वारा उन्हें तमिलनाडु के नमक्कल अन्नागुर में स्थित आलिया मिल्स ले जाया गया था।

एजेंट ने उन्हें बेहतर परिवेश में रहना खाना और अच्छी सैलरी का सब्जबाग दिखाया गया था, लेकिन ऐसा कुछ भी कंपनी में उन्हें नहीं मिल रहा था।

इसलिए वे इसका विरोध कर रहे थे, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान देने के बजाये उनसे उल्टा मारपीट की गई और उन्हें बंधक बनाकर उनसे काम लेने की कोशिश की गई।

एजेंट के द्वारा मजदूरों को चक्रधरपुर पहुंचने पर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी गई है। झारखंड के मजदूरों की इस दुर्गति से झारखंड सरकार की भी किरकिरी हो रही है। जो अपने राज्य से बाहर जा रहे मजदूरों को राज्य में ही काम नहीं दे पा रही है।

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