झारखंड के आदिवासी गांव में सड़क ही नहीं, खाट पर गर्भवती को 4 KM तक ढोया
Jharkhand Helth System: साहिबगंज जिले में सड़क के अभाव के कारण एक गर्भवती महिला को खाट पर लादकर 4 किलोमीटर ...और पढ़ें
HighLights
साहिबगंज में गर्भवती महिला को खाट पर ले जाया गया।
सड़क न होने से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची।
ग्रामीणों ने पक्की सड़क बनाने की मांग की है।
जागरण संवाददाता, साहिबगंज। झारखंड बनने के 26 साल हो चुके हैं। इस राज्य का निर्माण आदिवासियों के विकास को ध्यान में रखते हुए किया गया था। हालांकि, इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी झारखंड के आदिवासी बहुल संताल परगना का बहुत बुरा हाल है।

झारखंड के संताल परगना में अभी भी सड़क और स्वास्थ्य का घोर अभाव है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नहीं है। स्वास्थ्य व्यवस्था खाट पर है। इससे आम और खास हर कोई हलकान-परेशान है।
साहिबगंज जिले के बोरियो प्रखंड के मोतीपहाड़ी बड़ा पंचायत अंतर्गत पोड़ैया बेड़ो गांव में सड़क की बदहाली के कारण एक गर्भवती महिला को खाट पर लादकर करीब चार किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से ले जाना पड़ा।
गांव तक 108 एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद ग्रामीणों ने महिला को खाट पर उठाकर पोड़ैया संथाली गांव पहुंचाया। वहां से टोटो के जरिए उन्हें बोरियो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।
जानकारी के अनुसार, गांव निवासी बुधना पहाड़िया की 19 वर्षीय पत्नी सुकुरमुनी पहाड़िन को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों ने एंबुलेंस बुलाई थी, लेकिन सड़क के अभाव में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।
ग्राम प्रधान चांदू मालतो के अनुसार सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार आवेदन और आंदोलन किए गए, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गांव तक पक्की सड़क बनाने की मांग की है।
झारखंड के साहिबगंज के आदिवासियों का हाल देखिए। इन आदिवासियों के वोट से हेमंत सोरेन सीएम बने हैं। @HemantSorenJMM @JmmJharkhand @dc_sahibganj https://t.co/znA3sEnAgY
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