साहिबगंज में गंगा कटाव से रेलवे ट्रैक पर संकट, ट्रेनों का आवागमन रुका; युद्धस्तर पर काम जारी
Eastern Railway News: साहिबगंज में गंगा नदी के कटाव से रेलवे ट्रैक को खतरा बढ़ गया है, जिससे बरहड़वा-साहिबगंज रेल खंड पर ट्रेनों का परिचालन दूसरे दिन भी ठप रहा।

गंगा के कटाव से रेल पटरी को सुरक्षित बनाने के लिए काम करते मजदूर। (फोटो जागरण)
HighLights
साहिबगंज में गंगा कटाव से रेलवे ट्रैक को खतरा।
बरहड़वा-साहिबगंज रेल खंड पर ट्रेनों का परिचालन ठप।
रेलवे प्रशासन द्वारा युद्धस्तर पर कटावरोधी कार्य जारी।
जागरण संवाददाता, साहिबगंज। बरहड़वा-साहिबगंज रेल खंड पर सकरीगली और महाराजपुर के बीच गंगा नदी में हो रहे कटाव ने रेलवे प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कटाव रोकने और रेल परिचालन को सुरक्षित रखने के लिए मंगलवार से युद्धस्तर पर काम जारी है।
करीब 300 मजदूर दिन-रात शिफ्ट में काम कर रहे हैं। कटाव और रेलवे लाइन के बीच महज 10 मीटर की दूरी बची है। कटाव के कारण मंगलवार को ट्रेनों का आवागम रोक दिया गया था। बुधवार को दूसरे दिन भी परिचालन ठप रहा।
वर्ष 2013 में भी इसी स्थान पर गंगा में कटाव हुआ था। इसके बाद रेलवे प्रशासन की ओर से कटावरोधी कार्य कराया गया था। इस बार दोबारा कटाव शुरू होने से पूर्व में लगाए गए बोल्डर के नीचे की मिट्टी बह गई। इससे नेट के साथ बोल्डर अचानक धंस गया। हालांकि, पूरब दिशा में कटावरोधी कार्य का एक छोर अभी बचा हुआ है।
कटाव करीब 300 मीटर लंबाई में हो रहा है, लेकिन 160 मीटर हिस्से में स्थिति गंभीर बताई जा रही है। कटाव रोकने के लिए रेलवे प्रशासन ने करीब 300 मजदूरों को लगाया है। मजदूर पानी में बोल्डर डालने और उसे जाल में समेटकर नदी में बैठाने का काम कर रहे हैं। रेल वैगन से भी बोल्डर गिराया जा रहा है।
रेलवे प्रशासन के अनुसार कटावरोधी कार्य में करीब 150 वैगन बोल्डर की जरूरत पड़ने का अनुमान है। अब तक करीब 100 वैगन बोल्डर पहुंचाया जा चुका है। 50 से 60 वैगन बोल्डर और मंगाए जाने की उम्मीद है।
कटावरोधी कार्य के विशेषज्ञ मजदूरों को अररिया और किशनगंज से बुलाया गया है। ये मजदूर तार की जाली तैयार करते हैं, जिसमें बोल्डर डालकर उसे नदी में बैठाया जाता है। जाली बनाने के लिए कोलकाता से तार मंगाया जा रहा है।
जिला प्रशासन भी मदद को आगे आया
पूर्व मध्य रेलवे के मालदा डिविजन के एडीआरएम अमरेंद्र कुमार मौर्य मंगलवार की रात से ही घटनास्थल पर कैंप कर रहे हैं। जीएम भी फोन के माध्यम से पल-पल की जानकारी ले रही हैं। जिला प्रशासन ने भी रेलवे को सहयोग देना शुरू कर दिया है।
सदर सीओ बासुकीनाथ टुडू ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। रेलवे प्रशासन की ओर से रात में काम करने में सुविधा के लिए गोताखोर और जेटी की मांग की गई थी। इसके बाद सीओ ने छह गोताखोरों की ड्यूटी घटनास्थल पर लगाई है। जेटी की भी व्यवस्था की जाएगी।
रेलवे की ओर से घटनास्थल पर मेडिकल टीम तैनात की गई है। टीम में एक चिकित्सक, नर्स और ड्रेसर के साथ जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। रात में काम करने के लिए पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी की गई है। मजदूरों से शिफ्ट में काम कराया जा रहा है।
उधर, गंगा पंप नहर के कार्यपालक अभियंता प्रेम सोरेन ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि विभाग रेलवे को सहयोग करने के लिए आया है। विभाग की ओर से जैसा निर्देश मिलेगा, उसके अनुसार काम किया जाएगा।
उत्तर दिशा में चर निकलने से बदली गंगा की धारा
मालदा डिवीजन के एडीआरएम अमरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि वर्ष 2013 में भी इसी स्थान पर गंगा में कटाव हुआ था। कहा जाता है कि करीब एक दशक के अंतराल पर गंगा की धारा अपना स्थान बदलती है। इस बार नदी के उत्तर दिशा में चर निकल आया है और दक्षिण दिशा में गंगा की धारा रेलवे ट्रैक के ठीक पास से बह रही है।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर इस मार्ग पर लोकल ट्रेन का परिचालन रोक दिया गया है। कटाव रोकने के बाद भी बीच-बीच में नदी की धारा कटावरोधी संरचना से टकरा रही है। पूर्व में कराए गए कटावरोधी कार्य के नीचे से जमीन कट जाने के कारण बोल्डर धंस गया है।
पानी घटने के बाद वास्तविक स्थिति का पूरी तरह पता चल सकेगा। फिलहाल कटावरोधी कार्य युद्धस्तर पर जारी है। रेलवे ट्रैक फिलहाल दुरुस्त है, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर कुछ ट्रेनों के परिचालन को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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