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रिम्स में दोहरा रवैया! डीके सिन्हा को रिटायरमेंट के अगले दिन मिला प्रभार, दो वरिष्ठ डॉक्टरों की नियुक्ति अटकी

Published: Wed, 04 Nov 2026 08:00 AM (IST)

रिम्स में सेवानिवृत्त डॉक्टरों की अनुबंध पर नियुक्ति को लेकर दोहरा रवैया सामने आया है। शासी परिषद के निर्णय के ...और पढ़ें

रिम्स में सेवानिवृत्त डॉक्टरों की नियुक्ति पर दोहरा रवैया।

रिम्स में सेवानिवृत्त डॉक्टरों की नियुक्ति पर दोहरा रवैया।

HighLights

  1. रिम्स में सेवानिवृत्त डॉक्टरों की नियुक्ति पर दोहरा रवैया।

  2. अनुभवी चिकित्सकों को अनुबंध पर रखने का फैसला अटका।

अनुज तिवारी, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में सेवानिवृत्त चिकित्सकों की सेवाएं लेने को लेकर दोहरा रवैया सामने आ रहा है। संस्थान में अब तक किसी भी सेवानिवृत्त डॉक्टर को सेवा विस्तार या अनुबंध पर रखने का लाभ नहीं मिल सका है।

वहीं, पूर्व निदेशक डॉ. डीके सिन्हा को सेवानिवृत्ति के अगले ही दिन दोबारा निदेशक पद का प्रभार सौंप दिया गया। दूसरी ओर, मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दो अनुभवी और वरिष्ठ चिकित्सकों को अनुबंध पर रखने का शासी परिषद का फैसला अब तक लागू नहीं हो पाया है।

रिम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सीबी सहाय (अक्टूबर 2023 में सेवानिवृत्त) और मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. विद्यापति (अगस्त 2024 में सेवानिवृत) को अनुबंध पर संस्थान से जोड़ने की तैयारी की गई थी। इस संबंध में पूर्व में हुए रिम्स शासी परिषद की बैठक में अध्यक्ष ने निर्णय भी लिया गया था।

बैठक में यह तर्क दिया गया था कि दोनों चिकित्सकों का लंबा अनुभव और विभाग में उनका योगदान मरीजों के उपचार की गुणवत्ता बढ़ाने में उपयोगी होगा। इनके अनुभव का लाभ संस्थान और मरीजों को मिल सकेगा। इसके बावजूद अब तक दोनों चिकित्सकों को रिम्स में अनुबंध पर रखने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

नियमावली का हवाला देकर अटका मामला

इस फैसले को लागू करने में तकनीकी अड़चन की बात सामने आई थी। बताया गया था कि सेवानिवृत्त चिकित्सकों को इस तरह अनुबंध पर रखने के लिए संस्थान के पास स्पष्ट नियमावली नहीं है। इसी वजह से नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

नतीजा यह है कि शासी परिषद के स्तर पर लिया गया निर्णय अब तक अमल में नहीं आ पाया है। सरकार की ओर से भी इन वरिष्ठ चिकित्सकों को संस्थान से जोड़ने की बात कही गई थी, लेकिन मामला नियमों और प्रक्रिया के बीच अटका रह गया।

डीके सिन्हा को मिला दोबारा प्रभार

इस मामले के विपरित डॉ. डीके सिन्हा का उदाहरण भी चर्चा में है। उन्हें सेवानिवृत्ति के अगले दिन ही फिर से रिम्स निदेशक पद का प्रभार सौंप दिया गया था। हालांकि, निदेशक का प्रभार सौंपना और किसी चिकित्सक को नियमित सेवा विस्तार या अनुबंध पर नियुक्त करना अलग-अलग प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं।

इसके बावजूद सवाल यह उठ रहा है कि जब संस्थान के प्रशासनिक संचालन के लिए सेवानिवृत्ति के बाद किसी अधिकारी को जिम्मेदारी दी जा सकती है, तो मरीजों के हित में अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं लेने के प्रस्ताव पर अब तक रास्ता क्यों नहीं निकल सका।

अनुभव का लाभ मरीजों को मिलने की थी उम्मीद

रिम्स में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और मरीजों के दबाव को देखते हुए वरिष्ठ चिकित्सकों की सेवाएं लेने का फैसला महत्वपूर्ण माना गया था।

खासकर न्यूरोसर्जरी और मेडिसिन जैसे विभागों में अनुभवी चिकित्सकों की मौजूदगी से मरीजों को परामर्श और उपचार में लाभ मिलने की उम्मीद थी। लेकिन नियमावली की कमी के कारण यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी। अब सवाल है कि शासी परिषद के फैसले को लागू करने के लिए नियमों में जरूरी बदलाव या स्पष्ट व्यवस्था कब तक बनाई जाएगी, या खुद विभाग अपने स्तर से नियुक्ति कर सकता है। 

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