रांची विश्वविद्यालय में अजीबोगरीब स्थिति, एक महीने के अंतर पर PG के दो सत्रों में नामांकन; छात्र एक साल पीछे
रांची विश्वविद्यालय में एक ही वर्ष में पीजी के दो सत्रों 2025-27 और 2026-28 का नामांकन लिया गया है, जिससे ...और पढ़ें

रांची विश्वविद्यालय की फाइल फोटो।
HighLights
रांची विवि में एक साल में दो पीजी सत्रों का नामांकन।
2025-27 सत्र पहले ही एक साल की देरी से चल रहा।
जागरण संवाददाता, रांची। रांची विश्वविद्यालय में पीजी का एक सत्र 2025-27 के नामांकन के बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी अभी पूरी नहीं हुई कि फिर से अगले सत्र का नामांकन शुरू हो गया। केवल तीन कोर्स के लिए नए सत्र में नामांकन शुरू कर दिया गया है। जिससे एक ही वर्ष में पीजी के दूसरे बैच का नामांकन लिया गया है।
ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है कि एक वर्ष में पीजी के दो बैच का नामांकन एक साथ लिया गया है। इन दोनों के नामांकन में एक महीने का भी अंतर नहीं है।
विश्वविद्यालय के पीजी के दो सत्र के नामांकन में एक महीने का अंतर
रांची विश्वविद्यालय के पीजी के दो सत्र में नामांकन का अंतर केवल एक महीने का ही है। पीजी के 2025-27 सत्र में नामांकन के लिए आवेदन की प्रक्रिया 8 अगस्त 2026 तक चली थी। इस दौरान आवेदन आए थे। इसके बाद सितंबर तक नामांकन की प्रक्रिया चली और 650 से अधिक विद्यार्थियों ने नामांकन भी लिया।
वहीं इसके बाद रांची विवि ने तीन नए कोर्स की शुरुआत की। इसमें एमए इन एजुकेशन, एमएससी इन डेटा साइंस व स्टैटिक्स शामिल हैं। इसमें 2026-28 सत्र के अनुसार नामांकन लिया गया। एमए इन एजुकेशन में कक्षाएं भी शुरू हो गयी। जबकि डेटा साइंस साइंस और स्टैटिक्स में अभी तक एक आवेदन नहीं आए हैं।
पीजी का वर्तमान सत्र हो गया है एक साल लेट
वहीं दूसरी ओर पीजी का वर्तमान सत्र 2025-27 एक साल पीछे हो गया है। इस सत्र में विद्यार्थियों ने 2026 में नामांकन लिया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों का एक साल नामांकन के साथ ही समाप्त हो गया है। इनके पास पीजी की पढ़ाई करने के लिए केवल एक साल ही नियम के अनुसार बचा हुआ है।
सत्र लेट होने से क्या होगा विद्यार्थियों को नुकसान
पीएचडी में दाखिला लेने और यूजीसी नेट की परीक्षा की तैयारी करने में परेशानी होगी। इससे आगे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। रिजल्ट में देरी के कारण अभ्यर्थियों को पीजीटी शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन करने में भी परेशानी होगी।
सत्र लेट होने से घट गयी है विद्यार्थियों की संख्या
2024-26 सत्र में जहां विद्यार्थियों की संख्या 2000 से अधिक थी, वहीं वर्तमान में जिस सत्र में नामांकन हुआ है उसमें विद्यार्थियों की संख्या 650 तक हो गयी है। यही नहीं 2025-27 के पीजी सत्र के विद्यार्थी नामांकन के साथ ही एक साल पीछे चले गए हैं।
हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रयास है कि पीजी का सत्र समय पर किया जाए। इसके लिए तैयारी भी चल रही है। कुलपति डॉ. सरोज शर्मा के निर्देश पर सभी पदाधिकारी इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।
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