विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'पापा, सबके घर पटाखे आए, आप कब लाओगे?' 25 महीने से वेतन नहीं मिलने पर अंधेरे में मनेगी आशीष की दिवाली

Published: Sat, 07 Nov 2026 11:02 AM (GMT+05:30)

रांची विश्वविद्यालय के 96 अतिथि शिक्षकों को 25 महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके घर का खर्च चलाना ...और पढ़ें

बेटी की पटाखों की ख्वाहिश भी पूरी नहीं कर पा रहे शिक्षक आशीष।

बेटी की पटाखों की ख्वाहिश भी पूरी नहीं कर पा रहे शिक्षक आशीष।

HighLights

  1. रांची विश्वविद्यालय के 96 अतिथि शिक्षक 25 महीने से मानदेय का इंतजार कर रहे।

  2. बेटी की पटाखों की ख्वाहिश भी पूरी नहीं कर पा रहे शिक्षक।

  3. त्योहार पर राशन से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक के लिए उधार का सहारा।

जागरण संवाददाता, रांची। शाम होते ही घर के आंगन में छोटी सी अशावी दौड़कर आती है। पापा की गोद में चढ़कर पूछती है - पापा, पटाखे कब लाओगे, सबके पापा लाए हैं, आप कब लाओगे। केओ कालेज, गुमला के अतिथि शिक्षक आशीष के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। वे मुस्कुरा कर कहते हैं, बेटा, कल लाएंगे। पर यह ''''कल'''' कब आएगा, उन्हें खुद नहीं पता। क्योंकि पिछले 25 महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है।

दिवाली बीत गई, दिलासा रह गया

धनतेरस पर बाजार सजा था। लोग सोना, बर्तन, कपड़े, मिठाई, पटाखे खरीद रहे थे। आशीष बाजार गए तो जरूर, पर खाली हाथ लौट आए। बेटी के लिए एक छोटा सा पैकेट भी नहीं खरीद पाए। घर लौटकर जब अशावी ने फिर पूछा, तो आशीष ने मुंह फेर लिया। आंखों में आंसू थे, पर बेटी के सामने रो नहीं सकते थे। पिता हैं टूटकर भी टूटना नहीं दिखा सकते।

आशीष कहते हैं, मैं रोज क्लास में बच्चों को पढ़ाता हूं कि मेहनत का फल मीठा होता है। पर घर आकर अपनी बेटी से नजर नहीं मिला पाता। उसे क्या बताऊं कि उसके पापा की मेहनत का 25 महीने से कोई मोल नहीं लगा।आशीष के पास अब दिलासे भी खत्म हो रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं बेटी का भरोसा न टूट जाए।

एक दूसरे शिक्षक सूरज के घर भी यही अंधेरा

यही कहानी अतिथि शिक्षक सूरज की है। दिवाली की रात जब सबके घर दीये जले, सूरज के घर में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया। राशन उधार पर आ रहा है। दुकानदार अब उधार देने से भी कतराता है। बच्चों की कापी-किताब के लिए भी सोचना पड़ता है।

सूरज कहते हैं, हमने किसी से भीख नहीं मांगी। हमने पढ़ाया है, मेहनत की है। बस अपनी मेहनत का हक मांग रहे हैं। अपनी बेटी संशिका औ पत्नी से आंख तक नहीं मिला पाता हूं। उनकी जरूरतें हैं लेकिन उनको पूरा करने में मैं असमर्थ हूं।

जो भविष्य संवार रहे हैं, उनका वर्तमान उधार पर है

रांची विश्वविद्यालय के ये अतिथि शिक्षक सालों से कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं। परीक्षा, कॉपी जांच, एडमिशन, सब काम इन्हीं के भरोसे चलता है। पर जब वेतन की बारी आती है, तो फाइलों में अटक जाता है। ये कहानी रांची विवि के कुल 96 अतिथि शिक्षकों का है जो मानदेय का इंतजार कर रहे हैं। 

यह भी पढ़ें- जमशेदपुर के 16 महीने के नन्हें ऋत्विक का 'बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में नाम दर्ज, बिना सहारे चढ़ीं 30 सीढ़ियां

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।