ट्रेन के आखिरी डिब्बे के पीछे क्यों जलती है लाल बत्ती? रेलवे बोर्ड के एक नए आदेश ने खोला इसका बड़ा राज
रेलवे बोर्ड ने मालगाड़ियों के सुरक्षित परिचालन के लिए सभी जोनल रेलवे को टेल लैंप उपलब्ध कराने का निर्देश दिया ...और पढ़ें

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HighLights
रेलवे बोर्ड ने मालगाड़ियों के सुरक्षित परिचालन हेतु महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
यह व्यवस्था 2 सितंबर की सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद लागू हुई।
जागरण संवाददाता, रांची। मालगाड़ियों के सुरक्षित परिचालन को लेकर रेलवे बोर्ड ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को मालगाड़ियों में टेल लैंप उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। खासकर ट्रेन मैनेजर/वर्किंग ट्रेन मैनेजर के साथ या उनके बिना तथा ब्रेक वैन के बिना चलने वाली मालगाड़ियों के संदर्भ में यह व्यवस्था लागू करने को कहा गया है।
रेलवे बोर्ड ने कहा है कि सभी जोनल रेलवे टेल लैंप उपलब्ध कराएं। साथ ही लोको पायलट (एलपी) और असिस्टेंट लोको पायलट (एएलपी) लाबी से टेल लैंप टेकओवर करेंगे और ड्यूटी पूरी होने के बाद उसी लाबी में उसे हैंडओवर करेंगे। बोर्ड ने इस व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।
यह निर्णय रेलवे बोर्ड की ओर से 2 सितंबर को हुई सुरक्षा समीक्षा बैठक में इस विषय पर किए गए अवलोकन के बाद लिया गया। बोर्ड ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मालगाड़ियों में टेल लैंप की उपलब्धता और उसके जिम्मेदाराना इस्तेमाल की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
टेल लैंप ट्रेन के पूर्ण होने का संकेत है यह लाल बत्ती यह सुनिश्चित करती है कि पूरी ट्रेन बिना किसी डिब्बे के छूटे सुरक्षित रूप से गुजर रही है। यदि रास्ते में कोई डिब्बा या बोगी कटकर अलग हो जाए, तो पीछे आ रहे स्टेशन मास्टर या कर्मचारियों को तुरंत पता चल जाता है।
रात के समय या कोहरे में इसकी लाल रोशनी दूर से ही दिखाई देती है (विजिबिलिटी लगभग 1400 मीटर तक होती है)। इससे पीछे आ रही ट्रेन के लोको पायलट (ड्राइवर) को यह संकेत मिल जाता है कि आगे ट्रेन खड़ी है, जिससे वह समय रहते अपनी गाड़ी रोक लेते हैं।
