रांची हाई कोर्ट ने दारोगा प्रोन्नति मामले में फैसला सुरक्षित रखा, सहायक प्राध्यापकों को राहत
झारखंड हाई कोर्ट ने दारोगा से इंस्पेक्टर प्रोन्नति मामले में पुलिस विभाग की वरीयता सूची को चुनौती देने वाली याचिका ...और पढ़ें

विभाग की ओर से बनी वरीय सूची को दी गई है चुनौती।
HighLights
दारोगा से इंस्पेक्टर प्रोन्नति मामले में फैसला सुरक्षित।
पुलिस विभाग की वरीयता सूची को हाई कोर्ट में चुनौती।
सहायक प्राध्यापकों को सेवा से हटाने पर कोर्ट की रोक।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में दारोगा से इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति मामले में पुलिस विभाग के वरीयता सूची को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई। दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने पक्ष रखा।
प्रार्थी उत्तम तिवारी एवं अन्य की सीधी नियुक्ति वर्ष 2018 में दारोगा पद पर सीधी नियुक्ति से हुई। पुलिस विभाग की ओर से नौ सितंबर 2024 को जो वरीयता सूची बनाई गई थी उसमें सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से सिपाही से दारोगा बने लोगों को वरीयता सूची में ऊपर रखा गया था। प्रार्थी का कहना था कि वह सीधी नियुक्ति से आए हैं, इसलिए वरीयता सूची में उन्हें ऊपर रखा जाना चाहिए।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व में 12 मई 2026 को कोर्ट ने नौ सितंबर 2024 के वरीयता सूची के आधार पर प्रोन्नति पर रोक लगा दी थी। मामले में सरकार की ओर से हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर मामले में पूर्व में लगी रोक को हटाने का आग्रह किया गया था।
नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर को सेवा से हटाने पर लगी रोक
झारखंड हाई कोर्ट में मंगलवार को झारखंड असिस्टेंट प्रोफेसर कान्ट्रैक्चुअल एसोसिएशन की ओर से आवश्यकता आधारित सहायक प्राध्यापकों के नियमितीकरण की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने निर्देश दिया कि वर्तमान में जिस पद पर याचिकाकर्ता शिक्षक कार्यरत हैं, उस पद से उन्हें अदालत की अनुमति के बिना सेवा से हटाया नहीं जाए।
उनके पारिश्रमिक का भुगतान किया जाए। पहले इन्हें घंटी आधारित शिक्षक माना जाता था, लेकिन अब इन्हें आवश्यकता आधारित प्राध्यापक और व्याख्याता माना जाता है। बता दें कि 10 जून को हाई कोर्ट ने एक वाद की सुनवाई करते हुए वर्षों से राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर को नियमितीकरण के लिए याचिका दायर करने का निर्देश दिया था।
इसके आलोक में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत 174 नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर ने याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने यह अंतरिम व्यवस्था प्रदान की है।
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