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2500 नियुक्तियां रद करने के आदेश पर रोक बरकरार, 48 घटें में जवाब दाखिल करे झारखंड सरकार

Published: Tue, 15 Sep 2026 07:40 PM (IST)

JPSC-JSSC Scam: झारखंड हाई कोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी समेत अन्य नियुक्तियां रद करने के मामले में सरकार को ...और पढ़ें

कोर्ट ने कहा- मामला गंभीर है, नहीं दे सकते हैं इतना लंबा समय।

कोर्ट ने कहा- मामला गंभीर है, नहीं दे सकते हैं इतना लंबा समय।

HighLights

  1. सरकार को चार सप्ताह का समय देने से कोर्ट का इनकार।

  2. अदालत ने सरकार को 48 घंटे में जवाब दाखिल करने को कहा।

  3. नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर रोक अभी भी बरकरार।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल, सीडीपीओ और एफएसओ की नियुक्ति रद्द करने के सरकार के आदेश के खिलाफ दाखिल कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगे जाने पर कड़ी नाराजगी जताई।
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है, जिसमें करीब 2500 लोगों की नियुक्ति रद कर दी गई है।

ऐसे में अदालत सरकार को जांच रिपोर्ट या शपथ पत्र दाखिल करने के लिए हफ्तों में नहीं, बल्कि घंटों में समय देगी। इसलिए अब इस मामले में सरकार 48 घंटे के भीतर अपना जवाब दाखिल करे। कोर्ट इस मामले की सुनवाई आगामी 18 सितंबर को 'पहले केस' के रूप में करेगी। इस दौरान अदालत ने नियुक्तियां रद करने के सरकार के आदेश पर लगाई गई रोक को बरकरार रखा है।

सरकार की ओर से रखा गया पक्ष

इससे पहले राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता राजीव रंजन (या रोहित रंजन/रोहितश्य राय) ने पक्ष रखा। उनकी ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में सीआईडी की जांच अभी चल रही है और सरकार इस जांच से पूरी तरह संतुष्ट होना चाहती है।

इसके बाद ही मामले में शपथ पत्र और जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाएगी, इसलिए इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया जाए। लेकिन अदालत ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि पूर्व की सुनवाई में महाधिवक्ता के अनुरोध पर ही 7 सितंबर तक जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने और मामले की सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की गई थी।

कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले की शुरुआत में सरकार बहुत तेजी में थी, लेकिन अब ढिलाई बरत रही है। अदालत ने जोर देकर कहा कि उसे राज्य की पुलिस पर पूरा भरोसा है, लेकिन वर्तमान में इस मामले की जांच प्रक्रिया काफी धीमी हो गई है। गौरतलब है कि सरकार ने एक आदेश जारी कर जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल, सीडीपीओ और एफएसओ की नियुक्तियां रद्द कर दी थीं।

प्रार्थियों की ओर से समय बढ़ाए जाने का कड़ा विरोध

सुनवाई के दौरान जब सरकार की ओर से चार सप्ताह का समय मांगा गया, तो अदालत ने प्रार्थियों से इस पर उनकी आपत्ति पूछी। इस पर प्रार्थियों की ओर से इतना लंबा समय दिए जाने का कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।

प्रार्थियों की ओर से पक्ष रख रहे वरीय अधिवक्ताओं—राजीव रंजन, इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स—ने कहा कि पूर्व में कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि सरकार को 7 सितंबर तक जवाब दाखिल करना है और उसके एक सप्ताह बाद सुनवाई निर्धारित की गई है, परंतु सरकार ने तय समय पर जवाब दाखिल नहीं किया।

इस पर अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार 18 सितंबर तक अनिवार्य रूप से अपना जवाब दाखिल करे, अन्यथा कोर्ट आगे की कड़ी कार्रवाई और सुनवाई जारी रखेगी, क्योंकि सरकार इस मामले में निर्धारित समयावधि का पालन नहीं कर रही है।

अदालत ने नाराजगी जताते हुए यह भी कहा कि, "एक तो तुगलकी फरमान के जरिए कई लोगों की नौकरियां रद्द कर दी गईं और अब सरकार की ओर से समय की मांग की जा रही है।"

कोर्ट ने याद दिलाया कि नौकरी रद्द किए जाने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के कई ऐसे आदेश हैं जिनमें दो सप्ताह से अधिक का समय दिए जाने की बात नहीं कही गई है, इसलिए अदालत सरकार को इससे ज्यादा समय नहीं दे सकती है।

सीआईडी जांच की सीलबंद रिपोर्ट हुई दाखिल

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सीआईडी की अब तक की जांच रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में अदालत में पेश की गई। अदालत ने रिपोर्ट का अवलोकन किया और इसे पुनः सीलबंद करके सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस रिपोर्ट को फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।