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25 वर्षों में इस तरह बदली रांची एयरपोर्ट की तस्वीर, अब अंतरराष्ट्रीय उड़ान की तैयारी

Published: Tue, 03 Nov 2026 07:32 PM (IST)

रांची एयरपोर्ट ने पिछले 25 वर्षों में सीमित सुविधाओं से आधुनिक विमानन केंद्र तक का सफर तय किया है। अब ...और पढ़ें

अब 3700 मीटर रनवे, दो हजार यात्रियों की क्षमता वाले प्रस्थान क्षेत्र और आइसोलेशन बे की तैयारी।

अब 3700 मीटर रनवे, दो हजार यात्रियों की क्षमता वाले प्रस्थान क्षेत्र और आइसोलेशन बे की तैयारी।

HighLights

  1. रांची एयरपोर्ट का 25 वर्षों में हुआ अभूतपूर्व विकास।

  2. प्रतिदिन 7000 से अधिक यात्रियों की आवाजाही।

  3. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और रनवे विस्तार की तैयारी।

अमित सिंह, रांची। झारखंड गठन के 25 वर्षों में राजधानी का बिरसा मुंडा एयरपोर्ट विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा है। वर्ष 2000 में सीमित विमान सेवाओं, छोटे टर्मिनल भवन और बुनियादी सुविधाओं के सहारे संचालित होने वाला एयरपोर्ट आज राज्य के हवाई संपर्क का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। कभी विमान पकड़ने के लिए यात्रियों को गिने-चुने विकल्प मिलते थे।

आज दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे सहित देश के कई प्रमुख शहरों से रांची का हवाई संपर्क है। प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है। आधुनिक टर्मिनल, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर, नेविगेशन उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था ने एयरपोर्ट की तस्वीर बदल दी है।

अब अगले 25 वर्षों में अंतरराष्ट्रीय उड़ान, रनवे विस्तार और यात्री क्षमता बढ़ाने की योजनाओं से रांची को पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण विमानन केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं हैं।

वर्ष 2000 में सीमित उड़ानें, आज प्रतिदिन हजारों यात्री

राज्य गठन के समय रांची एयरपोर्ट से मुख्य रूप से बड़े महानगरों के लिए सीमित विमान सेवाएं उपलब्ध थीं। टर्मिनल छोटा था और यात्रियों के बैठने, सुरक्षा जांच तथा सामान प्रबंधन की व्यवस्था भी सीमित थी।

उस समय प्रतिदिन विमानों और यात्रियों की संख्या वर्तमान के मुकाबले काफी कम थी। हालांकि वर्ष 2000 के दैनिक विमान परिचालन और यात्री संख्या का प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण सटीक तुलना के लिए एएआई के पुराने आंकड़ों की आवश्यकता है।

वर्ष 2026 में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। एयरपोर्ट पर सामान्य दिनों में लगभग 40 से 50 विमान आगमन-प्रस्थान दर्ज किए जाते हैं। अक्टूबर के उपलब्ध परिचालन आंकड़ों में एक दिन में 46 आगमन और 48 प्रस्थान सहित कुल 94 विमान मूवमेंट दर्ज हुए। उस दिन 7102 यात्रियों की आवाजाही हुई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 27 लाख यात्रियों ने रांची एयरपोर्ट से यात्रा की। यह औसतन करीब 7400 यात्री प्रतिदिन है।

जमीन अधिग्रहण से टर्मिनल और एटीसी तक बदली तस्वीर

पिछले ढाई दशक में एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण और आधारभूत संरचना के विकास की पहल हुई। पुराने टर्मिनल की जगह आधुनिक एकीकृत टर्मिनल भवन का निर्माण किया गया। वर्ष 2013 में नया टर्मिनल शुरू होने से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलीं। इसके बाद नए एटीसी टावर और तकनीकी सुविधाओं का विकास हुआ।

यात्रियों के लिए आधुनिक सुरक्षा जांच व्यवस्था, बैगेज हैंडलिंग, एयरोब्रिज, प्रतीक्षालय, खानपान और पार्किंग जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया। विमान परिचालन को सुरक्षित बनाने के लिए इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम, नेविगेशन उपकरण और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं का नियमित उन्नयन भी किया गया।

अब 3700 मीटर रनवे और दो हजार यात्रियों का प्रस्थान क्षेत्र

रांची एयरपोर्ट के विकास का अगला चरण और महत्वाकांक्षी है। भविष्य की योजनाओं में रनवे को लगभग 3700 मीटर तक विस्तारित करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके लिए अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता होगी। रनवे विस्तार से बड़े विमानों के परिचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी।

इसके साथ लगभग दो हजार यात्रियों की क्षमता वाला प्रस्थान क्षेत्र विकसित करने, नए टर्मिनल भवन और अन्य यात्री सुविधाओं के विस्तार की परिकल्पना है। एयरपोर्ट पर आइसोलेशन बे बनाने की दिशा में भी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। अक्टूबर 2026 में इसके नक्शे को स्वीकृति मिली थी। यह विमानन सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण सुविधा होगी।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तैयार हो रहा आधार

रांची एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा शुरू करने की संभावनाओं पर भी काम हुआ है। एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिचालन से जुड़ी कस्टम और इमिग्रेशन व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जा चुका है। हालांकि नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू होने के लिए विमानन कंपनियों की पहल, आवश्यक स्वीकृतियां और परिचालन व्यवस्था जरूरी होंगी।

भविष्य में दुबई, बैंकाक और अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से संपर्क की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। फिलहाल इन मार्गों पर उड़ान शुरू होने की कोई पुष्ट समयसीमा नहीं है।

हैंगर से निकलकर अपने भवन तक पहुंचा नागर विमानन विभाग

राज्य गठन के समय झारखंड का नागर विमानन विभाग सीमित संसाधनों के साथ एक हैंगर से संचालित होता था। अब विभाग का अपना कार्यालय भवन है। विमानन प्रशिक्षण के लिए फ्लाइंग इंस्टीट्यूट की व्यवस्था भी विकसित की गई है। इससे राज्य के युवाओं के लिए विमानन क्षेत्र में प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावनाएं बनी हैं।

नए शहरों से जुड़ने पर बढ़ेगी रांची की उड़ान

रांची से वर्तमान में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों के लिए विमान सेवाएं उपलब्ध हैं। भविष्य में अहमदाबाद, जयपुर, चेन्नई और अन्य शहरों से सीधी उड़ान की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। हालांकि नए मार्गों का निर्धारण विमानन कंपनियों की मांग और व्यावसायिक आकलन पर निर्भर करेगा।

अगले 25 वर्षों में रांची एयरपोर्ट पर बड़े विमानों का परिचालन, आधुनिक यात्री टर्मिनल, विस्तारित रनवे और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सुविधा विकसित होने की उम्मीद है। राज्य के अन्य एयरपोर्ट से क्षेत्रीय उड़ानें शुरू होने पर रांची झारखंड के हवाई नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

झारखंड के 25 वर्षों की विमानन यात्रा बताती है कि रांची एयरपोर्ट ने सीमित सुविधाओं वाले हवाई अड्डे से आधुनिक विमानन केंद्र तक का सफर तय किया है। अब अगली चुनौती इसे देश के अधिक शहरों और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से जोड़ने की है।

रांची एयरपोर्ट के 25 वर्षों का सफर

पैमाना / विशेषता वर्ष 2000 वर्ष 2026 (वर्तमान)
विमान सेवाएं (उड़ानें) सीमित नियमित विमान सेवाएं प्रतिदिन लगभग 40-50 निर्धारित उड़ानें (आगमन और प्रस्थान मिलाकर)
टर्मिनल भवन छोटा टर्मिनल भवन आधुनिक एकीकृत टर्मिनल
यात्री सुविधाएं सीमित यात्री सुविधाएं एयरोब्रिज, आधुनिक सुरक्षा जांच और उन्नत प्रतीक्षालय
एटीसी (ATC) व्यवस्था पुरानी एटीसी व्यवस्था नया एटीसी टावर
विमान पार्किंग सीमित विमान पार्किंग विस्तारित एप्रन और आधुनिक पार्किंग व्यवस्था
कनेक्टिविटी मुख्य रूप से घरेलू संपर्क अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की तैयारी
विस्तार योजनाएं भविष्य की विस्तार योजनाएं प्रारंभिक अवस्था में रनवे, टर्मिनल और सुरक्षा सुविधाओं के विस्तार के ठोस प्रस्ताव एवं कार्य

एक से तीन एयरपोर्ट तक पहुंची विमान सेवा, अब नए शहरों की बारी

झारखंड गठन के समय वर्ष 2000 में रांची से ही नियमित यात्री विमान सेवा उपलब्ध थी। उस समय भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के दो एयरपोर्ट रांची और चाकुलिया थे। वर्ष 2026 तक रांची, देवघर और जमशेदपुर सहित तीन एयरपोर्ट से व्यावसायिक उड़ानें शुरू हो चुकी थीं।

हालांकि जमशेदपुर की सेवा बंद होने से वर्तमान में रांची और देवघर से ही नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं। प्रदेश में 13 एयरपोर्ट और हवाई पट्टियां वर्ष 2019 में दर्ज थीं। आने वाले वर्षों में बोकारो और दुमका से विमान सेवा शुरू होने की उम्मीद है। हजारीबाग, डालटनगंज, धालभूमगढ़ और चाईबासा में भी हवाई सुविधाओं के विकास की योजनाएं हैं।

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