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रांची आने वाले यात्रियों को बड़ी राहत: अब कोहरे के कारण बार-बार रद नहीं होंगी उड़ानें, ILS जांच पूरी

Published: Sun, 01 Nov 2026 01:41 AM (IST)

बिरसा मुंडा एयरपोर्ट, रांची पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) का सफल कैलिब्रेशन किया गया है।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की फ्लाइट इंस्पेक्शन यूनिट ने रांची एयरपोर्ट पर की जांच। (जागरण)

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की फ्लाइट इंस्पेक्शन यूनिट ने रांची एयरपोर्ट पर की जांच। (जागरण)

HighLights

  1. बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर आइएलएस जांच सफलतापूर्वक पूरी।

  2. घने कोहरे में भी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग संभव।

  3. यात्रियों की सुरक्षा और उड़ानों की विश्वसनीयता बढ़ी।

जागरण संवाददाता, रांची। आसमान में घना कोहरा हो और रनवे दिखाई नहीं दे रहा हो, तब भी विमान के पायलट को सुरक्षित लैंडिंग के लिए सही दिशा और ऊंचाई की जानकारी मिलती रहेगी।

इसके लिए बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर लगे अत्याधुनिक नेविगेशन उपकरणों की विशेष जांच की गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) की फ्लाइट इंस्पेक्शन यूनिट ने रांची एयरपोर्ट की कम्युनिकेशन, नेविगेशन एंड सर्विलांस (सीएनएस) टीम के सहयोग से इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) की फ्लाइट कैलिब्रेशन जांच सफलतापूर्वक पूरी कर ली है।

विशेष विमान से एयरपोर्ट के आसपास कई निर्धारित मार्गों पर उड़ान भरकर उपकरणों से मिलने वाले संकेतों की सटीकता परखी गई।

इस दौरान आईएलएस के लोकलाइजर, ग्लाइड पाथ और प्रिसिजन अप्रोच पाथ इंडिकेटर (पीएपीआई) की जांच की गई। विशेष विमान के उड़ान मार्ग का रिकॉर्ड भी तैयार किया गया।

जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि लैंडिंग के दौरान पायलटों को मिलने वाले तकनीकी संकेत निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों।

कोहरे में रनवे नहीं दिखे, तब भी दिशा बताएगा ILS

रांची एयरपोर्ट पर सर्दियों में सुबह के समय कोहरा विमान परिचालन के लिए बड़ी चुनौती बनता है। दृश्यता कम होने से विमानों की लैंडिंग प्रभावित होती है।

कई बार विमान विलंब से पहुंचते हैं या उन्हें दूसरे एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में आईएलएस पायलटों के लिए महत्वपूर्ण सहायक तकनीक है।

इसका लोकलाइजर विमान को रनवे की मध्य रेखा के अनुरूप सही दिशा बताता है, जबकि ग्लाइड पाथ उतरने के दौरान निर्धारित कोण और ऊंचाई बनाए रखने में मदद करता है। इससे पायलट को रनवे तक पहुंचने के लिए सटीक तकनीकी मार्गदर्शन मिलता है।

विशेष विमान से क्यों जरूरी है जांच

इस संबंध में रांची एयरपोर्ट के पूर्व निदेशक एवी कृष्ण ने बताया कि एयरपोर्ट पर लगे नेविगेशन उपकरण लगातार रेडियो संकेत प्रसारित करते हैं।

इन संकेतों की सटीकता जांचने के लिए विशेष उपकरणों से लैस विमान का इस्तेमाल किया जाता है। यह विमान निर्धारित ऊंचाई और दिशा में उड़ान भरकर संकेतों की गुणवत्ता की जांच करता है।

यदि संकेतों में किसी प्रकार की त्रुटि मिलती है, तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक तकनीकी कार्रवाई की जाती है। नियमित कैलिब्रेशन से उपकरणों की विश्वसनीयता और विमान परिचालन की सुरक्षा बनी रहती है।

यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा

आईएलएस की सफल जांच का सबसे महत्वपूर्ण लाभ विमान यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है। कम दृश्यता के दौरान पायलटों को विश्वसनीय तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से सुरक्षित लैंडिंग में सहायता मिलेगी।

इससे नेविगेशन उपकरणों में संभावित खराबी के कारण परिचालन प्रभावित होने का जोखिम कम करने में भी मदद मिलेगी। हालांकि, घने कोहरे में विमान की लैंडिंग के लिए न्यूनतम दृश्यता, विमान की तकनीकी क्षमता और पायलट की निर्धारित योग्यता जैसी शर्तों का पूरा होना जरूरी है।

PAPI की लाइटें बताती हैं विमान की सही स्थिति 

रनवे के किनारे लगी पीएपीआई लाइटें भी सुरक्षित लैंडिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनसे निकलने वाली लाल और सफेद रोशनी के संयोजन से पायलट को पता चलता है कि विमान निर्धारित उतरने के रास्ते से ऊपर है, नीचे है या सही स्थिति में है। विशेष टीम ने इन उपकरणों की भी जांच पूरी की है।

सर्दियों में बढ़ जाती है तकनीक की अहमियत

रांची में नवंबर से फरवरी के बीच सुबह के समय कोहरा विमान परिचालन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में नेविगेशन उपकरणों का सटीक और विश्वसनीय होना बेहद जरूरी है। कैलिब्रेशन जांच पूरी होने से एयरपोर्ट की मौजूदा लैंडिंग सहायता प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में मदद मिली है।

I की जांच से जुड़े पांच महत्वपूर्ण फायदे

1. विमान को रनवे की सही दिशा में आने के लिए सटीक संकेत मिलेंगे।
2. लैंडिंग के दौरान विमान की ऊंचाई और उतरने के कोण का मार्गदर्शन मिलेगा।
3. कम दृश्यता में सुरक्षित लैंडिंग की प्रक्रिया को तकनीकी सहायता मिलेगी।
4. नेविगेशन उपकरणों की संभावित त्रुटियों का समय रहते पता चल सकेगा।
5. भविष्य में सुरक्षित और विश्वसनीय विमान परिचालन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

20 से ज्यादा उड़ान रद

कम दृश्यता की वजह से गत एक माह में 20 से ज्यादा उडान को रद करना पड़ा। कोलकाता रांची कोलकाता के बीच एटीआर विमान की सेवा बहाल है।

मौसम खराब होने पर, कम दृश्यता की वजह से अक्सर एटीआर विमान के रद होने की सूचना मिलती है। मगर अब आईएलएस के सहयोग से विमान का लैंडिंग कम दृश्यता में भी संभव हो सकेगा।

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