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कभी गड्ढों में अटकता था रामगढ़ का सफर, अब गांवों से हाईवे तक कनेक्टिविटी की नई तैयारी

Published: Mon, 02 Nov 2026 08:56 AM (IST)

झारखंड के गठन के 25 वर्षों में रामगढ़ जिले में सड़क नेटवर्क में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसमें एनएच-20 और ...और पढ़ें

रामगढ़ में 25 वर्षों में सड़क नेटवर्क का अभूतपूर्व विकास हुआ।

रामगढ़ में 25 वर्षों में सड़क नेटवर्क का अभूतपूर्व विकास हुआ।

HighLights

  1. रामगढ़ में 25 वर्षों में सड़क नेटवर्क का अभूतपूर्व विकास हुआ।

  2. एनएच-20 और एनएच-23 का फोरलेन में उन्नयन, यात्रा समय घटा।

संवाद सहयोगी, रामगढ़। 15 नवंबर 2000 को झारखंड के गठन के समय रामगढ़ हजारीबाग जिले का हिस्सा था। तब गांवों से शहर तक धूल भरी, गड्ढों वाली कच्ची-पक्की सड़कें थीं और रांची-पटना का एनएच-33 जर्जर दो लेन मार्ग था। 12 सितंबर 2007 को रामगढ़ जिला बना और इसके बाद सड़क नेटवर्क में बदलाव शुरू हुआ।

पिछले 25 वर्षों में जिले की लाइफलाइन एनएच-20 (पुराना एनएच-33) और एनएच-23 रहे हैं। वर्ष 2015 में 73.8 किमी हजारीबाग-रांची फोरलेन का निर्माण सड़क विकास का अहम पड़ाव बना। इसमें रामगढ़ और कुजू बाईपास शामिल थे। इससे रांची से रामगढ़ का सफर दो घंटे से घटकर एक घंटे रह गया।

रांची-पटना मार्ग पर पटेल चौक जैसे ब्लैक स्पाट पर 24.14 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन का अंडरपास बनाया गया है, ताकि हादसों पर अंकुश लगे। कोरिया घाटी, कुजू से पटेल चौक तक पुराने एनएच-33 के 14 किमी दो लेन मार्ग को 277 करोड़ रुपये से फोरलेन हाईवे में बदला जा रहा है।

वहीं, पटेल चौक से सांडी तक 13 किमी सड़क को करीब 274 करोड़ रुपये से फोरलेन करने का प्रस्ताव है। वर्ष 2000 में रामगढ़ के 40 प्रतिशत से ज्यादा गांव बरसात में कट जाते थे। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से पतरातू, मांडू, दुलमी, गोला और चितरपुर के दूरस्थ टोले बारहमासी सड़कों से जुड़े। नयामोड़-चितरपुर-सांडी-रजरप्पा रोड जैसी सड़कें खनन क्षेत्रों और तीर्थस्थलों को जोड़ रही हैं।

भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत ओरमांझी (रांची) से गोला होते हुए जैनामोड़ (बोकारो) तक 60 किमी फोरलेन एक्सप्रेसवे 2,224 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। इसमें हाथियों के लिए पांच अंडरपास-फ्लाईओवर शामिल हैं। इससे रामगढ़ को कोयला क्षेत्र और राजधानी से सीधा जुड़ाव मिलेगा।

स्मार्ट कनेक्टिविटी पर केंद्रित है सड़क निर्माण

अगले 25 वर्षों की योजना सड़क निर्माण के साथ स्मार्ट कनेक्टिविटी पर केंद्रित है। केंद्र ने 2024 में पीएमजीएसवाई-4 को मंजूरी दी गई है। इसके तहत जनगणना 2011 के आधार पर 100 से अधिक आबादी वाले एनडब्लूई प्रभावित टोलों को भी जोड़ा जाएगा। रामगढ़ के नक्सल प्रभावित बड़का गांव और गिद्दी के टोले भी इसमें शामिल होंगे।

एनएच-20 और एनएच-23 को छह लेन, एक्सेस कंट्रोल और लाजिस्टिक हब के रूप में विकसित करने की योजना है। रामगढ़ शहर में थाना चौक, नेहरू रोड और छावनी क्षेत्र की सड़कों का चौड़ीकरण तथा नो-पार्किंग जोन बनाकर जाम मुक्त शहर का लक्ष्य है। भविष्य में गांवों की सड़कें नेशनल हाईवे, रेलवे स्टेशन और मंडी से जोड़ी जाएंगी।

ड्रोन सर्वे, ग्रीन रोड टेक्नोलॉजी और महिला स्वयं सहायता समूहों के जरिए सड़क रखरखाव कर ‘गांव से हाईवे तक 30 मिनट’ का मॉडल विकसित करने की योजना है। 

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