Exclusive Interview: झारखंड में 30 नवंबर को जारी होगी एसआइआर की अंतिम मतदाता सूची, अब नहीं बढ़ेगी समयसीमा
झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया।

एसआइआर के तहत केवल उन्हीं लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जो मृत हो चुके हैं, एक से अधिक स्थानों पर मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं।
HighLights
केवल मृत, दोहरी प्रविष्टि वाले और विदेशी नाम हटाए जा रहे।
18 वर्ष पूर्ण कर चुके नागरिक फॉर्म-6 भरकर आवेदन करें।
नीरज अम्बष्ठ, रांची। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर उठ रहे सवालों और राजनीतिक दलों के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट की है।
उन्होंने कहा कि एसआइआर के तहत केवल उन्हीं लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जो मृत हो चुके हैं, एक से अधिक स्थानों पर मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए हैं या विदेशी नागरिक हैं।
किसी भी पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं कटेगा। उन्होंने कहा कि एसआइआर को लेकर गलत आरोप लगाए जाने से बूथ लेवल आफिसर्स (बीएलओ) सहित उन अधिकारियों और कर्मचारियों को पीड़ा होती है, जो पूरी निष्ठा और मेहनत से इस काम में जुटे हैं।
एसआइआर की प्रक्रिया इस बार निर्धारित समय पर पूरी होगी और अब इसकी अवधि बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
उन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके उन सभी नागरिकों से फार्म-6 भरने की अपील की, जिन्होंने अभी तक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन नहीं किया है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि एसआइआर के बाद तैयार होने वाली मतदाता सूची एक स्थायी दस्तावेज के रूप में मान्य होगी।
इसमें किसी भी अपात्र नागरिक का नाम शामिल नहीं रहने दिया जाएगा। दैनिक जागरण से बातचीत में उन्होंने एसआइआर की प्रगति, मतदाताओं की संख्या में संभावित बदलाव, घुसपैठियों के नाम और राजनीतिक दलों के आरोपों सहित विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश :
प्रश्न : एसआइआर की प्रक्रिया वर्तमान में किस स्थिति में है? क्या आप अब तक की प्रगति से संतुष्ट हैं? क्या इस बार सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समय पर पूरी हो जाएंगी?
उत्तर : प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद अभी दावा-आपत्ति का चरण चल रहा है। आवश्यक दस्तावेजों को लेकर नोटिस जारी करने, सत्यापन करने तथा दावों और आपत्तियों के निष्पादन की प्रक्रिया जारी है। इसे 23 नवंबर तक पूरा किया जाना है।
एसआइआर की प्रक्रिया का पहले दो बार अवधि विस्तार हो चुका है। इस बार सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समय पर पूरी हो जाएंगी।
तार्किक विसंगतियों से जुड़े मामलों में 60.19 प्रतिशत का निष्पादन हो चुका है। आदर्श मामलों में 96 प्रतिशत काम पूरा हो गया है।
नो मैपिंग से संबंधित नोटिस के 39.14 प्रतिशत मामलों का भी निष्पादन किया जा चुका है। 30 नवंबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन निर्धारित है। मुझे पूरी उम्मीद है कि इसी तिथि को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।
प्रश्न : क्या एसआइआर के बाद झारखंड में भी मतदाताओं की संख्या घटेगी, जैसा कि उन राज्यों में हुआ है, जहां यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है?
उत्तर : निश्चित रूप से मतदाता सूची शुद्ध होगी तो अपात्र मतदाताओं के नाम हटेंगे। जिन राज्यों में एसआइआर हुआ है, वहां मतदाताओं की संख्या में कमी आई है। इसका एक सकारात्मक परिणाम यह भी होगा कि मतदान प्रतिशत के आंकड़ों में सुधार देखने को मिलेगा।
एसआइआर के बाद कई राज्यों में मतदान प्रतिशत में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021 के पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले बंगाल में इस बार मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या में 34.23 लाख की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं, असम में 2021 के मुकाबले 53.68 लाख अधिक मतदाताओं ने मतदान में हिस्सा लिया। तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली है।
झारखंड में भी मतदान प्रतिशत कम रहने की समस्या रही है। उम्मीद है कि एसआइआर के बाद इसमें काफी सुधार होगा।
प्रश्न : एसआइआर को लेकर झारखंड में भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि राज्य के कई मूलवासी मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं और इसके पीछे एक साजिश है।
उत्तर : ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम नियमित रूप से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रहे हैं और उनसे इस प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील कर रहे हैं।
इन बैठकों में किसी भी राजनीतिक दल ने ऐसे 10 लोगों की सूची नहीं दी है, जो पात्र मतदाता हैं, लेकिन उनका नाम मतदाता सूची से काट दिया गया है या काटा जा रहा है। कोई भी राजनीतिक दल ऐसे 10 लोगों को सामने लाकर दिखा दे, जिनका नाम पात्र होने के बावजूद मतदाता सूची से हटा दिया गया हो।
प्रश्न : फिर इस तरह के आरोप क्यों लग रहे हैं? मतदाताओं को कैसे भरोसा दिलाया जा सकता है कि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची से नहीं हटेगा?
उत्तर : मतदाताओं के सत्यापन का काम बूथ लेवल आफिसर्स (बीएलओ) कर रहे हैं। वे पूरी लगन से दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
जब एसआइआर में त्रुटि या गड़बड़ी के आरोप लगाए जाते हैं तो उन्हें काफी दुख होता है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान कई महिला बीएलओ ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त की है।
मतदाताओं के नाम को अंतिम रूप से सत्यापित करने का अधिकार निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) के पास है। वे पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
मैं या यहां तक कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी यदि गलत तरीके से किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल करना चाहें या हटाना चाहें तो ऐसा संभव नहीं है। पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है।
प्रश्न : झारखंड में खासकर संताल परगना के जिलों में घुसपैठियों के मतदाता बनने के मामले सामने आए हैं। क्या आपके पास ऐसा कोई आंकड़ा है, जिससे पता चले कि कितने विदेशी नागरिक गलत तरीके से मतदाता सूची में शामिल हुए थे?
उत्तर : जांच के दौरान जहां भी ऐसे मामले सामने आए हैं, वहां जिला निर्वाचन पदाधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई की है। मेरे क्षेत्र भ्रमण के दौरान भी ऐसे मामले मिले, जिनमें कार्रवाई की गई।
जमशेदपुर में मतदाता सूची में तीन अफगानी नागरिकों के नाम शामिल होने का मामला सामने आया था। उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई।
साहिबगंज और पाकुड़ में भी बांग्लादेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने के मामले सामने आए, जिनमें कार्रवाई हुई है।
गलत वंशावली तैयार कर मतदाता सूची में गड़बड़ी करने के मामले भी सामने आए हैं। संताल परगना में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो बीएलओ के सत्यापन के दौरान अपने पते पर अनुपस्थित पाए गए।
ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। हालांकि, अनुपस्थित पाए गए लोगों में कितने विदेशी नागरिक थे, इसका अलग से कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
प्रश्न : नए मतदाताओं के लिए क्या संदेश है?
उत्तर : जिन नागरिकों ने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है और अभी तक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज नहीं कराया है, वे फार्म-6 भरकर आवेदन करें। पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल होना जरूरी है।
एसआइआर के बाद तैयार होने वाली मतदाता सूची को स्थायी दस्तावेज के रूप में मान्यता मिलेगी। हमारा प्रयास है कि इसमें किसी अपात्र व्यक्ति का नाम न रहे और कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न हो।