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हजारीबाग ओपन जेल के लिए 32 एकड़ जमीन चिन्हित, हाईकोर्ट में सरकार ने दी जानकारी

By Amit SinghEdited By: Nishant Bharti
Published: Thu, 30 Jul 2026 08:18 AM (IST)

झारखंड सरकार ने हजारीबाग में 32 एकड़ भूमि पर खुले जेल के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिसकी जानकारी हाईकोर्ट को दी गई।

झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट

HighLights

  1. हजारीबाग में 32 एकड़ भूमि खुले जेल हेतु चिन्हित।

  2. महिला बंदियों के लिए अलग परिसर होगा निर्मित।

  3. हाईकोर्ट ने मौजूदा जेलों को सुधारात्मक केंद्र बनाने को कहा।

जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड सरकार ने राज्य में खुले जेल (ओपन प्रिजन) के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हजारीबाग में 32 एकड़ भूमि चिन्हित कर ली है। बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट को यह जानकारी देते हुए सरकार ने बताया कि इस परियोजना का प्रस्ताव गृह विभाग को भेज दिया गया है। प्रस्तावित खुले जेल में महिला बंदियों के लिए भी अलग परिसर विकसित किया जाएगा।

यह जानकारी मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनाक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ के समक्ष दी गई। अदालत में राज्य की जेलों और बंदियों की स्थिति से जुड़ी जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई चल रही थी। 

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि खुले जेल के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और इसके लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है।

मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को

खंडपीठ ने कहा कि जब तक हजारीबाग में खुले जेल का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक राज्य सरकार रांची, हजारीबाग, दुमका और जमशेदपुर की जेलों में उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग सुधारात्मक केंद्र के रूप में करे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर निर्धारित की है।

बंदियों के पुनर्वास और सुधार की प्रक्रिया को मिलेगी मजबूती 

गौरतलब है कि खुले जेल पारंपरिक जेलों की तुलना में न्यूनतम सुरक्षा व्यवस्था वाले सुधारात्मक केंद्र होते हैं। यहां अच्छे आचरण वाले बंदियों को अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्र वातावरण में रखा जाता है। ऐसे केंद्रों का उद्देश्य बंदियों में आत्मअनुशासन, जिम्मेदारी और समाज में पुनर्वास की भावना विकसित करना होता है। कई राज्यों में खुले जेलों में बंदियों को रोजगार से जुड़ने और परिवार के साथ रहने जैसी सीमित सुविधाएं भी दी जाती हैं।

राज्य सरकार की पहल को झारखंड में जेल सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि परियोजना समय पर पूरी होती है, तो इससे जेलों पर बढ़ते दबाव को कम करने के साथ-साथ बंदियों के पुनर्वास और सुधार की प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी।

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