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हजारीबाग में कोयला खनन क्षेत्र में ब्लास्ट मामला, प्रदूषण से हो रही आदम बिरहोरों की मौत पर NHRC ने जारी किया नोटिस

Published: Fri, 09 Oct 2026 05:19 PM (IST)

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हजारीबाग के केरेडारी में एनटीपीसी के कोयला खनन से आदिम बिरहोर जनजाति के अस्तित्व पर संकट ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हजारीबाग डीसी, एनटीपीसी सीएमडी को नोटिस दिया।

  2. केरेडारी में कोयला खनन से आदिम बिरहोर जनजाति पर संकट।

  3. बिरहोरों के पुनर्वास, मौतों पर दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी।

राज्य ब्यूरो, रांची। हजारीबाग के केरेडारी में नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (एनटीपीसी) के कोयला खदान में ब्लास्ट से हो रही आदिम बिरहोर जनजाति के अस्तित्व पर संकट मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हजारीबाग के डीसी व एनटीपीसी से मुख्य महाप्रबंधक (सीएमडी) को नोटिस जारी किया है।

आयोग ने दोनों ही अधिकारियों से दो समाप्त के भीतर रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट एक नवंबर तक आयोग को भेजा जाना है। अधिकारियों से इस समस्या के समाधान, बिरहोर समुदाय के पुनर्वास को लेकर उठाए गए कदम की जानकारी मांगी गई है।

आयोग ने पूछा है कि बिरहोर परिवारों के पुनर्वास व सुरक्षा के लिए क्या कोई सौहार्दपूर्ण व स्थाई समाधान निकाला गया है कि नहीं। आयोग ने इससे पूर्व 11 मार्च 2025 को भी नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी थी और कहा था कि जब तक समस्या का समाधान नहीं हो जाता, पीड़ित बिरहोर परिवार के पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक खनन कार्य बंद करें।

इसके बावजूद 18 महीने बाद भी समस्या का समाधान नहीं निकलने और खनन कार्य जारी रहने पर आयोग ने आपत्ति जताई है। जब रिपोर्ट मांगी गई थी, उस वक्त दो मौतों से संबंधित थी, अब मौतों की संख्या आठ हो चुकी है, जिसका जिक्र जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में की है। हालांकि, उस रिपोर्ट में किसी भी शव का पोस्टमार्टम नहीं होने से मौत के कारण स्पष्ट नहीं होने की बात कही गई है।

आयोग में वर्ष 2024 में की गई थी शिकायत, एसडीएम हजारीबाग ने की थी जांच

हजारीबाग के ही बड़कागांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता शनिकांत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वर्ष 2024 में शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि केरेडारी थाना क्षेत्र में एनटीपीसी के माध्यम से किए जा रहे अनियंत्रित खनन व उससे फैल रहे प्रदूषण के कारण आदिम बिरहोर जनजाति के अस्तित्व पर संकट हो गया है। खनन के दुष्प्रभाव से दो लोगों की जान जा चुकी है।

स्थानीय पुलिस व प्रशासन ने खनन कंपनी के विरुद्ध उचित कार्रवाई के बजाय लिपापोती की है। इस शिकायत पर आयोग के निर्देश के बाद हजारीबाग के सदर एसडीएम के नेतृत्व में गठित संयुक्त जांच समिति ने जमीनी हकीकत की जांच की थी।

जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे कि परियोजना की शुरुआत चट्टी बरियातू कोल माइनिंग प्रोजेक्ट 25 अप्रैल 2022 से शुरू हुआ था। जर्जर मकान और ब्लास्टिंग का असर पगार गांव के बिरहोर टोला पर पड़ा, जहां 33 घर हैं। खदान के बिल्कुल नजदीक स्थित चार मकान पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। भारी ब्लास्टिंग से ग्रामीणों के घरों को गंभीर क्षति पहुंच रही है।

जांच में जो तथ्य आए थे सामने

-खदान से उड़ने वाले भारी धूलकणों के कारण बिरहोर समुदाय के लोग लगातार बुखार, खांसी और श्वसन तंत्र के गंभीर संक्रमण से जूझ रहे हैं।

-खनन कार्य शुरू होने के बाद दुर्गा बिरहोर और किरण कुमारी नामक दो लोगों की मौत की पुष्टि रिपोर्ट में की गई थी, उसके बाद जिला प्रशासन की अन्य रिपोर्ट में 8 मौत की पुष्टि हुई है।

-संयुक्त समिति ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की थी कि जब तक बिरहोरों का सुरक्षित पुनर्वास नहीं हो जाता, तब तक इस क्षेत्र में खनन गतिविधियां जारी रखना कतई उचित नहीं है।

इन आठ लोगों की हो चुकी है मौत

नाम उम्र मृत्यु की तिथि
बिराज बिरहोर 70 वर्ष 13 मार्च 2024
किरनी कुमारी 12 वर्ष 28 फरवरी 2024
आकेश बिरहोर 10 वर्ष 11 जुलाई 2024
दुर्गा बिरहोर 46 वर्ष 10 अप्रैल 2024
गीता देवी 39 वर्ष 19 अप्रैल 2025
ननकी देवी 47 वर्ष 25 अक्टूबर 2025
रूप कुमारी 14 वर्ष 23 अप्रैल 2025
नवजात दो माह 13 नवंबर 2025

hazaribagh blast

नोट : सभी मृतक हजारीबाग के केरेडारी प्रखंड के चट्टी बारियातू पंचायत के बिरहोर टोला के पगार गांव के निवासी हैं। 

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