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नामकुम अंचल में जमीन के दस्तावेज गायब होने का मामला, तत्कालीन CO समेत तीन अधिकारियों पर ACB ने दर्ज की प्राथमिकी

Published: Fri, 28 Aug 2026 07:00 PM (IST)

नामकुम अंचल कार्यालय से जमीन के खरीद-बिक्री और राजस्व दस्तावेजों के गायब होने के मामले में एसीबी ने तत्कालीन सीओ ...और पढ़ें

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो। जागरण

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. एसीबी ने नामकुम के तत्कालीन सीओ समेत तीन पर प्राथमिकी दर्ज की।

  2. हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई, अवमानना याचिका समाप्त।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में नामकुम अंचल कार्यालय से जमीन के खरीद-बिक्री और राजस्व दस्तावेजों के गायब होने के मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान एसीबी ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में एसीबी ने नामकुम अंचल की तत्कालीन अंचल अधिकारी सहित नामकुम अंचल के तीन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। जिनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, उसमें तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा, सीआई मनोज कुमार और कार्यालय लिपिक दीपक कुमार का नाम शामिल है।

अदालत ने एसीबी का पक्ष जानने के बाद अवमानना याचिका को समाप्त कर दिया। दस्तावेज नहीं मिलने पर प्रार्थी की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता जेजे सांगा ने पक्ष रखा। पिछली सुनवाई में अदालत ने नामकुम अंचल की जमीन की खरीद-बिक्री और राजस्व दस्तावेजों के गायब मामले में एसीबी को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।

मामले में नामकुम अंचल के दोषी अधिकारियों के संबंध में सीलबंद रिपोर्ट मांगी थी। यह मामला जमीन के गायब दस्तावेज और कथित अवैध म्यूटेशन से संबंधित है।

प्रार्थी थामस साइमन ने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि नामकुम अंचल कार्यालय में एक दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के प्रकरण में भारी गड़बड़ी की गई है और जांच के लिए मांगे जाने पर भी मूल राजस्व अभिलेख (मूल रिकॉर्ड) उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।

विवादित भूमि नामकुम अंचल के डुंडु क्षेत्र में स्थित है। पूर्व की सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात आई थी कि अंचल कार्यालय ने दूसरे पक्षकार के पक्ष में किए गए म्यूटेशन की प्रमाणित प्रति देने में लगातार टालमटोल कर रहा था।

इस संबंध में हाई कोर्ट की ओर से पूर्व में प्रार्थी के पक्ष में स्पष्ट आदेश दिए जाने के बाद अंचल अधिकारियों ने उसका अनुपालन नहीं किया था। हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया सरकारी रिकार्ड गायब होने को अत्यंत गंभीर माना था। इसके बाद अदालत ने पूरे प्रकरण की जांच का जिम्मा जांच एसीबी को सौंपा है।

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