रांची के मैक्लुस्कीगंज में जमीन का खेल या कागजों का पेच?नोटिस के बाद अब राजस्व रिकॉर्ड की जांच की बारी
मैक्लुस्कीगंज में भूमि विवादों को लेकर नोटिस जारी होने और दस्तावेज जमा होने के बाद अब प्रशासन की जांच पर ...और पढ़ें

भूमि विवादों में चारदीवारी निर्माण रोकने के निर्देश दिए गए। जागरण
जागरण संवाददाता, मैक्लुस्कीगंज (रांची)। मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे भूमि विवादों के बीच अब प्रशासनिक कार्रवाई का अगला चरण महत्वपूर्ण हो गया है। कहीं विवादित जमीन पर चारदीवारी निर्माण रोकने का निर्देश दिया गया है, तो कहीं संबंधित पक्षों को जमीन के दस्तावेज के साथ अंचल कार्यालय में उपस्थित होने का नोटिस जारी किया गया है।
नोटिस पाने वाले संबंधित पक्षों ने अपने कागजात अंचल कार्यालय में जमा कर दिए हैं। अब इन दस्तावेजों की जांच और राजस्व अभिलेखों से उनके मिलान की बारी है। लपरा में चारदीवारी निर्माण से जुड़े मामले में अंचल प्रशासन ने निर्माण रोकने का निर्देश दिया था।
वहीं, लपरा की अन्य विवादित जमीनों को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया सामने आई है। अब देखना यह है कि जमा किए गए दस्तावेजों की जांच के बाद जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रशासन कौन-से कदम उठाता है।
इसी बीच हेसालौंग बूट फार्म की 132.68 एकड़ विवादित भूमि में पेड़ कटाई की शिकायत भी जांच का विषय बनी हुई है। वन विभाग की रिपोर्ट में यूकेलिप्टस के पातन एवं परिवहन से संबंधित प्रावधान का उल्लेख किया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि जिन पेड़ों की कटाई की शिकायत है, वे किस प्लॉट पर थे, जमीन की राजस्व प्रकृति क्या थी और कटाई के समय पेड़ों पर वैध अधिकार किसका था।
पंजी-2 और जमाबंदी के सत्यापन पर नजर
इन भूमि विवादों में अब पंजी-2, जमाबंदी, खाता-खेसरा और अन्य राजस्व अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी। जरूरत पड़ने पर उपलब्ध एनआईसी अथवा ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड से भी सत्यापन कराया जा सकता है। इसके साथ स्थल निरीक्षण और विधिवत सीमांकन से कागजात में दर्ज विवरण तथा जमीन की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सकेगा।
नोटिस से आगे बढ़ेगी कार्रवाई?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासनिक प्रक्रिया नोटिस जारी करने और कागजात जमा कराने तक सीमित रहती है या जांच के बाद ठोस कदम भी उठाए जाते हैं। चारदीवारी निर्माण, विवादित भूमि के सीमांकन और पेड़ कटाई की शिकायतों में तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई जरूरी है।
संबंधित पक्षों के कागजात जमा होने के बाद अब निगाह अंचल प्रशासन की जांच पर है। दस्तावेजों का सत्यापन, स्थल निरीक्षण और जरूरत के अनुसार सीमांकन कर प्रशासन जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या मामला कागजी प्रक्रिया तक सिमट जाता है—यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी।
