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64 साल की माया देवी बनीं आंदोलनकारी छात्रों की 'मां', आरा से रांची पहुंचकर अपने हाथों से पिला रहीं कॉफी

By Anuj TiwaryEdited By: Mansi Kumari
Published: Fri, 07 Aug 2026 03:18 PM (IST)

बिहार के आरा की 64 वर्षीय माया देवी ने रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलनरत छात्रों को ...और पढ़ें

आरा की 64 वर्षीय माया देवी रांची पहुंचीं। जागरण

आरा की 64 वर्षीय माया देवी रांची पहुंचीं। जागरण

अनुज तिवारी, रांची। कहते जब एक बच्चा अपने आप को इस दुनिया में सबसे अकेला महसूस कर रहा होता है, तब उसके साथ कोई हो या न हो उसकी मां जरूर होती है। अगर मां साथ हो तो वो बच्चा हर लड़ाई का सामना कर सकता है। ऐसा ही एक दृश्य रांची में चल रहे आंदोलन के दौरान देखने को मिला है

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार जनसमर्थन जुटा रहा है। शुक्रवार को इस आंदोलन में एक ऐसा भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी का दिल छू लिया।

बिहार के आरा की रहने वाली 64 वर्षीय माया देवी सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर रांची पहुंचीं। उनके हाथों में कोई राजनीतिक झंडा नहीं था, बल्कि कॉफी के फ्लास्क और कप थे। वह आंदोलनकारी छात्रों के बीच जाकर अपने हाथों से उन्हें कॉफी पिलाती रहीं और उनका हौसला बढ़ाती रहीं।

माया देवी ने कहा कि जब उन्होंने टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के संघर्ष के बारे में देखा तो मन बेचैन हो गया। उन्हें लगा कि ये बच्चे अपने भविष्य और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। वह खुद भले ही आंदोलन में बैठकर अनशन नहीं कर सकतीं, लेकिन उनकी सेवा जरूर कर सकती हैं। इसी भावना के साथ वह आरा से रांची पहुंचीं।

उन्होंने कहा कि इन बच्चों को देखकर अपने बेटे-बेटियों की याद आ गई। कई छात्र कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। उनकी तकलीफ देखकर लगा कि मां होने के नाते मेरा भी कुछ फर्ज बनता है। इसलिए मैं इनके लिए कॉफी लेकर आई हूं, ताकि इन्हें थोड़ी ऊर्जा मिल सके।

माया देवी ने बताया कि उनके इस फैसले में परिवार ने भी पूरा साथ दिया। घरवालों ने उन्हें रोकने के बजाय कहा कि यदि किसी नेक काम के लिए जा रही हैं तो जरूर जाएं। इसी हौसले के साथ वह रांची पहुंचीं।

उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। यदि प्रतियोगी परीक्षाओं में कहीं भी भ्रष्टाचार या गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय मिलना ही चाहिए।

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में मौजूद छात्रों ने भी माया देवी के इस स्नेह को अपने लिए बड़ी ताकत बताया। छात्रों का कहना था कि जब दूर-दराज के राज्यों से भी लोग उनके समर्थन में पहुंच रहे हैं तो यह साबित करता है कि उनकी लड़ाई सिर्फ कुछ छात्रों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता बन चुकी है। माया देवी जब छात्रों को कॉफी बांट रही थीं तो कई छात्र भावुक हो गए और उन्हें अपनी मां की तरह सम्मान दिया।

आंदोलन के बीच माया देवी की मौजूदगी इस बात का संदेश भी देती है कि किसी भी जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत आम लोगों का विश्वास और संवेदना होती है। आरा से रांची तक का उनका सफर केवल दूरी तय करने का नहीं, बल्कि एक मां की ममता, युवाओं के प्रति विश्वास और भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने की भावना का प्रतीक बन गया। 

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