'तू आंदोलन में डटा रह... तेरे खाने की चिंता हमारी', रांची JPSC-JSSC प्रोटेस्ट में दिख रही दोस्ती की ऐसी मिसाल
रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में जेपीएससी-जेएसएससी अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में दोस्ती और एकजुटता की मिसाल ...और पढ़ें

दोस्त आंदोलनकारियों को भोजन-पानी पहुंचाकर दे रहे हैं पूरा साथ।
HighLights
दोस्त आंदोलनकारियों को भोजन-पानी पहुंचाकर दे रहे हैं पूरा साथ।
जेपीएससी-जेएसएससी अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का एकजुट संघर्ष जारी।
जागरण संवाददाता, रांची। जयपाल सिंह स्टेडियम इन दोनों सिर्फ नारों और विरोध की आवाजों से नहीं गूंज रहा, बल्कि यहां दोस्ती, भरोसे और एकजुटता की ऐसी कहानियां भी लिखी जा रही हैं, जो हर किसी को भावुक कर रही है।
जेपीएससी-जेएसएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओँ में अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में जहां कुछ युवा दिन-रात धरने और अनशन पर डटे हैं, वहीं उनके दोस्त बिना किसी शोर-शराबे के उनकी सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं।

सुबह से लेकर देर रात तक आंदोलन स्थल पर एक दृश्य बार-बार नजर आता है। कोई अपने दोस्त के लिए घर से टिफिन लेकर पहुंचता है, कोई पानी की बोतलें थमा देता है, तो कोई फल और जूस लेकर खड़ा दिखाई देता है।
कई ऐसे अभ्यर्थी भी हैं, जो पारिवारिक या अन्य कारणों से धरने पर लगातार मौजूद नहीं रह पा रहे, लेकिन उन्होंने अपने आंदोलनरत दोस्तों से बस एक ही बात कही है- "तू आंदोलन में डटा रह... तेरे खाने-पीने और बाकी जरूरतों की चिंता हमारी है।"

यही भरोसा इन दोनों जयपाल सिंह स्टेडियम की सबसे बड़ी ताकत बन गया है। आंदोलन में शामिल छात्र बताते हैं कि यहां कोई किसी को अकेला महसूस नहीं होने देता। जब कोई साथी थक जाता है, तो दूसरा उसका हौसला बढ़ाता है।
जब किसी को भोजन की जरूरत होती है तो बिना कहे कोई न कोई उसके सामने टिफिन रख देता है। कई पूर्व छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा भी अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, पानी और जरूरी सामान पहुंचाकर इस संघर्ष का हिस्सा बन रहे हैं।

लगातार बारिश और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद आंदोलनकारियों का मनोबल टूटने नहीं दे रहे उनके दोस्त कहते हैं कि यह सिर्फ कुछ छात्रों की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। इसलिए जो धरने पर नहीं बैठ पा रहे हैं, वह भी किसी न किसी रूप में इस आंदोलन को मजबूत करने के लिए जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
धरनास्थल पर मौजूद छात्रों का कहना है कि इस आंदोलन ने उन्हें सिर्फ अपने अधिकारों के लिए लड़ना नहीं सिखाया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि मुश्किल समय में असली दोस्त कौन होता है। यहां हर दिन कोई ना कोई साथी अपने दोस्त से यही कहता सुनाई देता है कि तू पीछे मत हटाना... हम सब तेरे साथ है।
शायद यही वजह है कि जयपाल सिंह स्टेडियम में इन दिनों सिर्फ आंदोलन नहीं चल रहा बल्कि दोस्ती की ऐसी मिसाल भी लिखी जा रही है, जो आने वाले समय में लंबे वक्त तक याद रखी जाएगी।

क्या कहते है आज के युवा?
विनय (हजारीबाग) ने कहा, "हम सभी का सपना एक बेहतर और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया है। अगर मेरे दोस्त धरने पर बैठकर लड़ाई लड़ रहे हैं, तो उनका साथ देना भी मेरी जिम्मेदारी है। मैं रोज उनकी जरूरत का सामान लेकर आता हूं, ताकि उन्हें किसी बात की चिंता न रहे।"
सुमित (चतरा) ने कहा, "यह किसी एक छात्र की लड़ाई नहीं है। आज मेरा दोस्त धरने पर बैठा है, कल जरूरत पड़ी तो मैं भी बैठूंगा। जब तक आंदोलन चलेगा, हम सभी एक-दूसरे का सहारा बनकर रहेंगे।"
राज (रांची) ने कहा, "हमने अपने साथियों से सिर्फ इतना कहा है—तुम आंदोलन में डटे रहो, बाकी जिम्मेदारी हमारी है। कोई भूखा नहीं रहेगा और कोई खुद को अकेला महसूस नहीं करेगा। यही हमारी दोस्ती और एकजुटता की पहचान है।"
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