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JSSC में इतना बड़ा घोटाला, कार्रवाई सिर्फ अभ्यर्थी व कोचिंग संचालकों तक सीमित; आयोग के अधिकारी जांच से बाहर, JPSC में नपे चेयरमैन भी

Published: Mon, 28 Sep 2026 05:28 PM (IST)

जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक मामले में अब तक 36 अभ्यर्थी और एजेंट गिरफ्तार किए गए हैं, लेकिन सीआईडी की एसआईटी ...और पढ़ें

जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक में अब तक गिरफ्तार 36 आरोपितों में सिर्फ अभ्यर्थी व एजेंट।

जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक में अब तक गिरफ्तार 36 आरोपितों में सिर्फ अभ्यर्थी व एजेंट।

HighLights

  1. जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक में 36 अभ्यर्थी व एजेंट गिरफ्तार।

  2. आयोग के अधिकारियों या कर्मियों के विरुद्ध साक्ष्य नहीं मिले।

  3. एजेंसी आईसीएन का संचालक मिथिलेश सिंह अब तक फरार है।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) प्रतियोगिता परीक्षा में कथित पेपर लीक, अनियमितता आदि से जुड़े मामले की जांच कर रही सीआइडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) को अब तक सिर्फ एजेंट व अभ्यर्थियों के विरुद्ध ही साक्ष्य मिल सके हैं।

एसआईटी ने अब तक दोनों चरण की जांच के क्रम में 36 आरोपितों को जेल भेजा है, जिनमें परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आइसीएन के दो कर्मियों के अलावा एजेंट व सफल अभ्यर्थी ही शामिल हैं। एसआइटी को अब तक झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के किसी भी कर्मी या पदाधिकारी के विरुद्ध सबूत नहीं मिले हैं।

उनकी भूमिका की जांच में उनके विरुद्ध अब तक सबूत नहीं मिलने से उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। एसआईटी कई बार जेएसएससी के सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ कर चुकी है। आयोग से जुड़े वरीय पदाधिकारियों तक जांच की आंच नहीं पहुंचने, कार्रवाई नहीं होने के बिंदु पर विपक्ष के विधायकों ने कई बार जांच पर ही सवाल उठाया है और पूरे मामले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग की है।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी कई बार आशंका जता चुके हैं कि जेएसएससी सीजीएल में इतना बड़ा घोटाला हुआ, अनियमितता हुई, लेकिन उसमें आयोग के पदाधिकारियों की भूमिका नहीं थी, यह कैसे संभव है।

यह जांच का विषय है। जेएसएसी सीजीएल की परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आईसीएन के संचालक मिथिलेश सिंह अब तक फरार है। एसआईटी गिरफ्तारी की कोशिश में है। बता दें कि जेपीएसएसी घोटाले में आयोग के चेयरमैन सहित तमाम अफसरों पर कार्रवाई जारी है।

रुपयों के लेन-देन हुए और आयोग के अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी

जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक मामले में अब तक की जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि इस परीक्षा में रुपयों के लेन-देन हुए, पेपर लीक हुआ, सेटिंग हुई, प्रश्न व उत्तर रटवाए गए। इतना सब होता रहा और आयोग को भनक तक नहीं लगी, आयोग के अधिकारियों को जानकारी तक नहीं हुई, यह कैसे संभव था।

एसआईटी इस बिंदु पर भी अपनी छानबीन जारी रखी है। यह सही है कि अब तक आयोग से किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन उन्हें क्लीन चिट भी नहीं मिला है, यह भी सत्य है।

आयोग में लगातार दस्तावेज के सत्यापन के लिए जाती रही एसआईटी

जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में अनियमितता मामले की जांच कर रही एसआईटी आयोग कार्यालय में लगातार जाती रही। वहां से जब्त दस्तावेज व छानबीन में सामने आए तथ्यों के सत्यापन के लिए एसआइटी आयोग जाती रही है। वहां कई बार आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता के सामने उपलब्ध दस्तावेज का सत्यापन कराया जाता रहा है।

ये हैं 20 आरोपित, जिनकी नए सिरे से जांच के क्रम में हुई है गिरफ्तारी

नए सिरे से जांच के क्रम में गिरफ्तार 20 आरोपितों में मास्टरमाइंड सह सफल अभ्यर्थी अभय कुमार तिवारी, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी व अक्षय तिवारी, परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी आइसीएन के दो कर्मी सोमांश प्रकाश व राहुल कुमार, सफल अभ्यर्थी दीपक कुमार, उमेश कुमार राय, विजय कुमार तिवारी, आनंद कुमार सिंह, समीर कुमार, कुंदन कुमार, जमशेदपुर का फूड इंस्पेक्टर संजय कुमार, स्वास्थ्य विभाग का कनीय सचिवालय सहायक अजय कुमार व एक अन्य अभ्यर्थी रामकृष्णा कुमार सिंह शामिल थे।

इनके अलावा एक दलाल पटना का राजन कुमार, एजेंट दिलीप कुमार पासवान, कोडरमा से राजेश प्रसाद यादव व संदीप कुमार तथा देवघर के सुधाकर यादव के अलावा अब छपरा का मनु कुमार सिंह गिरफ्तार हो चुका है। सफल अभ्यर्थियों में कई एजेंट की भूमिका में भी थे, जिन्होंने अपने लिए भी रिश्वत दी और दूसरे अभ्यर्थियों के लिए भी वसूली की।

इनसे पहले 16 आरोपित जेल भेजे गए थे, जिनपर पेपर लीक के नाम पर वसूली का आरोप लगा था, उनमें सर्वाधिक झारखंड पुलिस के जवान थे। इस प्रकार अब तक 36 आरोपित जेल जा चुके हैं। 

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