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JPSC Scam: सऊदी से नौकरी छोड़ लौटा था संजय, ओएमआर हेराफेरी में प्रदीप और सीट बेचने में रमेश का खुलासा

Published: Mon, 14 Sep 2026 11:00 PM (IST)

जेपीएससी मेधा घोटाला मामले में सीआईडी की जांच में गिरफ्तार आरोपियों के इतिहास सामने आए हैं। संजय कुमार ने सऊदी ...और पढ़ें

चतुर्थवर्गीय कर्मचारी से डेटा विशेषज्ञ बन गया था प्रदीप, ओएमआर शीट में की हेराफेरी।

चतुर्थवर्गीय कर्मचारी से डेटा विशेषज्ञ बन गया था प्रदीप, ओएमआर शीट में की हेराफेरी।

HighLights

  1. संजय ने सऊदी अरब की आईटी नौकरी छोड़ घोटाले में प्रवेश किया।

  2. प्रदीप कुमार सिंह ने ओएमआर शीट में हेराफेरी कर डेटा बदला।

  3. रमेश कुमार ने बरियातू व कोकर के अभ्यर्थियों को सीटें बेचीं।

राज्य ब्यूरो, रांची। जेपीएससी मेधा घोटाला मामले की जांच कर रही सीआईडी को जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपितों ने अपना इतिहास बताया है। उक्त केस में गिरफ्तार कई आरोपितों का पुराना कोई आपराधिक इतिहास नहीं मिला है। इस केस में गिरफ्तार संजय कुमार मूल रूप से बिहार के भागलपुर स्थित सुल्तानगंज गंगापुर का रहने वाला है।

उसने सीआईडी को बताया है कि वह वर्ष 2010 में लखनऊ की एक कंसलटेंसी कंपनी में साफ्टवेयर ट्रेनी के रूप में करियर शुरू की थी। वहां दूसरा आरोपित हेमंत वर्मा उसका सीनियर था। वर्ष 2019 में संजय सऊदी अरब की एक कंपनी डीएचए ओबरिया में आईटी की नौकरी किया।

वह अपने सीनियर हेमंत वर्मा के संपर्क में था। वर्ष 2025 में ही हेमंत ने उसे जेपीएससी की परीक्षाओं में मोटी कमाई का लालच दिया था और उसकी बात जेपीएससी मेधा घोटाले के सिंडिकेट के साथी उस्मान से कराई थी।

वह सऊदी से भागलपुर पहुंचा और भागलपुर से उस्मान ने जून 2025 में उसे रांची बुलाया था। इसके बाद वह उस्मान के साथ मिलकर जेपीएससी की परीक्षाओं में अनियमितता के सिंडिकेट में शामिल हो गया।

दूसरा आरोपित प्रदीप कुमार सिंह मूल रूप से लखनऊ के अलीगंज स्थित त्रिवेणीनगर का रहने वाला है। प्रदीप कुमार सिंह वर्ष 2010 में 12वीं पास करने के बाद लखनऊ की एक आईटी कंपनी में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के रूप में काम करने लगा।

वहां उसने कंप्यूटर व स्कैनिंग सीखा। वर्ष 2015 से 2019 के बीच उसने विभिन्न विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं का संचालन कराने वाली कंपनियों से जुड़ा। जून 2025 में टीडीपीएल के निदेशक सतपाल सिंह ने प्रदीप से संपर्क किया था। इसके बाद प्रदीप जेपीएससी की परीक्षाओं से जुड़ा और यहां ओएमआर शीट स्कैनिंग व डेटा के साथ छेड़छाड़ में शामिल हो गया।

गिरफ्तार रमेश कुमार ने बरियातू व कोकर के चार अभ्यर्थियों की कराई थी सेटिंग

तीसरा आरोपित रांची के बरियातू का रहने वाला रमेश कुमार पहले आइटीआइ व निजी संस्थानों में एडमिशन कंस्ल्टेंट के रूप में कार्यरत था। वर्ष 2023 में कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर उसने धरती आबा नर्सिंग कालेज खोला। इसी दरम्यान उसकी मुलाकात लोहरदगा निवासी दलाल बुद्धेश्वर भगत से हुई।

बुद्धेश्वर ने ही रमेश को जेपीएससी में सीट बेचने का आफर दिया और रेट तय किया। बुद्धेश्वर ने उसे बताया था कि सामान्य वर्ग के लिए एक करोड़ रुपये व एसटी अभ्यर्थी के लिए 80 लाख रुपये में सीट बेचना है।

रमेश ने अपने नेटवर्क के बरियातू व कोकर के चार अभ्यर्थियों उमाकांत उरांव, राकी सचिन लकड़ा, मनोज कुमार व रौशन को झांसे में लिया।सौदा तय होने पर रमेश ने प्रारंभिक परीक्षा से पहले रिम्स आडिटोरियम के पास अभ्यर्थियों से उनके मैट्रिक से लेकर स्नातक तक के मूल प्रमाण पत्र को ले लिया।

मुख्य परीक्षा से पहले तय 50 प्रतिशत राशि के रूप में उसने बुद्धेश्वर को 40 लाख रुपये व मूल दस्तावेज सौंपा था। इसके बाद उक्त राशि व दस्तावेज सिंडिकेट के सहयोगी सह मास्टरमाइंड अभय तिवारी के साले सौरभ पांडेय तक पहुंचाया गया था। 

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