जेपीएससी घोटाला: परीक्षा एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर ने रची ऐसी साजिश: पत्नी, भाई और साले को भी दिलाई सरकारी नौकरी
सीआईडी की चार्जशीट में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें परीक्षा एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी को मास्टरमाइंड बताया गया है।

सीआइडी ने चार्जशीट में कोर्ट को बताया कि सिंडिकेट ने सिस्टम को कर लिया था हाइजैक।
HighLights
सीआईडी चार्जशीट में अभय तिवारी मास्टरमाइंड घोषित
स्वयं, पत्नी, भाई, साले को दिलाई अवैध सफलता
टीडीपीएल जैसी एजेंसियों से मिलकर की धांधली
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और ओएमआर शीट में हेराफेरी की जांच कर रही सीआइडी ने अदालत में दाखिल चार्जशीट में आरोपियों का कच्चा-चिट्ठा खोल दिया है।
सीआइडी के अनुसार, परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) का मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड था।
उसने और उसके परिवार के सदस्यों ने पूरी परीक्षा प्रणाली को हाईजैक कर खुद कई बड़ी प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी।
खुद के साथ पत्नी और रिश्तेदारों को भी दिलाई सफलता
चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि मास्टरमाइंड अभय तिवारी ने न केवल खुद कई परीक्षाएं पास कीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों को भी अवैध तरीके से मेरिट लिस्ट में जगह दिलवाई।
अभय तिवारी स्वयं जेएसएससी स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा में अंतिम रूप से चयनित हुआ था, जबकि जेएसएससी सीजीएल में उसे 48वां रैंक मिला था।
इसके अलावा उसने जेपीएससी की खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी (एफएसओ) लिखित परीक्षा पास कर साक्षात्कार में हिस्सा लिया था, सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) प्रारंभिक परीक्षा और एफएओ की प्रारंभिक परीक्षा में भी सफलता हासिल की थी।
यही नहीं, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी ने 14वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा, जेपीएससी की सीडीपीओ प्रारंभिक परीक्षा और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी।
अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और साले सौरभ कुमार ने भी 14वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की थी। अक्षय ने जेएसएससी सीजीएल में भी बाजी मारी थी।
एजेंसियों की साठगांठ से चला सेटिंग का खेल
सीआइडी ने स्पष्ट किया है कि इन आरोपियों की सफलता के पीछे पूरी तरह से 'सेटिंग' का खेल था। टीडीपीएल, वेबेल और आईसीएन जैसी परीक्षा संचालन एजेंसियों ने मिलकर पूरे सिस्टम को हाईजैक कर लिया था और अपने चहेतों को अनुचित लाभ पहुंचाया था।
जांच में यह भी सामने आया है कि जेपीएससी की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, उनके पति विक्रम मेघवाल और टीडीपीएल के संचालक रामबीर सिंह ने एजेंसी के खर्च पर हवाई यात्राएं की थीं।
व्हाट्सएप चैट, एयरलाइंस के दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच से यह बात साबित हुई है कि इन सभी ने 28 मई 2026 को रांची से हैदराबाद की यात्रा एक साथ की थी।
जिसका भुगतान टीडीपीएल के माध्यम से किया गया था। सीआइडी इस मामले में शामिल अन्य चेहरों की संलिप्तता की भी गहराई से जांच कर रही है।
