JPSC का रिजल्ट आने से पहले ही व्हाट्सएप पर साझा हुई थी चयनित अभ्यर्थियों की जानकारी, CID की चार्जशीट में बड़ा खुलासा
सीआईडी ने जेपीएससी मेधा घोटाले में चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें खुलासा हुआ है कि परीक्षा परिणाम प्रकाशन से पहले ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।
HighLights
सीआईडी ने जेपीएससी मेधा घोटाले में चार्जशीट दाखिल की।
परिणाम से पूर्व व्हाट्सएप पर लीक हुई चयनित अभ्यर्थियों की जानकारी।
उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता पर लगे गंभीर अनियमितता के आरोप।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं के कथित अनियमितता, पेपर लीक व ओएमआर शीट में हेराफेरी मामले की जांच कर रही सीआईडी ने रांची स्थित सीआईडी की विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में संवेदनशील जानकारियां दी है। इससे संबंधित सबूत भी कोर्ट में पेश किया है।
सीआईडी ने कोर्ट को बताया है कि 14वीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम प्रकाशन के पहले ही तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारी उस्मान के वाट्सएप चैट पर साझा कर दी थी।
दोनों के वाट्सएप चैट विश्लेषण से यह खुलासा हुआ है कि दोनों के बीच परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां एक-दूसरे से साझा की गई थी, जो बेहद गोपनीय थी। इतना ही नहीं, दूसरे राज्यों के सफल अभ्यर्थियों सहित कुल 267 चयनित अभ्यर्थियों के डेटा भी व्हाट्सएप पर साझा किए गए थे।
व्हाट्सएप चैट के अनुसार, बाहरी राज्यों के इन चयनित अभ्यर्थियों में बिहार के सर्वाधिक 146, उत्तर प्रदेश के 82 व हरियाणा के 14 अभ्यर्थी शामिल थे। सीआईडी ने कोर्ट केा बताया है कि परीक्षा परिणाम लीक करने वाले इस नेटवर्क के अन्य सहयोगियों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता व उस्मान के बीच व्हाट्सएप चैट में 14वीं जेपीएससी परीक्षा से जुड़े प्रश्न व उत्तर भी साझा हुए थे।
इतना ही नहीं, ओएमआर शीट के पुनर्मूल्यांकन, अभ्यर्थियों के क्रमांक व पास होने वाले अभ्यर्थियों की कोटिवार व श्रेणीवार संख्या भी एक-दूसरे से साझा की गई थी।
निजी सहायक ने बताया, एल. खियांग्ते के पदभार के बाद से ही जेपीएससी में ताक पर रख दिए गए थे नियम कानून
सीआईडी ने चार्जशीट में जेपीएससी के वर्तमान सचिव के निजी सहायक अरुण कुमार के बयान को भी लगाया है।
अरुण कुमार ने सीआईडी को बताया है कि जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के पदभार ग्रहण के बाद से ही नियम-कानून को ताक पर रखकर परीक्षाओं को संचालित किया जा रहा था। इसमें तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता भी बराबर की भागीदार थी और एल. खियांग्ते के हर जुर्म में सहयोगी थी।
जेपीएससी के गोपनीय शाखा के निजी सहायक सोनू कुमार को भी इसकी पूरी जानकारी थी। वह तत्कालीन अध्यक्ष व उप परीक्षा नियंत्रक को पूरा सहयोग कर रहा था।
मोबाइल पर कौन आरोपित किससे कितनी बार बात की, सीडीआर से खुलासा
- उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता व जेपीएससी कर्मी सोनू के बीच 14 अगस्त 2024 से 18 जुलाई 2026 तक कुल 635 बार बातचीत हुई थी। सीआइडी ने प्राथमिकी 20 जुलाई 2026 को दर्ज की थी।
- जेपीएससी कर्मी सोनू व तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक सह सचिव के बीच 10 मई 2025 से नौ जुलाई 2026 के बीच 119 बार बातचीत हुई थी।
- कर्मी सोनू व जेपीएससी की तत्कालीन सदस्य डा. अजिता भट्टाचार्य के निजी सहायक ब्रज कुमार राम के बीच चार सितंबर 2024 से 28 जनवरी 2026 के बीच 83 बार बातचीत हुई थी। ब्रज कुमार राम ने ही परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी बिंसिस को जेपीएससी में काम दिलाने के लिए एल. खियांग्ते के मिजोरम स्थित आवास पर 2.50 लाख रुपये नकद पहुंचाया था।
- जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता व टीडीपीएल कर्मी उस्मान के बीच 17 जून 2025 से 21 जुलाई 2026 के बीच 674 बार बातचीत हुई थी।
- श्वेता कुमारी गुप्ता का तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते से सात जून 2025 से 15 जुलाई 2026 के बीच 301 से 304 बार बातचीत हुई थी।
- टीडीपीएल के स्कैनिंग प्रभारी प्रदीप कुमार सिंह से 19 मार्च 2026 14 जुलाई 2026 के बीच 74 बार बातचीत, टीडीपीएल के हेमंत वर्मा से 16 जनवरी 2026 से 20 जुलाई 2026 के बीच 44 बार बातचीत हुई है। इसके अलावा टीडीपीएल के संचालक रामवीर सिंह, अरुण कुमार, ऋतु कुमार राम, उस्मान के दूसरे नंबर, संजय कुमार के साथ भी बातचीत से संबंधित काल डिटेल्स रिकार्ड (सीडीआर) को सीआइडी ने कोर्ट में पेश किया है।
