JPSC Exam Scam: इंटरव्यू के पहले चलता था कोडिंग-डिकोडिंग का खेल, जानबूझकर बंद किए गए CCTV कैमरे
जेपीएससी परीक्षा घोटाले में CID जांच से खुलासा हुआ कि साक्षात्कार में मनचाहे अंक दिलाने के लिए फोन कॉल और कोडिंग-डिकोडिंग का खेल चलता था।

जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते। फाइल फोटो
HighLights
साक्षात्कार में मनचाहे अंक दिलाने के लिए कोडिंग-डिकोडिंग का खेल।
ओएमआर स्कैनिंग के दौरान जानबूझकर बंद रखे गए सीसीटीवी कैमरे।
तत्कालीन अध्यक्ष खियांगते और बिचौलियों के बीच लगातार बातचीत।
राज्य ब्यूरो, रांची। जांच एजेंसी CID द्वारा जुटाए गए तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया है कि परीक्षाओं के संचालन से लेकर साक्षात्कार तक पूरा सिंडिकेट फोन कॉल और कोडिंग-डिकोडिंग के जरिए संचालित किया जा रहा था।
साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों को मनमाफिक अंक दिलाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया गया था। दलालों और एजेंटों के माध्यम से प्राप्त क्रमांकों को बाकायदा कोड में बदला जाता था।
इसके बाद निजी एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक द्वारा यह कोड सूची सीधे खियांग्ते को सौंपी जाती थी। जांच के अनुसार, तत्कालीन अध्यक्ष साक्षात्कार से ठीक एक दिन पहले उस कोड को डिकोड करवाते थे।
इसके बाद चिन्हित अभ्यर्थियों को अपने स्वयं के बोर्ड या प्रभाव वाले सदस्य के बोर्ड में आवंटित कर दिया जाता था, ताकि सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को सीधे तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके।
सीडीआर ने खोली साठगांठ की पोल, सैकड़ों बार हुई बातचीत
सीआइडी को मिले सीडीआर डेटा से साबित हुआ है कि तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते का बिचौलियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ लगातार सीधा संपर्क बना हुआ था। अनुसंधान में यह भी उजागर हुआ है कि नियमों और 'चेन आफ कस्टडी' को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था।
स्ट्रांग रूम की सुरक्षा तथा ओएमआर और आंसर शीट की सीधी कस्टडी तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक और अध्यक्ष के निर्देशन में थी। ओएमआर स्कैनिंग के दौरान संबंधित एजेंसी के पास लगभग दो महीने तक अनधिकृत रूप से ओएमआर शीट रखी रहीं।
इस दौरान स्ट्रांग रूम और स्कैनिंग क्षेत्रों के सीसीटीवी कैमरों को जानबूझकर बंद रखा गया, ताकि किसी भी प्रकार का डिजिटल साक्ष्य दर्ज न हो सके।
इसके अतिरिक्त, अभय कुमार की कंपनी द्वारा संचालित जेट परीक्षा में धर्मेंद्र कुमार द्वारा 36 अभ्यर्थियों की ओएमआर कार्बन प्रतियां पैसे लेकर अरुण को दिए जाने का मामला भी जांच में पुष्ट हुआ है।
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