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झारखंड में वरीयता सूची जारी हुई तो सरकार को पता चला कि 695 डॉक्टर ड्यूटी ही नहीं कर रहे, हटाए जाएंगे 631 चिकित्स्क

Published: Sun, 25 Oct 2026 06:29 PM (IST)

झारखंड स्वास्थ्य विभाग 631 चिकित्सकों को सेवा से हटाने की तैयारी कर रहा है, जो लंबे समय से ड्यूटी से ...और पढ़ें

64 चिकित्सक अनधिकृत रूप से ड्यूटी से हैं गायब, 15 दिनों में मांगा स्पष्टीकरण।

64 चिकित्सक अनधिकृत रूप से ड्यूटी से हैं गायब, 15 दिनों में मांगा स्पष्टीकरण।

HighLights

  1. 631 चिकित्सकों को सेवा से हटाने की तैयारी।

  2. 64 अनुपस्थित डॉक्टरों से मांगा स्पष्टीकरण।

  3. झारखंड में डॉक्टरों की कमी बड़ी समस्या।

राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में चिकित्सकों के नियुक्ति के बाद योगदान देकर ड्यूटी नहीं करने या लगातार अनधिकृत रूप से ड्यूटी से गायब रहने की समस्या शुरू से ही रही है। स्वास्थ्य विभाग बीच-बीच में ऐसे चिकित्सकों की पहचान कर उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई करता है।

लेकिन पहली बार बड़ी संख्या में ऐसे चिकित्सकों के लंबे समय से ड्यूटी से गायब रहने का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों की वरीयता सूची जारी करते हुए सभी जिलों से रिपोर्ट मंगाई तो पता चला कि कुल 695 चिकित्सक लंबे समय से गायब हैं।

इन सभी चिकित्सकों की नियुक्ति झारखंड लोक सेवा आयाेग के माध्यम से अलग-अलग हुई थी। स्वास्थ्य विभाग ने 631 ऐसे चिकित्सकों को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर यह दावा करने को कहा है कि वे वर्तमान में सेवारत हैं।

जिलों से मिली रिपोर्ट के अनुसार ये सभी चिकित्सक वर्तमान में कार्यरत नहीं है। इनके द्वारा सेवा में होने का साक्ष्य के साथ दावा नहीं किए जाने पर सरकार इन्हें सेवा से हटाने की कार्रवाई करेगी। इसपर जेपीएससी के अनुमोदन के साथ-साथ कैबिनेट की भी स्वीकृति ली जाएगी।

इधर, विभाग ने उन 64 चिकित्सकों की भी पहचान की है जो सेवा में तो हैं, लेकिन लंबे समय से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित हैं। इनसे भी 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण पूछा गया है कि क्यों नहीं उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जाए।

सेवा में नहीं टिकते चिकित्सक

राज्य में सरकारी सेवा में चिकित्सकों के नहीं टिकने की गंभीर समस्या रही है। चिकित्सकों को सरकारी नियुक्ति में कई विशेष सुविधाएं मिलने के बाद भी यह स्थिति है। चिकित्सक जेपीएससी से नियुक्त होकर योगदान तो देते हैं, लेकिन पसंद की जगह पर पदस्थापन नहीं होने पर वहां या तो योगदान ही नहीं देते। या फिर योगदान देकर ड्यूटी से गायब रहने लगते हैं।

कई चिकित्सक नौकरी भी नहीं छोड़ते। बाद में सरकार उन्हें सेवा से हटाती है। चिकित्सक सरकारी सेवा में आ सकें, इसके लिए उन्हें नियुक्ति के साथ ही एक साथ चार वेतन वृद्धि का लाभ भी देती है।

टेंडर से अनुबंध पर नियुक्ति का विकल्प

सरकार चिकित्सकों की अनुबंध पर टेंडर के माध्यम से नियुक्ति का विकल्प अपना रही है। इसके तहत चिकित्सकों से बिड आमंत्रित कर उनकी नियुक्ति अधिकतम तीन लाख रुपये के वेतन पर करती है।

साथ ही उनके द्वारा दिए गए विकल्प के आधार पर पदस्थापन किया जाता है। हालांकि इसमें भी कई चिकित्सक बाद में नौकरी छोड़ देते हैं। राज्य सरकार चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए दक्षिणी राज्यों से नियुक्ति की तैयारी कर रही है।

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