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झारखंड 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल टली: छठ तक सरकार को मोहलत, 6 मांगों पर बनी सहमति

Published: Sun, 25 Oct 2026 06:19 PM (IST)

झारखंड में 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल टल गई है। स्वास्थ्य विभाग के साथ छह मांगों पर सहमति ...और पढ़ें

वेतन कटौती और मनमानी बर्खास्तगी पर रोक समेत छह मांगों पर बनी सहमति।

वेतन कटौती और मनमानी बर्खास्तगी पर रोक समेत छह मांगों पर बनी सहमति।

HighLights

  1. छह मांगों पर सहमति के बाद 108 एंबुलेंस हड़ताल टली।

  2. वेतन कटौती, मनमानी बर्खास्तगी पर रोक; एस्क्रो खाते से भुगतान।

  3. 18 नवंबर तक समाधान न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी।

जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल टल गई है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के साथ वार्ता के बाद झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने छठ पूजा तक आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, वेतन भुगतान में पारदर्शिता और श्रम संबंधी सुविधाओं सहित छह प्रमुख मांगों पर सकारात्मक सहमति बनने का दावा किया गया है।

हालांकि, संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 18 नवंबर 2026 से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। इससे राज्य की आपातकालीन एंबुलेंस सेवा प्रभावित होने की आशंका है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने बताया कि 22 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक में कर्मचारियों की लंबित समस्याओं और एंबुलेंस संचालन से जुड़ी खामियों पर विस्तार से चर्चा हुई थी।

सरकार की ओर से मांगों के समाधान के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने को कुछ दिनों का समय मांगा गया। इसके बाद संघ ने रविवार को निर्णय लिया कि सरकार को एक और अवसर देने के उद्देश्य से आंदोलन स्थगित रखा जाएगा।

मनमाने तरीके से नौकरी से नहीं निकाल सकेगी कंपनी

कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग सेवा सुरक्षा को लेकर है। संघ का दावा है कि अब किसी कर्मचारी को मनमाने तरीके से नौकरी से हटाने के बजाय शिकायत या गड़बड़ी के मामले की जांच कराई जाएगी।

इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की राज्यस्तरीय टीम, संबंधित जिले के सिविल सर्जन और कर्मचारी संघ की सहभागिता होगी। जांच में दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों की मनमानी बर्खास्तगी पर रोक लगाना है।

एस्क्रो खाते से होगा वेतन भुगतान

वेतन भुगतान में पारदर्शिता लाने के लिए एस्क्रो खाते की व्यवस्था पर भी सहमति बनने की बात कही गई है। इसके माध्यम से वेतन भुगतान की निगरानी स्वास्थ्य विभाग कर सकेगा। संघ का आरोप रहा है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने और मनमाने तरीके से वेतन कटौती जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने पर इन अनियमितताओं पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

एंबुलेंस खराब होने पर भी नहीं कटेगा वेतन

बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि एंबुलेंस खराब रहने या कर्मचारियों को कोई केस नहीं मिलने की स्थिति में उनके वेतन में कटौती नहीं की जानी चाहिए। संघ का तर्क है कि वाहन में तकनीकी खराबी या केस नहीं मिलना कर्मचारियों के नियंत्रण में नहीं है।

ऐसे में इसका आर्थिक बोझ कर्मचारियों पर डालना उचित नहीं है। इसके अलावा कर्मचारियों को समय पर वेतन, न्यूनतम मजदूरी, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआइसी), अवकाश, जीवन बीमा और बोनस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

सभी एंबुलेंस में बायोमीट्रिक उपकरण लगाने और नए कर्मचारियों की बहाली से पहले एनएचएम की अनुमति अनिवार्य करने की मांग पर भी सहमति बनने का दावा किया गया है।

मौजूदा टेंडर में सुधार पर भी चर्चा

कर्मचारियों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए वर्तमान एंबुलेंस टेंडर में आवश्यक संशोधन करने अथवा निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे निरस्त कर नए सिरे से टेंडर जारी करने के विकल्प पर भी चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव ने इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए संघ से समय मांगा है।

संघ ने कहा है कि आंदोलन स्थगित करने का अर्थ मांगों से पीछे हटना नहीं है। यदि इस बीच कंपनी किसी कर्मचारी के खिलाफ अनुचित कार्रवाई करती है तो संघ 72 घंटे के भीतर आगे की रणनीति तय कर राज्यव्यापी हड़ताल का निर्णय लेगा। वहीं, 18 नवंबर तक मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।

आपातकालीन सेवा पर टिकी निगाहें

108 एंबुलेंस सेवा सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर मरीजों और अन्य आपात स्थितियों में लोगों को अस्पताल पहुंचाने की महत्वपूर्ण कड़ी है। ऐसे में कर्मचारियों की मांगों और सरकार के साथ बनी सहमति का समय पर लागू होना जरूरी है।

अब स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती है कि वह तय समयसीमा के भीतर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करे, ताकि आंदोलन की नौबत न आए और राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध रूप से चलती रहें।