झारखंड के सरकारी स्कूलों में विशेष बच्चों का नामांकन एक प्रतिशत से भी कम, केंद्र ने चेताया
झारखंड के सरकारी स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का नामांकन कुल छात्रों का 1% से भी कम है, जबकि ...और पढ़ें

केंद्र ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर नामांकन कराने के दिए निर्देश। (तस्वीर: सांकेतिक)
HighLights
विशेष बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में 1% से भी कम।
राज्य में केवल 6.19% शिक्षक विशेष बच्चों हेतु प्रशिक्षित।
केंद्र ने नामांकन बढ़ाने और प्रशिक्षण पर जोर दिया।
नीरज अम्बष्ठ, रांची। विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चे सामान्य बच्चों के साथ सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर सकें, इसके लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत समावेशी शिक्षा कार्यक्रम संचालित किया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी ऐसे बच्चों के लिए सुलभ और समावेशी शिक्षा पर जोर दिया गया है।
राज्य में वर्तमान स्थिति यह है कि सरकारी स्कूलों में नामांकित कुल बच्चों में ऐसे बच्चों की हिस्सेदारी एक प्रतिशत भी कम 0.67 प्रतिशत ही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एक बैठक में राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के पदाधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए विशेष बच्चों की पहचान कर सामान्य स्कूलों में उनका नामांकन सुनिश्चित करने को कहा है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने उक्त बैठक की कार्यवाही भेजते हुए कुल नामांकन में विशेष बच्चों की हिस्सेदारी में कमी आने की ओर भी राज्य का ध्यान आकृष्ट कराया है। साथ ही समावेशी शिक्षा कार्यक्रम को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए कई अन्य बिंदुओं को लेकर भी सुधार की गुंजाइश बताई है।
यूडायस प्लस-2024-25 के आंकड़ों के आधार पर बताया गया कि राज्य में 6.19 प्रतिशत शिक्षक ही विशेष बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किए गए हैं। राज्य में समावेशी शिक्षा कार्यक्रम के तहत 536 विशेष शिक्षक तो बहाल हैं, लेकिन इनमें कई प्रखंड संसाधन केंद्रों में कार्यरत हैं।
केंद्र ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा दिव्यांगजन अधिनियम, 2016 के प्रविधानों के अनुरूप इनमें सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध राज्य सरकार से किया है। केंद्र ने विशेष बच्चों की पहचान के लिए प्रशस्त-2.0 ऐप की लांचिंग भी की है, जिसका उपयोग करने का अनुरोध राज्य से किया गया है।
स्कूलों में विशेष बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाएं
- राज्य के 44,367 स्कूलों में 67.21 प्रतिशत स्कूलों में रैंप की सुविधा उपलब्ध है।
- 3,132 (6.07 प्रतिशत) स्कूलों में ही विशेष बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखकर शौचालय बनाए गए हैं।
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