झारखंड में बालू संकट: 302 घाट नीलाम, सिर्फ 14 से ही उठाव; पांच सर्टिफिकेट पाने में छूट रहा पसीना
झारखंड में 444 बालू घाटों में से 302 की नीलामी हुई है, लेकिन वर्तमान में केवल 6 जिलों के 14 ...और पढ़ें

15 अक्टूबर से हटेगी एनजीटी की रोक, फिर शुरू होगा खनन।
HighLights
झारखंड में 302 बालू घाटों की नीलामी हुई है।
वर्तमान में केवल 14 घाटों से ही वैध बालू उठाव संभव।
15 अक्टूबर से एनजीटी की रोक हटेगी, प्रक्रिया होगी तेज।
अश्विनी रघुवंशी, रांची। झारखंड का बालू बेहतरीन है। लाल बाबू। बहुतायत भी है। मगर आम लोगों से पूछिए तो जवाब होगा कि सालों से सस्ता बालू मिलना मुश्किल है। इसकी वजह है, सालों से बालू घाटों की नीलामी नहीं होगा। लंबे समय बाद जून 2026 में हेमंत सरकार ने झारखंड के सभी 444 बालू घाटों की नीलामी कराई।
कई घाटों का एक-एक समूह बनाकर। 302 घाट नीलाम हो गए। रोचक पहलू है कि नीलामी के चार महीने बाद भी पूरे प्रदेश में सिर्फ छह जिले में 14 घाट ऐसे हैं, जहां से वैध तरीके से बालू उठाव संभव है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा बालू निकासी पर लगाई गई रोक 15 अक्टूबर से हट जाएगी। थोड़ा बहुत वैध बालू मिलना शुरू हो जाएगा। मगर यह सुगम और सस्ता शायद हो।
हां, नीलाम हुए शेष 288 घाटों को चालू करने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। पांच प्रमाणपत्र का जुगाड़ हो जाय तो सारे बालू घाट का संचालन शुरू होगा। उसके बाद ही बालू सस्ता होगा।
हेमंत सरकार ने नीलामी की तो घाटों का समूह बनाकर। इसके पीछे सोच थी कि जिला विशेष के कई घाटों को एक समूह बना कर नीलामी की गई। सोच यह थी कि साधन संपन्न व्यक्ति घाट लेगा तो व्यवस्थित तरीके से खनन कार्य होगा। राज्य में नीलामी की गति धीमी हुई तो घाटों के समूह को छोटा किया गया। आशय यह कि पहले 20 घाट का एक समूह बना कर पहले नीलामी की गई।
बाद में दस घाट का समूह बनाया गया ताकि अपेक्षाकृत कम साधन संपन्न भी लोग आगे आए। सफलता भी मिली। अब नीलामी लेने वाले पांच प्रमाणपत्र के जुगाड़ में लगे हैं। इनमें पर्यावरणीय स्वीकृति (इसी), वन विभाग की अनापत्ति, अंचलाधिकारी की रिपोर्ट, शिड्यूल एरिया में ग्रामसभा की अनुमति और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से कंसेंट आफ आपरेट (सीटीओ) शामिल हैं।
3500 करोड़ के सालाना राजस्व की उगाही का लक्ष्य
झारखंड सरकार ने बालू से सालाना साढ़े 3 हजार करोड़ के राजस्व की उगाही का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रदेश में आठ माह घाटों से बालू का उठाव होता है। जुलाई से अक्टूबर तक चार माह खनन बिल्कुल बंद रखना है। राजस्व तभी आएगा जब सारे घाट नीलाम होंगे और उनसे बालू का उठाव होने लगेगा।
जाहिर है, वर्तमान परिस्थिति में राजस्व उगाही आसान नहीं है। खान एवं भूतत्व सचिव अरवा राजकमल नीलाम हुए बालू घाटों के संचालन को लेकर लगातार समीक्षा कर रहे हैं। खान निदेशालय भी सक्रिय है।
सिर्फ यही के घाटों पर वैध बालू
- दुमका : छोटाकामती, हरिपुर एवं काटोनई
- हजारीबाग : सांर्थ एवं सोनपुर, लांगटू, सिकरी एवं पंडरिया
- रांची : श्यामनगर
- गोड्डा : जसमाता, झिलुवा एवं सनातन
- पूर्वी सिंहभूम : कोरेया मोहनपाल
- रामगढ़ : सिरका, तोकीसुद एवं पैंकी
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