माओवाद साफ, अब गैंगस्टर की बारी: झारखंड पुलिस के 'ऑपरेशन लंगड़ा' और इंटरपोल के शिकंजे में कुख्यात
झारखंड पुलिस ने राज्य में अपराध के खात्मे के लिए बड़ी कार्रवाई की है, जिसमें दुर्दांत अपराधियों को घुटने टेकने ...और पढ़ें

झारखंड पुलिस की सख्ती से दुर्दांत अपराधियों ने टेके घुटने।
HighLights
पुलिस की सख्ती से दुर्दांत अपराधियों ने टेके घुटने।
विदेश भागे अपराधियों की तलाश में इंटरपोल की मदद।
नई पीढ़ी के अपराधियों को कुचलने में जुटी पुलिस।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में आतंक का अंत करीब है। यहां माओवाद से लेकर अपराध तक विरासत में मिला, लेकिन समय के साथ झारखंड पुलिस की दृढ़ इच्छाशक्ति, मजबूत सूचनातंत्र व कारगर कार्रवाई ने दुर्दांत अपराधियों को घुटने टेकने पर विवश कर दिया।
माओवाद समाप्त हो गया। कुख्यात अपराधियों में कुछ मारे गए, कई जेल में बंद हैं और जो बच गए वे विदेश में भागकर सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं। विदेश भागने वाले अपराधियों के विरुद्ध रेड कार्नर नोटिस जारी हो चुका है। उनकी खोज में इंटरपोल की मदद ली जा रही है।
राज्य में अपराधियों की उग रही नई पौध को कुचलने में पुलिस जुटी हुई है। पुलिस का आपरेशन लंगड़ा चल रहा है, जिसमें मुठभेड़ में अब तक आधा दर्जन से अधिक अपराधियों को पैर में गोली मारकर पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
जो अपराधी विदेश में सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं, उनमें गैंग्स आफ वासेपुर का प्रिंस खान, कुख्यात राहुल सिंह व राहुल दुबे शामिल हैं। झारखंड पुलिस ने तीनों की तलाश के लिए उनके विरुद्ध रेड कार्नर नोटिस जारी करवा दी है।
कुख्यात प्रिंस खान के दुबई से पाकिस्तान तक के नेटवर्क की जानकारी पुलिस को मिली है और यह भी सूचना है कि वह पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के साथ मिलकर आतंकी गतिविधियों में लिप्त है। ऐसी स्थिति में उसपर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की भी तैयारी है।
उसके आतंकी कनेक्शन सामने आने के बाद ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) उसकी तलाश में जुटी है। वह विदेश में बैठकर झारखंड में अपने गैंग को संचालित कर रहा है और अपने गुर्गों की मदद से कोयला कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों, व्यवसायियों व विकास योजनाओं से रंगदारी वसूली के लिए काल करता है, रंगदारी नहीं देने पर गोली-बारी करवाकर दहशत फैलाने की कोशिश करता है।
इसी तरह राहुल सिंह व राहुल दुबे भी पुलिस की दबिश से राज्य ही नहीं देश छोड़ चुके हैं और वहां बैठकर रंगदारी मांगते हैं तथा दहशत कायम करने के लिए गुर्गों से गोलीबारी करवाते हैं।
इनका गैंगवार में हो चुका है अंत
सुधीर सिंह उर्फ भोमा सिंह (जेल में बंद कुख्यात प्रतिद्वंद्वी अनिल शर्मा ने अस्तुरा से गला रेतकर हत्या की थी।), भोला पांडेय (पांडेय गिरोह का सरगना था, दुमका से रांची लाने के दौरान जामताड़ा में अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर मारा था, आरोप प्रतिद्वंद्वी सुशील श्रीवास्तव पर लगा था।), किशोर पांडेय (जमशेदपुर के कदमा बाजार में 15 अक्टूबर 2014 को श्रीवास्तव गिरोह ने गैंगवार में मारा)।
सुशील श्रीवास्तव (हजारीबाग सिविल कोर्ट परिसर में पांडेय गिरोह ने एके-47 से भूना), अमन सिंह (धनबाद मंडल कारा में तीन दिसंबर 2025 को अपराधियों ने मारा, उसके हत्यारे उत्तर प्रदेश में मारे गए।), मनोज सिंह (कुख्यात अखिलेश सिंह गिरोह का सदस्य था, जेल में पीट पीटकर हत्या हुई थी।) व कुणाल सिंह (पलामू में फिल्मी अंदाज में हत्या हुई थी, आरोप डब्लू सिंह गिरोह पर लगा था)।
इन्हें पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया
अमन साहू (रायपुर से रांची लाने के क्रम में पलामू में मुठभेड़ में मारा गया), सुजीत सिन्हा (साहिबगंज से धनबाद लाने के क्रम में जामताड़ा में मारा गया), उत्तम यादव (चतरा के सिमरिया में मुठभेड़ में मारा गया) व सूर्या हांसदा (गोड्डा में पुलिस मुठभेड़ में ढेर)।
ये काट रहे हैं आजीवन कारावास की सजा
अनिल शर्मा (भोमा सिंह हत्याकांड सहित कई बड़े कांडों का आरोपित), अखिलेश सिंह (अपराध की दुनिया का कुख्यात चेहरा, जिसके दहशत से मिलती थी रंगदारी), विकास तिवारी (सुशील श्रीवास्तव हत्याकांड का आरोपित व पांडेय गिरोह का सरगना)।
अजरबैजान से प्रत्यर्पण कराकर झारखंड लाया गया था कुख्यात मयंक सिंह
खुद को अमन साहू गिरोह का शूटर बताकर झारखंड के कारोबारियों में दहशत कायम कर रंगदारी मांगने वाले कुख्यात मयंक सिंह उर्फ सुनील सिंह मीणा को झारखंड पुलिस की आतंकवाद निरोधक दस्ता ने अजरबैजान से प्रत्यर्पण कराया था और उसे लेकर झारखंड आई थी।
मयंक सिंह की गिरफ्तारी के बाद एक रंगदारी काल थमा तो प्रिंस खान, राहुल सिंह व राहुल दुबे के रंगदारी काल ने इन दिनों कारोबारियों की नींद भले ही उड़ाई है, लेकिन ऐसे अपराधियों के गुर्गों की गिरफ्तारी से थोड़ी राहत जरूर महसूस कर रहे हैं।
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