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झारखंड में पंचायत चुनाव की तैयारी शून्य, ओबीसी सीटों का भी पता नहीं; प्रतुल शाहदेव बोले- केंद्रीय अनुदान पर संकट

Published: Mon, 05 Oct 2026 06:32 PM (IST)

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड सरकार पर पंचायत चुनाव और ओबीसी आरक्षण को लेकर लापरवाही का आरोप लगाया है। ...और पढ़ें

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, समय से चुनाव नहीं कराने पर हजारों करोड़ के केंद्रीय अनुदान का नुकसान।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, समय से चुनाव नहीं कराने पर हजारों करोड़ के केंद्रीय अनुदान का नुकसान।

HighLights

  1. सरकार पर पंचायत चुनाव में लापरवाही और टालमटोल की नीति का आरोप।

  2. 2027 के पंचायत चुनाव में ओबीसी सीटों का निर्धारण अभी तक नहीं हुआ।

  3. समय पर चुनाव न होने से हजारों करोड़ के केंद्रीय अनुदान का नुकसान।

राज्य ब्यूरो, रांची। प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि राज्य सरकार पंचायत चुनाव को लेकर लापरवाही और टालमटोल की नीति पर चल रही है। इसका खामियाजा राज्य की जनता बार-बार भुगत रही है। प्रतुल शाहदेव ने कहा कि वर्ष 2022 में पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण के बिना कराए गए थे।

उस समय सरकार की लापरवाही के कारण पिछड़ा वर्ग अपने संवैधानिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित हुआ। अब 2027 के पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण देने की बात तो सरकार कर रही है, लेकिन ओबीसी सीटों का अंतिम आरक्षण निर्धारण अभी तक पूरा नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब चुनाव की संभावित समय-सीमा अप्रैल-मई 2027 है, तब अक्टूबर 2026 तक भी पिछले वर्गों और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए सीटों को चिह्नित क्यों नहीं किया गया।

प्रतुल ने कहा कि राज्य में 4,345 ग्राम पंचायतें, 5,341 पंचायत समिति सदस्य पद और 536 जिला परिषद सदस्य पद सहित कुल 63,701 पंचायत प्रतिनिधियों के पद हैं। इतने बड़े चुनाव के लिए मतदाता सूची, मतदान केंद्र, मतपेटियां, कार्मिकों का प्रशिक्षण, निर्वाचन क्षेत्र और आरक्षण का निर्धारण, महिला आरक्षण तथा आरक्षण की रोटेशन व्यवस्था जैसे तमाम काम समय रहते पूरे होने चाहिए।

पंचायत चुनाव कराने पर केंद्र सरकार की ओर से हजारों करोड़ का अनुदान मिलता है।16वें वित्त आयोग (2026-31) ने झारखंड के ग्रामीण क्षेत्र के लोकल बॉडी के लिए कुल मिलाकर ₹14,231 करोड़ की सिफारिश की है।अगर राज्य सरकार तय समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराएगी तो इस अनुदान पर ग्रहण लग सकता है। प्रतुल ने कहा कि राज्य सरकार गांव की सरकार को शक्ति देने में उदासीन प्रतीत हो रही है।

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