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Jharkhand Monsoon: झारखंड में कमजोर पड़ा मानसून, जून में 54 प्रतिशत कम बारिश; खेती पर मंडराने लगा संकट

Published: Wed, 01 Jul 2026 08:17 AM (GMT+05:30)

झारखंड में जून माह में मानसून 54% कमजोर रहा, जिससे सामान्य से काफी कम बारिश हुई। बारिश की कमी से ...और पढ़ें

खेती पर मंडराने लगा संकट

खेती पर मंडराने लगा संकट

HighLights

  1. झारखंड में जून में 54% कम बारिश दर्ज की गई।

  2. धान की खेती पर गहराया संकट, किसान चिंतित।

  3. साहिबगंज में सर्वाधिक 99% वर्षा की कमी।

जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड में मानसून की रफ्तार अब तक सुस्त बनी हुई है। मौसम केंद्र रांची द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 30 जून तक राज्य में सामान्य 189.5 मिलीमीटर के मुकाबले केवल 86.5 मिलीमीटर वर्षा हुई है। इस प्रकार राज्य में कुल 54 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। 

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता दिख रहा है, जहां किसान धान की खेती को लेकर चिंतित हैं। वहीं रांची में जून माह के दौरान 146.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षा 197.6 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। इस प्रकार जिले में 26 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। 

हालांकि राज्य के अन्य कई जिलों की तुलना में रांची की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन किसानों के लिए यह बारिश पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

साहिबगंज में 99 प्रतिशत, गढ़वा में 93 प्रतिशत वर्षा की कमी

राज्य में सबसे अधिक बारिश की कमी साहिबगंज जिले में दर्ज की गई है। यहां सामान्य 227 मिलीमीटर के मुकाबले मात्र 3.2 मिलीमीटर वर्षा हुई, जिससे 99 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके अलावा गढ़वा में 93 प्रतिशत, पलामू में 80 प्रतिशत, गोड्डा में 79 प्रतिशत, चतरा में 78 प्रतिशत तथा कोडरमा में 77 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। 

वहीं दुमका राज्य का एकमात्र ऐसा जिला रहा जहां वर्षा लगभग सामान्य रही। यहां 198.3 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य 198.9 मिलीमीटर के करीब है। जिले में वर्षा विचलन शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया।

अगले पांच दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश के आसार

मौसम केंद्र के अनुसार 4 जुलाई तक रांची और आसपास के क्षेत्रों में सामान्यतः बादल छाए रहेंगे तथा एक-दो बार हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

किसानों की चिंता बढ़ी

बिचड़ा तैयार, लेकिन खेतों में पानी नहीं : पंकज कुजूर

अधिकांश किसान आज भी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं। जून समाप्त होने को है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान का बिचड़ा लगाने का काम प्रभावित है। किसान खेत तैयार कर बारिश का इंतजार कर रहे हैं। समय पर वर्षा नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित होगा और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

धान की खेती पिछड़ने लगी है : सोहराई उरांव

वर्षा में देरी के कारण इस वर्ष भी धान की खेती पिछड़ती नजर आ रही है। खेतों में बिचड़ा डालने का काम लगभग ठप पड़ा है। यदि समय पर बारिश होती तो किसान अब तक खेत तैयार कर बीज डाल चुके होते। किसान अभी भी अच्छी बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

हजारों एकड़ भूमि पर रोपनी नहीं हो सकी : विशेश्वर मिंज

पर्याप्त वर्षा नहीं होने से क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। हजारों एकड़ कृषि भूमि पर अब तक धान की रोपनी शुरू नहीं हो सकी है। बिचड़ा निकल चुका है, लेकिन पानी की कमी के कारण उसका समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। तालाब और कुएं भी पर्याप्त नहीं भरे हैं, जिससे खेतों की तैयारी प्रभावित हो रही है।

अब बारिश हुई तो भी उत्पादन घट सकता है : प्रमोद सिंह

जून समाप्त होने के बावजूद रोपनी शुरू नहीं हो सकी है। तालाब और कुओं में पर्याप्त पानी नहीं होने से सिंचाई भी संभव नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि अब यदि बारिश होती भी है तो देर से खेती शुरू होने के कारण उत्पादन में कमी आने की आशंका बनी रहेगी। किसानों की निगाहें अब जुलाई की बारिश पर टिकी हैं।

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