विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

झारखंड-बंगाल की 2 रेल परियोजनाओं को मिला विशेष दर्जा, निर्माण कार्य की बढ़ेगी रफ्तार

Published: Wed, 01 Jul 2026 12:01 AM (GMT+05:30)

रेल मंत्रालय ने झारखंड और पश्चिम बंगाल की दो महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को विशेष दर्जा दिया है। इससे चांडिल-मुरी दोहरीकरण ...और पढ़ें

एआई से बनाई गई तस्वीर

एआई से बनाई गई तस्वीर

HighLights

  1. चांडिल-मुरी दोहरीकरण और चांडिल-अनारा-बर्नपुर चौथी लाइन को विशेष दर्जा।

  2. परियोजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय स्वीकृति में अब आएगी तेजी।

  3. झारखंड-पश्चिम बंगाल के बीच रेल संपर्क, गति और क्षमता बढ़ेगी।

जागरण संवाददाता, रांची। रेलवे मंत्रालय ने झारखंड और पश्चिम बंगाल से जुड़ी दो महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत विशेष रेलवे परियोजना घोषित कर दिया है। इनमें चांडिल (गुंडाबिहार)-मुरी दोहरीकरण तथा चांडिल-अनारा-बर्नपुर चौथी लाइन परियोजना शामिल हैं।

इस अधिसूचना के बाद इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। रेल मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार चांडिल (गुंडाबिहार)-मुरी दोहरीकरण परियोजना की लंबाई 59.49 किमी है, जिसमें 36.09 किमी हिस्सा झारखंड तथा 23.40 किमी पश्चिम बंगाल में पड़ता है।

वहीं, चांडिल-अनारा-बर्नपुर चौथी लाइन परियोजना की लंबाई 115.36 किमी है। यह परियोजनाएं लंबे समय से रेलवे और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता में रही हैं।

राज्यसभा सांसद ने लिखा था पत्र

राज्यसभा सदस्य डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने भी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर चांडिल-मुरी खंड के दोहरीकरण एवं गुंडाबिहार-चांडिल रेल फ्लाईओवर के लिए बजटीय आवंटन और शीघ्र स्वीकृति की मांग की थी।

उन्होंने अपने पत्र में कहा था कि यह रेलखंड टाटानगर, रांची और हावड़ा जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है, लेकिन सिंगल लाइन होने के कारण यात्री ट्रेनों में लगातार विलंब और भारी दबाव की स्थिति बनी रहती है।

बढ़ेगी रेल की रफ्तार

रेलवे से संबंधित उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान में मुरी-चांडिल रेलखंड में ट्रेनों की औसत गति करीब 46 किमी प्रति घंटा है। यह खंड सिंगल लाइन होने के कारण परिचालन क्षमता प्रभावित होती है। दोहरीकरण होने से ट्रेनों की गति बढ़ेगी, यात्रा समय घटेगा और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक सफर मिल सकेगा।

साथ ही, मालगाड़ियों के परिचालन में भी तेजी आएगी, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को लाभ मिलेगा। चांडिल-मुरी दोहरीकरण परियोजना के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजी जा चुकी है।

वहीं, गुंडाबिहार से चांडिल तक प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना की परियोजना रिपोर्ट भी रेलवे बोर्ड के पास लंबित है। अब इन परियोजनाओं को विशेष रेलवे परियोजना का दर्जा मिलने के बाद इनके लिए वित्तीय स्वीकृति और आगे की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं के पूरा होने से झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा, यात्री और माल परिवहन क्षमता बढ़ेगी तथा रेलवे परिचालन अधिक सुगम और प्रभावी हो सकेगा।

यह भी पढ़ें- सोगरिया-धनबाद स्पेशल ट्रेन की अवधि बढ़ी, अब नवंबर तक मिलेगा यात्रियों को लाभ