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नौ माह से वेतन बकाया मामले में झारखंड मार्केटिंग बोर्ड के एमडी और चेयरमैन हाई कोर्ट में तलब

Published: Fri, 25 Sep 2026 07:00 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने मार्केटिंग बोर्ड के एमडी और चेयरमैन को नौ माह से वेतन बकाया मामले में तलब किया ...और पढ़ें

अदालत ने पूछा- स्थानांतरण और पदस्थापन का सक्षम प्राधिकार कौन।

अदालत ने पूछा- स्थानांतरण और पदस्थापन का सक्षम प्राधिकार कौन।

HighLights

  1. झारखंड हाई कोर्ट ने नौ माह से वेतन बकाया मामले की सुनवाई की।

  2. मार्केटिंग बोर्ड के एमडी, चेयरमैन को 14 अक्टूबर को तलब किया गया।

  3. अदालत ने स्थानांतरण आदेश रद्द करने के प्राधिकार पर सवाल उठाया।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में स्थानांतरण के बाद करीब नौ माह से वेतन नहीं मिलने के मामले शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने झारखंड राज्य कृषि उत्पादन पर्षद के प्रबंध निदेशक (एमडी) और अध्यक्ष को 14 अक्टूबर को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है।

अदालत ने यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि मार्केटिंग बोर्ड में स्थानांतरण और पदस्थापन का सक्षम प्राधिकार कौन है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि एमडी द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश को चेयरमैन ने किस नियम के तहत रद किया।

इस संबंध में मार्केटिंग सुपरवाइजर रमेश कुमार शर्मा ने याचिका दाखिल की गई है। उनकी ओर से अदालत को बताया कि पर्षद के एमडी ने 30 दिसंबर 2025 को रमेश कुमार शर्मा का गढ़वा से कोडरमा मार्केटिंग समिति में तबादला किया था।

इसके बाद उन्होंने एक जनवरी 2026 को कोडरमा में योगदान दे दिया। योगदान देने के बाद जब उन्होंने वेतन भुगतान की मांग की तो उन्हें बताया गया कि गढ़वा से उनका एलपीसी (लास्ट पेमेंट सर्टिफिकेट) नहीं आया है। प्रार्थी की ओर से बाद में गढ़वा से जारी एलपीसी भी उपलब्ध करा दिया गया, लेकिन इसके बाद भी उन्हें वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

इस बीच कोडरमा मार्केटिंग समिति के सचिव की ओर से अदालत में शपथ पत्र दाखिल किया गया। इसमें बताया गया कि प्रार्थी के गढ़वा से कोडरमा ट्रांसफर के आदेश को पर्षद के चेयरमैन ने मई 2026 में रद कर दिया था। इसी वजह से उनका वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा है।

इस पर अदालत ने कहा कि जब सक्षम प्राधिकारी द्वारा ट्रांसफर आदेश जारी कर दिया गया और उसका कार्यान्वयन भी हो गया, तो बाद में उसे रद करने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। अदालत ने सवाल किया कि यदि पर्षद के एमडी सक्षम प्राधिकारी हैं और उन्होंने स्थानांतरण आदेश जारी किया था, तो चेयरमैन ने किस नियम के तहत उस आदेश को रद किया।

सुनवाई के दौरान पर्षद की ओर से अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष संबंधित नियम पेश किया। हालांकि, अदालत ने पर्षद की ओर से बताए गए नियम को स्वीकार नहीं किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पर्षद के एमडी और चेयरमैन को 14 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

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