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उत्पाद नीति बदलने के लिए 55 करोड़ की डील! झारखंड शराब घोटाले में ACB जांच से बड़ा खुलासा

Published: Mon, 28 Sep 2026 10:52 PM (IST)

एसीबी ने कोर्ट को बताया कि झारखंड में शराब घोटाला मामले में उत्पाद नीति बदलने के लिए 55 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

विनय कुमार चौबे की फाइल फोटो। जागरण

विनय कुमार चौबे की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. उत्पाद नीति बदलने के लिए 55 करोड़ रुपये की डील हुई।

  2. अरुण पति त्रिपाठी को शराब घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया।

राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में शराब घोटाला मामले की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने रांची स्थित एसीबी की विशेष अदालत को पूर्व की उत्पाद नीति से जुड़ी जानकारी दी है। इस घोटाले के सह अभियुक्त अमित मित्तल का बयान भी कोर्ट में पेश किया है, जिसमें उसने घोटाले की जानकारी एसीबी को दी है।

यह भी बताया है कि उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के सिंडिकेट ने झारखंड में भी उत्पाद नीति बदलने के लिए 55 करोड़ रुपये की डील की थी।

इस 55 करोड़ रुपये में छत्तीसगढ़ राज्य मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक अरुण पति त्रिपाठी ने झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के सलाहकार बनने के लिए विनय कुमार चौबे को पांच करोड़ रुपये दिए थे।

वहीं, उत्पाद नीति बदलने के लिए 50 करोड़ रुपये तक की रिश्वत दी गई थी। एसीबी की जांच में यह सामने आ चुका है कि अरुण पति त्रिपाठी ही झारखंड में शराब घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता है। छत्तीसगढ़ ईडी भी वहां दर्ज शराब घोटाले से जुड़े मामले में विनय कुमार चौबे से पूछताछ कर चुकी है, झारखंड ईडी की जांच भी जारी है।

गौरतलब है कि एसीबी ने 20 मई 2025 को एसीबी रांची थाना कांड संख्या 09/2025 में प्राथमिकी दर्ज की थी। पूरा मामला फर्जी बैंक गारंटी पर अपनी चहेती प्लेसमेंट एजेंसी को राज्य की शराब दुकानों में मैनपावर आपूर्ति का ठेका देने से जुड़ा था, जिसके चलते राज्य सरकार को 38 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ था।

एसीबी ने जांच के क्रम में आरोपित अमित मित्तल से भी पूछताछ की थी। उसने एसीबी को जानकारी दी थी कि सीएसएमसीएल के प्रबंध निदेशक अरुण पति त्रिपाठी व अनवर ढेबर ने विनय कुमार चौबे को पांच करोड़ रुपये पहुंचाई थी। इसके बाद ही झारखंड में वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ मॉडल पर आधारित उत्पाद नीति लागू हुई थी।

इसके लिए होलोग्राम आपूर्ति एजेंसी प्रिज्म के संचालक विधु गुप्ता व अरुण पति त्रिपाठी ने 40 से 50 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। ऐसा इसलिए किया था ताकि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के सिंडिकेट को झारखंड में शराब के धंधे में उतारा जा सके। बाद में ऐसा ही हुआ भी था।

कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया ने भी अरुण पति त्रिपाठी व चौबे के संबंधों की दी थी जानकारी

एसीबी के अनुसार, पूर्व में गिरफ्तार टाप सिक्योरिटी एंड फैसिलिटिज मैनेजमेंट कंपनी के प्रोपराइटर सिद्धार्थ सिंघानिया ने भी अरुण पति त्रिपाठी व चौबे के संबंधों की जानकारी दी थी और बताया था उन दोनों ने मिलकर ही छत्तीसगढ़ की तर्ज पर झारखंड में शराब नीति लागू की। इसके अधीन ही दो थोक कंपनियां मेसर्स दीशिता वेंचर्स व मेसर्स ओम साईं बेवरेजेज को शराब आपूर्ति का ठेका मिला था।

एसीबी ने जांच में पाया कि इन दोनों कंपनियों ने झारखंड की शराब दुकानों में शराब पहुंचाने के लिए देशी शराब बनाने वाली कंपनियों से प्रति कार्टन 300 से 600 रुपये तक का कमीशन लिया था। इतना ही नहीं मैनपावर आपूर्ति एजेंसी मेसर्स एटूजेड इंफ्रा सर्विसेज लिमिटेड के अमित मित्तल ने भी विनय चौबे को पांच करोड़ की रिश्वत दिए जाने की जानकारी एसीबी को दी है।

इसके अलावा मेसर्स प्राइमवन वर्क फोर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों संजीव जैन, मनीष जैन और राजीव द्विवेदी ने भी एपी त्रिपाठी को ही झारखंड में शराब घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। 

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