10 साल से सेवा दे रहे संविदा अभियंताओं को नियमित करे झारखंड सरकार, हाईकोर्ट ने दिया अल्टीमेटम
झारखंड हाई कोर्ट ने 10 सहायक अभियंताओं की सेवाओं को नियमित करने का आदेश दिया है।

झारखंड हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)
HighLights
हाई कोर्ट ने 10 सहायक अभियंताओं को नियमित करने का आदेश दिया।
एक दशक से अधिक सेवा के बाद नियमितीकरण का लाभ मिलेगा।
राज्य सरकार को 10 सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 10 सहायक अभियंताओं की सेवाओं को नियमित करने का आदेश दिया है।
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पिछले एक दशक से अधिक समय से नियमित कर्मचारियों की तरह कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं, इसलिए उन्हें केवल संविदा का लेबल लगाकर नियमितीकरण से वंचित नहीं रखा जा सकता।
इस संबंध में प्रार्थी अंजनी कुमार और वीर बहादुर वेंकट सिंह सहित अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
उनकी ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन और अधिवक्ता सिद्धार्थ रंजन की ओर से बताया गया कि सभी की नियुक्ति वर्ष 2013 में झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण में सहायक अभियंताओं के पद पर हुई थी। चयन प्रक्रिया के बाद 28 दिसंबर 2012 को मेरिट लिस्ट जारी हुई और 2013 में नियुक्ति पत्र जारी किए गए।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उनकी नियुक्ति राज्य की आरक्षण नीति का पालन करते हुए स्वीकृत और रिक्त पदों पर हुई थी। उन्हें समय-समय पर सेवा विस्तार दिया गया और 7वें वेतन संशोधन का लाभ भी मिला।
याचिकाकर्ताओं ने 19 नवंबर 2024 को नियमितीकरण के लिए आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की।
नियमित कर्मचारियों की तरह निभा रहे कर्तव्य
प्रार्थियों की ओर से तर्क दिया कि याचिकाकर्ता 13 वर्षों से कार्यरत हैं। आवश्यक योग्यता रखते हैं और नियमित कर्मचारियों की तरह ही कर्तव्य निभा रहे हैं।
राज्य सरकार ने कहा कि नियुक्तियां संविदा के आधार पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यभार को देखते हुए की गई थीं। नियुक्ति पत्र में ही स्पष्ट था कि वे भविष्य में नियमितीकरण का दावा नहीं कर सकते।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को उस तिथि से नियमित किया जाए जिस दिन उन्होंने 10 वर्ष की सेवा पूरी की। उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान सभी लाभ मिलेंगे। राज्य को यह पूरी प्रक्रिया फैसले की प्रति प्राप्त होने के 10 सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी।