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'विवाह पवित्र रिश्ता, कठिनाइयों का सामना मिलकर करें', झारखंड हाई कोर्ट ने ठुकराई तलाक की अर्जी 

Published: Thu, 05 Nov 2026 10:01 AM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने पत्नी पर क्रूरता और मानसिक बीमारी के आरोप लगाकर तलाक मांगने वाले पति की अपील खारिज ...और पढ़ें

झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने पति की तलाक की अपील खारिज की।

  2. विवाह को पवित्र रिश्ता बताया, मिलकर कठिनाई सहने को कहा।

  3. क्रूरता या मानसिक बीमारी के आरोप साबित नहीं हुए।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने पत्नी पर क्रूरता और मानसिक बीमारी का आरोप लगाकर तलाक की मांग करने वाले पति की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि भारतीय समाज में विवाह को बेहद सम्मानपूर्ण और पवित्र रिश्ता माना जाता है। 

वैवाहिक जीवन में आने वाली बीमारी, परेशानी और कठिनाइयों का सामना पति-पत्नी को मिलकर करना चाहिए। केवल सामान्य आरोपों या मानसिक बीमारी की आशंका के आधार पर विवाह समाप्त नहीं किया जा सकता। 

फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती

अदालत ने माना कि पति पत्नी के खिलाफ न तो क्रूरता के आरोप साबित कर सका और न ही ऐसी मानसिक बीमारी का प्रमाण दे पाया, जो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का आधार बन सके। 

पति ने चतरा फैमिली कोर्ट के सात सितंबर 2024 के उस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उसकी तलाक की याचिका खारिज कर दी गई थी। दोनों की शादी 31 जनवरी 2016 को हुई थी। उनका एक बेटा भी है। पति सीआइएसएफ में कार्यरत था और राजस्थान के कोटा में उसकी पोस्टिंग थी। 

शादी के समय से ही असामान्य और आक्रामक

पति का आरोप था कि शादी के शुरुआती दिनों से ही पत्नी का व्यवहार असामान्य और आक्रामक था। वह बिना किसी कारण हंसती थी, खुद से बातें करती थी और रिश्तेदारों के सामने अनुचित कपड़ों में आ जाती थी। पति ने यह भी आरोप लगाया था कि शादी से पहले पत्नी की मानसिक स्थिति की जानकारी उससे छिपाई गई थी।

पत्नी ने मानसिक बीमारी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि दहेज में पांच लाख रुपये की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया गया। हाई कोर्ट ने पाया कि पति और उसके गवाह पत्नी के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज या क्रूरता की किसी ठोस घटना का विवरण नहीं दे सके। उनके आरोप सामान्य और अस्पष्ट थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि पति के परिवार के लोग शादी से पहले पत्नी को जानते थे। ऐसे में बीमारी छिपाने का आरोप भी विश्वसनीय नहीं लगता।

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