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जैप-8 जवानों की वेतन वृद्धि वापसी पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, झारखंड सरकार को झटका

Published: Wed, 04 Nov 2026 06:46 PM (IST)

रांची हाई कोर्ट ने जैप-8 के 14 जवानों की वेतन वृद्धि वापस लेने और अतिरिक्त भुगतान वसूलने के राज्य सरकार ...और पढ़ें

अदालत ने कहा- बिना पक्ष सुने वेतन वृद्धि वापस लेना उचित नहीं।

अदालत ने कहा- बिना पक्ष सुने वेतन वृद्धि वापस लेना उचित नहीं।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने वेतन वृद्धि वापसी आदेश रद्द किया।

  2. बिना पक्ष सुने कार्रवाई को अनुचित बताया गया।

  3. सरकार को आठ सप्ताह में लाभ देने का निर्देश।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप)-8 के 14 जवानों को दी गई वेतन वृद्धि वापस लेने और अतिरिक्त भुगतान की राशि एकमुश्त वसूलने के राज्य सरकार के आदेश को रद कर दिया है।

अदालत ने कहा कि जवानों को बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए और उनका पक्ष सुने बिना वेतन वृद्धि वापस लेना उचित नहीं है। अदालत ने राज्य सरकार को जवानों को सभी परिणामी लाभ आठ सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया है।

जैप-8 के 14 जवानों को एक आदेश के तहत एक अप्रैल 2021 को वेतन वृद्धि का लाभ दिया गया था। बाद में कमांडेंट की ओर से 11 दिसंबर 2023 को संशोधित आदेश जारी कर इस वेतन वृद्धि को वापस ले लिया गया। जवानों को मिले अतिरिक्त भुगतान की राशि एकमुश्त वसूलने का आदेश दिया गया।

इसके खिलाफ जवानों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता सिद्धार्थ रंजन ने अदालत को बताया कि इससे पहले भी इसी तरह के मामले में हाई कोर्ट ने वर्ष 2016 और 2017 में जारी बर्खास्तगी के आदेशों को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को सभी जवानों को मूल पद पर बहाल करने और सभी परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया था।

अदालत ने सरकार को प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच करने की छूट भी दी थी। राज्य सरकार ने उस आदेश को चुनौती नहीं दी थी। इसके बाद जवानों को वेतन वृद्धि का लाभ भी दिया गया, लेकिन बाद में बिना कोई नोटिस जारी किए इसे वापस ले लिया गया।

राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि संबंधित अवधि में जवानों ने काम नहीं किया था, इसलिए काम नहीं तो वेतन नहीं के सिद्धांत के तहत वेतन वृद्धि वापस ली गई। सरकार ने झारखंड सेवा संहिता के नियम 85(ख) का भी हवाला दिया।

इसके अनुसार असाधारण अवकाश को छोड़कर अन्य अवकाश की अवधि को वेतन वृद्धि के लिए सेवा अवधि में शामिल किया जा सकता है। जवानों की बर्खास्तगी की अवधि को असाधारण अवकाश माना गया था, इसलिए उस अवधि का लाभ वेतन वृद्धि में नहीं दिया जा सकता।


दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि पहले के आदेश में जवानों को सभी परिणामी लाभ देने का स्पष्ट निर्देश था। राज्य सरकार ने उस आदेश को चुनौती नहीं दी और उसके आधार पर वेतन वृद्धि का लाभ भी दिया।

लंबे समय बाद बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए वेतन वृद्धि वापस लेना उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी ऐसे आदेश को पारित करने से पहले संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना जरूरी है।

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