विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कैंसर पीड़ित बच्ची को छोड़कर मायके गई पत्नी, झारखंड हाई कोर्ट ने तलाक के फैसले पर लगाई मुहर; कहा- यह क्रूरता है

Published: Sat, 07 Nov 2026 10:02 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने कैंसर पीड़ित बेटी को छोड़कर मायके गई पत्नी की तलाक के खिलाफ अपील खारिज कर दी है।

झारखंड हाई कोर्ट। फाइल फोटो

झारखंड हाई कोर्ट। फाइल फोटो

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने पत्नी के तलाक की अपील खारिज की

  2. पत्नी ने कैंसर पीड़ित बेटी और पति को छोड़ दिया था

  3. गुजारा भत्ता 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये हुआ

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत ने कैंसर पीड़ित सात माह की बेटी को छोड़कर मायके चली गई पत्नी की तलाक के खिलाफ दाखिल अपील खारिज कर दी है।

अदालत ने माना कि बीमार बच्ची की देखभाल नहीं करना और लंबे समय तक पति से अलग रहना क्रूरता और परित्याग के दायरे में आता है। अदालत ने पत्नी को मिलने वाले मासिक गुजारा भत्ते को 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिया है।

खंडपीठ ने पिंकी कुमारी की ओर से दायर प्रथम अपील पर फैसला सुनाया। जमशेदपुर फैमिली कोर्ट ने 24 नवंबर 2021 को पति रवि कुमार की तलाक याचिका स्वीकार करते हुए विवाह विच्छेद का आदेश दिया था। पत्नी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

बेटी के इलाज के दौरान भी मां ने नहीं की देखभाल

मामले के अनुसार, पिंकी और आर कुमार की शादी 23 नवंबर 2008 को हुई थी। शादी के बाद दोनों जमशेदपुर में रहने लगे। उनकी एक बेटी हुई, जिसे कम उम्र में ही कैंसर हो गया।

पति के अनुसार, बेटी के इलाज के लिए उसे मुंबई ले जाना पड़ा, लेकिन पत्नी इलाज के दौरान साथ नहीं गई। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी बेटी के साथ मारपीट करती थी, उसे सर्दियों में ठंडे पानी में डाल देती थी और एक बार बालकनी से फेंकने की कोशिश भी की थी।

पत्नी इन आरोपों से सहमत नहीं थी। अदालत ने पाया कि पत्नी ने अपने लिखित जवाब में पति के आरोपों का स्पष्ट और बिंदुवार खंडन नहीं किया था।

अदालत ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के अनुसार अस्पष्ट या टालमटोल वाला जवाब प्रभावी इन्कार नहीं माना जा सकता। ऐसे में जिन तथ्यों का स्पष्ट खंडन नहीं किया गया, उन्हें स्वीकार किया हुआ माना जा सकता है।

खंडपीठ ने यह भी उल्लेख किया कि पत्नी ने अपनी गवाही में स्वीकार किया था कि बेटी सात माह की थी, तभी वह मायके चली गई और उसके बाद पति से कोई संपर्क नहीं रहा।

अदालत ने इसे परित्याग का साक्ष्य माना। साथ ही, कैंसर पीड़ित बच्ची की देखभाल नहीं करने को भी वैवाहिक क्रूरता का गंभीर पहलू बताया।

गुजारा भत्ता 10 से बढ़ाकर 15 हजार रुपये

फैमिली कोर्ट ने पत्नी को अंतरिम गुजारा भत्ता के रूप में 10 हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों के हलफनामों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखते हुए इसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया।

अदालत ने कहा कि परिस्थितियों में बदलाव होने पर कोई भी पक्ष सक्षम अदालत में राशि में संशोधन के लिए आवेदन दे सकता है।

यह भी पढ़ें- झारखंड हाईकोर्ट की दो टूक: केवल नोटिस पर सीधे कोर्ट आना सही नहीं, टाटा स्टील को माडा के पास जाने का निर्देश

यह भी पढ़ें- JPSC Exam Scam: अभ्यर्थियों ने बिचौलियों को दी OMR शीट की कॉर्बन कॉपी, CID ने मांगा तो गढ़ी झूठी कहानी

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।