शराब पीने पर टोकने से बेटे की हत्या गैर इरादतन, झारखंड हाई कोर्ट ने पिता की आजीवन कारावास की सजा घटाई
झारखंड हाई कोर्ट ने बेटे को शराब पीने से टोकने पर चाकू मारने के मामले में पिता की आजीवन कारावास ...और पढ़ें

अदालत ने जेल में बिताई गई अवधि को ही मानी सजा, 24 अगस्त 2018 को हुई थी घटना।
HighLights
पिता ने बेटे को शराब पीने से टोकने पर चाकू मारा।
हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा घटाई।
मामला गैर इरादतन हत्या (IPC 304) में बदला।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस पीके श्रीवास्तव की अदालत ने बेटे के शराब पीने को लेकर टोकने पर गुस्से में आकर चाकू से एक वार करने के मामले में 88 वर्षीय पिता की आजीवन कारावास की सजा घटा दी है।
अदालत ने कहा कि घटना अचानक हुए विवाद के दौरान गुस्से में हुई थी और हत्या की पहले से कोई योजना होने के प्रमाण नहीं मिले। इसलिए यह मामला हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है।
अदालत ने अभियुक्त की दोषसिद्धि भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 302 से बदलकर धारा 304 के तहत कर दी और उसकी सजा को जेल में पहले से काटी गई अवधि तक सीमित कर दिया।
खंडपीठ ने गोमा गोप की अपील पर सुनवाई के बाद उक्त फैसला सुनाया। चाईबासा स्थित पश्चिमी सिंहभूम के अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 24 अगस्त 2018 को गोमा गोप को बेटे की हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
हड़िया पीने को लेकर हुआ था विवाद
अभियोजन के अनुसार, घटना 21 नवंबर 2013 की है। गोमा गोप घर में हड़िया पी रहा था। इसी दौरान उसका 20 वर्षीय बेटा प्रताप गोप घर लौटा और पिता के अधिक सेवन पर सवाल उठाया। इसे लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। इसी दौरान गोमा गोप ने सब्जी काटने वाले चाकू से बेटे के पेट में वार कर दिया। चोट इतनी गंभीर थी कि उसकी आंतें बाहर निकल आईं और अत्यधिक खून बहने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
घटना की सूचना आरोपित की पत्नी जेमा गोप ने पुलिस को दी थी। इसके बाद हत्या का मामला दर्ज किया गया। पश्चिमी सिंहभूम ने साक्ष्य के आधार पर आरोपित को दोषी ठहराया था। हाई कोर्ट में अभियुक्त की ओर से कहा गया कि उसे गलत तरीके से फंसाया गया है और वह लंबे समय से जेल में बंद है। राज्य सरकार ने सजा बरकरार रखने की मांग की।
