ट्रेन से दुर्घटना के बाद टिकट नहीं मिलने पर मुआवजा से वंचित नहीं कर सकते: झारखंड हाई कोर्ट
झारखंड हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रेन दुर्घटना में यात्री की मौत पर केवल टिकट न मिलने के आधार पर ...और पढ़ें

अदालत ने कहा- केवल तकनीकी कारणों से मुआवजे से वंचित रखना उचित नहीं।
HighLights
हाई कोर्ट ने मुआवजा नियमों को उदारता से समझने को कहा।
रेलवे दावा अधिकरण का टिकट पर मुआवजा खारिज करना गलत।
बनमाली गोप के परिजनों को 8 लाख रुपये मुआवजा मिलेगा।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने कहा कि ट्रेन दुर्घटना में किसी यात्री की मौत होने पर उसके शव से रेलवे टिकट नहीं मिलने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने रेलवे को बनमाली गोप के स्वजनों को आठ लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि मुआवजे से जुड़े नियमों को उदारता से समझना चाहिए, ताकि दुर्घटना के शिकार परिवारों को न्याय मिल सके। केवल तकनीकी कारणों से किसी परिवार को मुआवजे से वंचित करना उचित नहीं है।
अदालत ने रेलवे दावा अधिकरण के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें टिकट नहीं मिलने के कारण मुआवजे का दावा खारिज कर दिया गया था। मामला बनमाली गोप की मौत से जुड़ा है।
उनके स्वजनों ने आठ लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी, लेकिन अधिकरण ने 12 सितंबर 2023 को दावा खारिज कर दिया था। इसके बाद स्वजनों ने हाई कोर्ट में अपील की।
भीड़ में धक्का लगने से ट्रेन से गिरे थे बनमाली
स्वजनों के अनुसार, एक सितंबर 2017 को बनमाली गोप पलामू के झींकपानी रेलवे स्टेशन से टाटा-बड़बिल पैसेंजर ट्रेन में सवार हुए थे। उन्हें केंदपोसी जाना था। ट्रेन में काफी भीड़ थी और वह खड़े होकर यात्रा कर रहे थे।
केंदपोसी स्टेशन के पास उतरने वाले यात्री दरवाजे की ओर बढ़ने लगे। इसी दौरान धक्का लगने और ट्रेन में अचानक झटका आने से बनमाली संतुलन खो बैठे और चलती ट्रेन से नीचे गिर गए। हादसे में उनके दोनों पैर कट गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
गवाही और दस्तावेजों को माना अहम
हाई कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, स्टेशन प्रबंधक के पत्र और गवाह के बयान पर विचार किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्रेन दुर्घटना से लगी गंभीर चोटों का उल्लेख था। वहीं, स्टेशन प्रबंधक के पत्र में रात करीब 8:25 बजे रेलवे लाइन के पास शव मिलने की जानकारी दर्ज थी।
अदालत ने कहा कि इन सबूतों से स्पष्ट है कि बनमाली ट्रेन में यात्रा कर रहे थे और दुर्घटना में उनकी मौत हुई। रेलवे ने भी बनमाली के भाई की इस गवाही को चुनौती नहीं दी कि उसने टिकट खरीदा था। अदालत ने यह भी कहा कि रेलवे ने घटना से संबंधित मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) की जांच रिपोर्ट पेश नहीं की।
छह प्रतिशत ब्याज के साथ मिलेगा मुआवजा
हाई कोर्ट ने कहा कि देश में करोड़ों लोग ट्रेन से यात्रा करते हैं, क्योंकि वे हवाई जहाज या निजी वाहन का खर्च नहीं उठा सकते। ऐसे में मुआवजे के नियमों की संकीर्ण व्याख्या करने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को नुकसान होगा।
अदालत ने रेलवे दावा अधिकरण का फैसला रद करते हुए बनमाली के परिजनों को आठ लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने दावा आवेदन दाखिल करने की तिथि से मुआवजे का आदेश दिए जाने तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया है।
