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नाबालिग को जेल भेजने के मामले में झारखंड हाई कोर्ट में उपस्थित हुए सीएस, प्रमाणिक हत्याकांड में रांची एसएसपी तलब

Published: Thu, 29 Oct 2026 01:02 PM (IST)

नाबालिग को जेल भेजने के मामले में झारखंड हाई कोर्ट में मुख्य सचिव उपस्थित हुए, जहां अदालत ने सरकारी तंत्र ...और पढ़ें

अदालत ने कहा- अधिवक्ताओं और सरकारी तंत्र के बीच समन्वय की कमी।

अदालत ने कहा- अधिवक्ताओं और सरकारी तंत्र के बीच समन्वय की कमी।

HighLights

  1. नाबालिग को जेल भेजने पर मुख्य सचिव कोर्ट में उपस्थित।

  2. सरकारी तंत्र, अधिवक्ताओं के समन्वय पर कोर्ट ने जताई नाराजगी।

  3. सिकिदिरी हाइडल प्रोजेक्ट मामले में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत में नाबालिग को जेल भेजे जाने के मामले में 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग को लेकर दायर अनीता देवी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार वीडियो कान्फ्रेंसिंग से उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के अधिवक्ताओं और सरकारी तंत्र के बीच समन्वय की कमी पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि सरकार के अधिवक्ता मामले में सही ढंग से पक्ष नहीं रख पा रहे हैं। इस पर मुख्य सचिव ने व्यवस्था में सुधार करने का आश्वासन दिया।

इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन नवंबर को निर्धारित की। कोर्ट ने मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने से छूट दे दी। यह मामला रांची के सदर थाना क्षेत्र में हुई छिनतई की घटना से जुड़ा है।

आरोप है कि पुलिस ने अनीता देवी के 16 वर्षीय बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर उसकी उम्र नाबालिग पाए जाने पर रांची कोर्ट के आदेश से उसे डुमरदगा स्थित बाल सुधार गृह भेज दिया गया था। इस मामले में अनीता देवी ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने बेटे को जेल भेजे जाने के एवज में 20 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है।

डीजे संचालक संदीप प्रमाणिक हत्याकांड में रांची एसएसपी तलब

अदालत ने रांची के एसएसपी को चार नवंबर को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने एसएसपी से पूछा है कि अनुसंधान में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है या नहीं। इस मामले में रांची की अदालत ने अभिषेक सिंह उर्फ विक्की सहित 10 अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए नौ-नौ साल की सजा सुनाई थी।

अदालत ने उन्हें गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया था। दोषियों में अभिषेक सिंह, अशोक कुमार सिंह, शमीरूद्दीन, प्रतीक, मृत्युंजय कुमार, प्रकाश कुमार, दिवाकर उपाध्याय, आलोक दीवा, पंकज कुमार और सुमित कुमार शामिल हैं। सभी ने रांची कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले संदीप प्रमाणिक की 26 मई 2024 की देर रात कडरू स्थित एक्सट्रीम बार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जानकारी के अनुसार, बार में कुछ युवकों और कर्मचारियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था।

विवाद के दौरान दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई। आरोप है कि इसके बाद अभिषेक सिंह ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर मारपीट का बदला लेने की योजना बनाई। वह सेल सिटी स्थित अपने किराये के घर से राइफल लेकर दोबारा बार पहुंचा और संदीप प्रमाणिक को गोली मार दी। गोली लगने से संदीप की मौके पर ही मौत हो गयी।

जेएसईबी के पूर्व चेयरमैन की याचिका पर निर्णय सुरक्षित

हाई कोर्ट में सिकिदिरी हाइडल प्रोजेक्ट (स्वर्णरेखा जल विद्युत परियोजना) में हुए करोड़ों रुपये के कथित अनियमितता मामले में झारखंड राज्य बिजली बोर्ड (जेेएसईबी) के तत्कालीन अध्यक्ष शिवेंद्र नाथ वर्मा की याचिका पर सुनवाई हुई।

अदालत ने मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया। जेएसईबी के पूर्व अध्यक्ष शिवेन्द्र नाथ वर्मा ने सीबीआइ के विशेष कोर्ट की ओर से डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

मामला स्वर्णरेखा जल विद्युत परियोजना, सिकिदरी, रांची का है। यहां 65-65 मेगावाट के दो पावर हाउस 1977 और 1980 में भेल (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) ने लगाए थे। सीबीआइ के अनुसार, साल 2011-12 में जेएसईबी के अधिकारियों ने भेल और एनपीईएल के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची।

जिस मरम्मत कार्य का अनुमानित बजट महज 2.5 करोड़ रुपये था। उस नियम को ताक पर रखकर 20.87 करोड़ रुपये में भेल को आवंटित कर दिया गया। शिवेंद्र नाथ वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने इसको मंजूरी दी।

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