झारखंड में किसानों की जमीन का होगा वेरिफिकेशन, सरकार खरीदेगी 50 लाख क्विंटल धान
झारखंड सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 50 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए किसानों की जमीन का सत्यापन अनिवार्य होगा।

झारखंड में किसानों की जमीनों का होगा वेरिफिकेशन, सरकार खरीदेगी 50 लाख क्विंटल धान (AI Generated Image)
HighLights
राज्य सरकार 50 लाख क्विंटल धान खरीदेगी, जमीन सत्यापन अनिवार्य।
किसानों को एमएसपी भुगतान, भंडारण व्यवस्था पर जोर दिया गया।
ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम बिचौलियों पर रोक लगाने में सहायक होगा।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में पिछले वर्ष की तुलना में धन अधिप्राप्ति का लक्ष्य कम करते हुए तय किया है कि 2026-27 में धान अधिप्राप्ति योजना के अंतर्गत किसानों से कुल 50 लाख क्विंटल धान की खरीद करेगी। हालांकि, धान खरीद से पहले किसानों की जमीन का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा और इसके बाद जमीन के अनुरूप ही धान की खरीद की जाएगी।
राज्य में धान अधिप्राप्ति की तैयारी, किसानों को एमएसपी भुगतान, भंडारण व्यवस्था सहित कई मुद्दों को लेकर शुक्रवार को खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अपने आवासीय कार्यालय में विभागीय अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की।
बैठक में मंत्री को बताया गया कि केंद्र सरकार ने डीलर कमीशन के रूप में एक वर्ष की राशि राज्य सरकार को उपलब्ध करा दी है। जल्द ही डीलरों को बकाया कमीशन के भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मंत्री डा. अंसारी ने कहा कि धान की खरीद के साथ-साथ उसके सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था भी मजबूत होना आवश्यक है, जिसके तहत वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार 1000 मीट्रिक टन क्षमता वाले 15 नए गोदामों का निर्माण कराएगी। इससे खाद्यान्न के भंडारण की क्षमता बढ़ेगी और किसानों से खरीदे गए धान के रखरखाव में सुविधा होगी।
बैठक में धान परिवहन की ऑनलाइन ट्रैकिंग, किसानों की जमीन के सत्यापन, विभाग में पदाधिकारियों की कमी तथा आगामी त्योहारों को देखते हुए खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की तैयारियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान विभागीय सचिव राजेश कुमार शर्मा सहित कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम से किसानों को लाभ: अंसारी
मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि धान को देखकर यह पता नहीं चल पाता कि वह झारखंड का है, बिहार का है, बंगाल का है या उत्तर प्रदेश का, इसलिए तकनीक के माध्यम से पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाना जरूरी है।
मंत्री ने कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से यह जानकारी उपलब्ध रहेगी कि धान कहां से आया, किस किसान से खरीद हुई, किस धान अधिप्राप्ति केंद्र पर खरीद हुई, धान का उठाव कहां से हुआ, किस वाहन से परिवहन हुआ, किस मिलर को भेजा गया और आगे उसका भंडारण एवं उपयोग कहां हुआ।
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम किसानों के लिए वरदान साबित होगा, क्योंकि इससे वास्तविक किसानों को सरकारी व्यवस्था का लाभ दिलाने में मदद मिलेगी तथा बिचौलियों एवं कालाबाजारी पर रोक लगाने में भी सहायता मिलेगी। इसी तरह धान का परिवहन करने वाले वाहनों को भी ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि धान की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा सके।
