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झारखंड के वित्त मंत्री ने डीजीपी को घेरा, बोले- महोदया, आप खुद बूढ़ा पहाड़ पर जाकर देख लें कि क्यों चाहिए सुरक्षा

Published: Mon, 06 Jul 2026 10:50 AM (IST)

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने डीजीपी तदाशा मिश्रा को पत्र लिखकर सुरक्षा व्यवस्था में खामियों और अतिरिक्त वाहन की मांग ...और पढ़ें

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने डीजीपी को दोबारा पत्र लिखा।

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने डीजीपी को दोबारा पत्र लिखा।

HighLights

  1. वित्त मंत्री ने डीजीपी को सुरक्षा खामियों पर कड़ा पत्र लिखा।

  2. अतिरिक्त वाहन की मांग पर ढाई महीने से नहीं मिला जवाब।

  3. राज्य में अपराध की बदलती प्रकृति पर गहरी चिंता जताई।

राज्य ब्यूरो, रांची। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा को फिर कड़ा पत्र लिखकर सुरक्षा व्यवस्था में विसंगतियों को उजागर किया है। मंत्री ने अपने सुरक्षाकर्मियों के लिए अतिरिक्त वाहन की मांग पर लगभग ढाई महीने (2 महीने 14 दिन) के बाद भी कोई जवाब न मिलने पर एक बार फिर नाराजगी जताई है।

मंत्री ने लिखा है कि डीजीपी ने न तो 'हां' में और न ही 'ना' में कोई जवाब दिया। मंत्री ने आगे लिखा- संभवतः आपने समझा होगा कि राज्य के पुलिस महानिदेशक का राज्य के मंत्री के प्रति कोई उत्तरदायित्व नहीं है। डीजीपी महोदया खुद बूढ़ा पहाड़ जाकर देख लें तो सुरक्षा की आवश्यकता का अंदाजा लग जाएगा।

मंत्री ने डीजीपी को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि वे खुद लातेहार का बूढ़ा पहाड़, सारंडा के जंगल, गिरिडीह के झूमरा पहाड़, पलामू के चेतना, डगरा, कुहकुहा जैसे क्षेत्रों में जाएं। तब उन्हें सुरक्षा की वास्तविक आवश्यकता का अंदाजा होगा।

उन्होंने पहाड़ों पर तैनात पुलिस पिकेट के जवानों की दुर्दशा की ओर भी ध्यान दिलाया है। पत्र की एक प्रति अपर मुख्य सचिव, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को भी भेजी गई है।

पुराने सुरक्षा मानकों में बदलाव का सुझाव

मंत्री ने डीजपी को सुझाव दिया कि वे पुराने सुरक्षा मानकों में नए सिरे से बदलाव करें और मंत्रियों, सांसदों, विधायकों व अन्य गणमान्य व्यक्तियों की बढ़ती सुरक्षा खतरों को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों, वाहनों व अन्य सुविधाओं को बढ़ाया जाए।

डीजीपी के बयान पर कटाक्ष किया, बदलते अपराध के स्वरूप पर चिंता जताई

मंत्री ने डीजीपी द्वारा समाचार पत्रों में दिए गए उस बयान पर तीखा प्रहार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वित्त मंत्री को पर्याप्त वाहन उपलब्ध है। मंत्री ने कहा कि 16 सुरक्षा कर्मियों के लिए सिर्फ तीन वाहन पर्याप्त होना उनकी सोच को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा, तीन गाड़ियों में 16 सुरक्षा कर्मियों को ठूंसकर बैठाना सुरक्षा कर्मियों की सुरक्षा के लिए व्यावहारिक नहीं है। दूसरी ओर, मंत्री ने राज्य में अपराध की बदलती प्रकृति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने लिखा, झारखंड में पहले के अपराध और वर्ष 2026 के अपराध में बहुत अंतर आया है।

दूसरे देशों में बैठे अपराधी झारखंड के कारोबारियों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों से रंगदारी मांग रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। उन्होंने चौंकाने वाला उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिस की पीसीआर वैन से जबरदस्ती खींचकर पुलिस की उपस्थिति में एक निर्दोष व्यक्ति की सरेआम हत्या कर दी जा रही है।

अपराधी भी उतने ही सशक्त हुए

मंत्री ने कहा कि विगत वर्षों में झारखंड पुलिस का जितना आधुनिकीकरण हुआ है, अपराधी भी उतने ही सशक्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि डीजीपी की यह सोच है कि पूर्व के निर्धारित सुरक्षा मानक वर्तमान समय में पर्याप्त हैं, तो यह सोच व्यावहारिक नहीं है।

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