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8 साल से नहीं मिला सुराग! गुमला की लापता बच्ची के मामले में झारखंड हाईकोर्ट सख्त, एसपी से मांगा जवाब

Published: Fri, 30 Oct 2026 06:30 PM (IST)

गुमला से 2018 से लापता बच्ची के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस की जांच में लापरवाही और अधिकारियों ...और पढ़ें

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो।

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने पुलिस जांच में लापरवाही पर नाराजगी जताई।

  2. गुमला एसपी और गृह विभाग से शपथ पत्र मांगा गया।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की अदालत में गुमला से सितंबर 2018 से लापता 15 वर्षीय बच्ची के मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस अनुसंधान में लापरवाही और जांच की निगरानी में बरती गई चूक पर नाराजगी जताई है।

खंडपीठ ने सवाल उठाया कि बच्ची के लापता रहने से संबंधित प्रगति रिपोर्ट समय पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), गुमला को नहीं भेजने के मामले पर वन मैन कमेटी ने विचार क्यों नहीं किया और वर्ष 2018 से 2022 तक के तत्कालीन एसपी व जांचकर्ता को किस आधार पर क्लीन चिट दे दी गई।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से प्रार्थी के जवाब पर प्रति उत्तर दाखिल किया गया। इसमें स्वीकार किया गया कि बच्ची के लापता रहने से संबंधित प्रगति रिपोर्ट डालसा को देर से भेजी गई। अनुसंधानकर्ता ने यह रिपोर्ट 23 अक्टूबर को भेजी थी। सरकार ने इस देरी के लिए अदालत से बिना शर्त माफी मांगी।

इस पर अदालत ने सवाल किया कि जब प्राथमिकी दर्ज होने के चार महीने के भीतर पहली रिपोर्ट और उसके बाद प्रत्येक तीन महीने पर रिपोर्ट डालसा को भेजी जानी थी, तो इस प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया। अदालत ने गृह विभाग को इस पूरे मामले पर शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

आरोपित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कस्टडी मांगने पर सवाल

सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की मुख्य आरोपित भूखली लकड़ा को छह जून को गिरफ्तार किया गया है। उससे पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी की मांग को लेकर आवेदन दिया गया है। अदालत ने सवाल उठाया कि गिरफ्तारी के चार-पांच दिन बाद पुलिस कस्टडी मांगना कहां तक उचित है।

अदालत ने गुमला एसपी को शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि बच्ची के लापता होने के मामले में अनुसंधान सही तरीके से क्यों नहीं किया गया और जांच में ढिलाई क्यों बरती गई।

सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट में संदिग्ध मिली आरोपित

सरकार की ओर से बताया गया कि मुख्य आरोपित भूखली लकड़ा का गुजरात के गांधीनगर में सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट कराया गया था, जिसमें वह संदिग्ध पाई गई। इससे पहले सरकार ने अदालत को बताया था कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से आरोपित का नार्को टेस्ट नहीं हो सका।

इसके बाद गांधीनगर में उसका सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट समेत दो पूरक परीक्षण कराए गए थे। इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया था कि सरकार के शपथ पत्र में वर्ष 2018 से 2022 तक के तत्कालीन एसपी और अनुसंधानकर्ता को क्लीन चिट दे दी गई है, जबकि उस समय प्राथमिकी दर्ज करने में भी देरी हुई थी।

सरकार की ओर से बच्ची के लापता होने से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों को भी सामने नहीं लाया गया है। बता दें कि लापता बच्ची का बरामदगी के लिए उसकी मां ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। 

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