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गिरिडीह उपचुनाव में बढ़ेगी सियासी तपिश! BJP-JMM के बीच जयराम महतो ने भी ठोकी ताल, चुनावी समीकरण बदलने की तैयारी

Published: Sun, 01 Nov 2026 06:19 PM (IST)

Giridih By- Election: गिरिडीह विधानसभा उप चुनाव में झामुमो और भाजपा के साथ जयराम महतो के नेतृत्व वाला जेएलकेएम भी ...और पढ़ें

गिरिडीह उपचुनाव में भाजपा, झामुमो और जेएलकेएम की तैयारी तेज। (एआई जेनरेटेड इमेज)

गिरिडीह उपचुनाव में भाजपा, झामुमो और जेएलकेएम की तैयारी तेज। (एआई जेनरेटेड इमेज)

HighLights

  1. गिरिडीह उपचुनाव में भाजपा, झामुमो और जेएलकेएम की तैयारी तेज।

  2. जयराम महतो ने चुनावी मैदान खाली नहीं छोड़ने का किया ऐलान।

  3. कुड़मी और चंद्रवंशी वोटरों को जोड़ने की जेएलकेएम की रणनीति।

अश्विनी रघुवंशी, रांची। Giridih By- Election: नगर विकास और उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से गिरिडीह विधानसभा सीट खाली हुई है। झामुमो और भाजपा ने उप चुनाव की तैयारी तेज कर दी है।

डुमरी विधायक जयराम महतो के नेतृत्व वाले दल झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) ने भी घोषणा की है कि वो गिरिडीह के चुनावी समर में पूरे दमखम के साथ उतरने को तैयार है। यह वही जेकेएलएम हैं, जिसने 2024 के विधानसभा चुनाव में सारे समीकरण गडमड कर दिए थे। जयराम के ऐलान के बाद भाजपा की पेशानी पर कुछ ज्यादा बल पड़ गए हैं, तो झामुमो के भीतर भी हलचल है।

हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद आठ उप चुनाव हुए हैं। इनमें इंडिया गठबंधन ने सात उप चुनाव जीते हैं तो एनडीए सिर्फ एक। सिर्फ रामगढ़ सीट पर आजसू पार्टी को जीत मिली है। भाजपा एक भी उप चुनाव नहीं जीती है।

यही वजह है कि गिरिडीह में भाजपा कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहती। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन रांची आए तो गिरिडीह उप चुनाव पर झारखंड के शीर्ष नेताओं के साथ लंबी मंत्रणा की। उसके बाद से भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी लगातार गिरिडीह में हैं। झामुमो भी शांत नहीं है।

रूपी सोरेन का श्राद्ध कर्म खत्म हुआ तो गांडेय विधायक कल्पना सोरेन सीधे गिरिडीह गई। उनके साथ केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय भी थे। सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा के साथ दो दिन जनता के बीच इतना घूमती रही कि सुबह से रात कब हुई, पता नहीं चलता था। ठंड में भी पसीना आ गया। जल्द मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी गिरिडीह में आदिवासियों के सम्मेलन में जाएंगे। जयराम ने भी अपने समर्थकों को संदेश दिया है कि वे आएंगे तो गिरिडीह में लंबा ठौर ठिकाना बनाएंगे।

महतो के साथ चंद्रवंशी के मेलमिलाप की रणनीति

झारखंड में कुड़मी समुदाय न सिर्फ गांवों अपितु राजनीति में भी कमोवेश प्रभावी रहा है। गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र के सीमावर्ती गंवई इलाके में कुड़मी आबादी है तो पचम्बा, बक्सीडीह, अलकापुरी, बोडो, बनियाडीह समेत गिरिडीह निगम क्षेत्र में चंद्रवंशी की संख्या कम नहीं है। दोनों समुदाय के वोटरों की संख्या 40 हजार के आसपास है।

जेएलकेएम गिरिडीह में कुड़मी के साथ चंद्रवंशी समुदाय के मेलमिलाप की कोशिश में हैं। पार्टी के केंद्रीय संयुक्त महासचिव नागेंद्र चंद्रवंशी भी बतौर उम्मीदवार दिख सकते हैं। और समुदायों को भी साथ लाने की कवायद में जयराम एंड टीम लगी हुई है।

जयराम बोले, हम मैदान खाली नहीं छोड़ेंगे

जेएलकेएम अध्यक्ष सह डुमरी विधायक जयराम महतो ने कहा कि गिरिडीह हो अथवा कोई और जगह, हम किसी भी चुनावी मैदान को खाली नहीं छोड़ेंगे। दो धुर्वीय राजनीति नहीं होगी। झारखंडी जनता को तीसरा विकल्प भी मिलना चाहिए। जयराम बोले, गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र से पहला चुनाव लड़े थे। तब गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से 22 हजार मत मिले थे।

पिछले विधानसभा चुनाव में गिरिडीह से 10 हजार से अधिक मत मिले थे। यहां की जनता बदलाव करती रही है। इस बार भी बदलाव संभव है। उन्होंने कहा कि सीजीएल की परीक्षा में गिरिडीह से सबसे अधिक लोग पकड़े गए हैं। यहां की सत्ता के साथ कुछ न कुछ जुड़ाव रहा है। चुनाव में सारे मसले सामने आएंगे। 

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