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30 साल बाद फिर खुलेगी चारा घोटाला की फाइल, सत्येंद्र कुमार पर रांची में चलेगा मुकदमा

Published: Sat, 24 Oct 2026 08:58 PM (IST)

चारा घोटाले के आरोपी सत्येंद्र कुमार को 30 साल बाद लखनऊ से गिरफ्तार कर रांची लाया गया।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. सत्येंद्र कुमार 30 साल बाद चारा घोटाले में गिरफ्तार।

  2. लखनऊ से सीबीआई ने गिरफ्तार कर रांची कोर्ट में पेश किया।

  3. न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार भेजा गया।

राज्य ब्यूरो, रांची। लगभग 30 साल बाद चारा घोटाले के आरोपित सत्येंद्र कुमार को सीबीआई ने लखनऊ से गिरफ्तार कर रांची की सीबीआई कोर्ट में पेश किया।

64 साल के सत्येंद्र कुमार को शनिवार को सीबीआई के प्रभारी विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र कुमार की अदालत में प्रस्तुत किया गया, जहां से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में लेते हुए बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार भेज दिया।

सत्येंद्र करीब 30 साल से फरार चल रहा था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता स्वरूप सिन्हा ने बताया कि उसे चारा घोटाला के कांड संख्या आरसी 56ए/1996 में रिमांड किया गया है।

सीबीआई ने आरोपित को गुरुवार की मध्यरात्रि लखनऊ रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। इसके बाद ट्रांजिट रिमांड पर उसे रांची लाया गया और शनिवार को अदालत में पेश किया गया।

सत्येंद्र चारा घोटाले के तीन से चार मामलों में चार्जशीटेड आरोपित है। इनमें आरसी 52ए/1996 और आरसी 57ए/1996 भी शामिल है। सत्येंद्र आपूर्तिकर्ता था। चारा घोटाले में नाम आने के बाद से वह फरार चल रहा था।

अवकाश के बाद अदालत खुलने पर सीबीआई उसे अन्य मामलों में भी पेश कर रिमांड पर लेने की प्रक्रिया अपनाएगी। उस पर सरकारी कोषागार से फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये की राशि निकालने का आरोप है।

चारा घोटाले के 53 मामलों में सुनवाई पूरी

चारा घोटाला को लेकर कुल 53 मामलों की सुनवाई रांची की सीबीआई कोर्ट में हुई है। इनमें से पांच मामलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित अन्य राजनीतिक लोगों को आरोपित बनाया गया था।

सभी मामलों में अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए सजा सुना चुकी है। सत्येंद्र कुमार भी जिस मामले में आरोपित है, उस मामले में सजा सुना दी गई है।

कोर्ट ने फरार घोषित करते हुए सत्येंद्र कुमार का मामला पहले ही अलग कर दिया था। इन मामलों में सीबीआई का पक्ष रखने के लिए सात विशेष लोक अभियोजक बनाए गए थे।

जिसमें शिव कुमार काका, एसआर दास, जेएन सिंह, रविशंकर, बीएमपी सिंह, एसके लाल और राकेश प्रसाद शामिल हैं।

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