20 लाख के इनामी माओवादी रवींद्र गंझू की 3.87 करोड़ की संपत्ति जब्त, रांची ED की बड़ी कार्रवाई
ईडी ने माओवादी रवींद्र गंझू और उसके सहयोगियों की 3.87 करोड़ रुपये की 11 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है।

रांची ईडी।
HighLights
ईडी ने माओवादी रवींद्र गंझू और सहयोगियों की संपत्ति जब्त की।
3.87 करोड़ की 11 अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त हुईं।
टेरर फंडिंग व अपराध से अर्जित राशि से खरीदी गई थीं।
राज्य ब्यूरो, रांची। ईडी के रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने सोमवार को कुख्यात माओवादी 20 लाख के इनामी रवींद्र गंझू व उसके सहयोगी मेसर्स संतोष कंस्ट्रक्शन, संतोष कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू, मनीष कुमार, बैजनाथ गंझू व राजेश कुमार गंझू की 3.87 करोड़ रुपये की 11 अचल संपत्ति को अस्थाई रूप से जब्त की है।
यह संपत्तियां अपराध से अर्जित राशि से मेसर्स संतोष कंस्ट्रक्शन, संतोष कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू सिंह और मनीष कुमार के नाम पर झारखंड के लातेहार जिले के मौजा चंदवा और मौजा कामता में खरीदी गईं थीं।
पूरा मामला लेवी-रंगदारी के पैसे से चल-अचल संपत्ति अर्जित करने से संबंधित है। ईडी ने लातेहार के चंदवा थाने में दर्ज दो अलग-अलग प्राथमिकियों के आधार पर इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी।
एक प्राथमिकी चंदवा थाना क्षेत्र के लुकैया मोड़ पर चार पुलिसकर्मियों-पदाधिकारियों की हत्या कर हथियार व गोला बारूद लूटने के मामले से जुड़ी थी। इस केस को एनआइए ने टेकओवर किया था और टेरर फंडिंग के मामले में जांच की थी।
वहीं, दूसरी प्राथमिकी चंदवा थाना क्षेत्र में पांच लाख रुपये नकदी जब्ती से संबंधित थी। यह राशि मेसर्स संतोष कंस्ट्रक्शन के पार्टनर मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू सिंह ने प्रतिबंधित माओवादी संगठन सीपीआइ माओवादी के लातेहार रीजनल कमांडर रवींद्र गंझू को जबरन लेवी के तौर पर दी थी।
टेरर फंडिंग से की थी 7.16 करोड़ की अवैध उगाही
ईडी ने जांच में पाया है कि माओवादी रवींद्र गंझू व अन्य आरोपितों ने टेरर फंडिंग से लगभग 7.16 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की थी। यह अवैध कमाई नकदी के रूप में की गई थी।
इसमें से 2.69 करोड़ रुपये एनआइए ने तलाशी के दौरान नकदी में बरामद किया था। शेष 4.46 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 के दौरान फर्म में पूंजी के तौर पर लगाया गया और उसे विभिन्न माध्यमों से घुमाया गया था।
जांच में यह भी पता चला कि बैंकिंग जांच से बचने के लिए कम कीमत वाले सेल डीड और बिना हिसाब-किताब वाले नकद भुगतान का इस्तेमाल किया गया था।
अपराध से कमाई गई रकम को मुख्य अर्थव्यवस्था में शामिल किया गया। इसके लिए मेसर्स संतोष कंस्ट्रक्शन, संतोष कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू सिंह और मनीष कुमार के नाम पर झारखंड के लातेहार जिले के मौजा चंदवा और मौजा कामता में 11 अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
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